सम्पूर्ण भारतीय अंक ज्योतिष
सम्पूर्ण अंक ज्योतिष रिपोर्ट
जन्म तिथि और नाम से अपने व्यक्तित्व, भाग्य और जीवन पथ के बारे में जानें — अंक ज्योतिष की प्राचीन भारतीय विद्या के माध्यम से।
केवल नाम और जन्म तिथि आवश्यक है
भारतीय अंक ज्योतिष (अंक शास्त्र) वैदिक ज्ञान की वह शाखा है जो मानव जीवन पर अंकों के कम्पन-प्रभाव का अध्ययन करती है। पश्चिमी पायथागोरियन अंक ज्योतिष से अलग, भारतीय पद्धति नवग्रहों और नौ एकल अंकों के सम्बन्ध पर काम करती है, और संस्कृत ध्वनि विज्ञान पर आधारित एक विशिष्ट अक्षर-अंक तालिका का प्रयोग करती है।
प्रत्येक व्यक्ति के पास जन्म तिथि और नाम से निकले तीन मूल अंक होते हैं: मूलांक (जन्म दिनांक से), भाग्यांक (पूर्ण जन्म तिथि से) और नामांक (अंग्रेज़ी नाम की वर्तनी से)। ये तीनों मिलकर एक सामंजस्य त्रिकोण बनाते हैं जिसकी भुजाएँ बताती हैं कि आपका अंतर्मन, भाग्य पथ और सार्वजनिक प्रक्षेपण एक-दूसरे के अनुकूल हैं या प्रतिकूल।
निःशुल्क कैलकुलेटर आपको एक अंक और एक पैराग्राफ का विवरण दिखाते हैं। यह रिपोर्ट 60 पृष्ठ का गहन अध्ययन है जिसमें व्यक्तित्व, भाग्य, नाम सुधार, रत्न और मंत्र उपाय, नौ अंकों के साथ अनुकूलता, 12 माह का शुभ तिथि कैलेंडर और व्यक्तिगत कार्य योजना — सब कुछ नवग्रह पद्धति पर आधारित है, सामान्य पश्चिमी अंक ज्योतिष पर नहीं।
आपको अपना पूरा नाम (अंग्रेज़ी वर्तनी) और जन्म तिथि चाहिए। वैकल्पिक रूप से अतिरिक्त विश्लेषण के लिए मोबाइल नंबर और जन्म नाम (यदि वर्तमान नाम से अलग हो) भी दे सकते हैं।
भारतीय अंक ज्योतिष (अंक शास्त्र) नवग्रह पद्धति पर आधारित है — जिसमें राहु और केतु भी शामिल हैं — और संस्कृत ध्वनि विज्ञान से निकली एक विशिष्ट अक्षर-अंक तालिका का प्रयोग करती है। पश्चिमी पायथागोरियन पद्धति में ग्रहीय सम्बन्ध के बिना एक सरल 1-9 तालिका होती है।
सामंजस्य त्रिकोण आपके तीन मूल अंकों — मूलांक, भाग्यांक और नामांक — को एक त्रिभुज के शीर्षों पर रखता है। प्रत्येक भुजा उन दो अंकों के ग्रहों के सम्बन्ध (मित्र, सम या शत्रु) को दर्शाती है। इससे पता चलता है कि आपका अंतर्मन, भाग्य और सार्वजनिक प्रक्षेपण कहाँ मेल खाते हैं और कहाँ टकराते हैं।
हाँ। मूलांक और भाग्यांक जन्म तिथि से निश्चित होते हैं, लेकिन नामांक को नाम की वर्तनी में विचारपूर्ण बदलाव से अनुकूलित किया जा सकता है। रिपोर्ट में विशिष्ट सुझाव और पहले-बाद का विश्लेषण दिया जाता है।
रिपोर्ट में रत्न धारण विधि (विशिष्ट रत्न, उँगली, धातु, रत्ती और दिन), रुद्राक्ष सुझाव, बीज मंत्र एवं जप संख्या, व्रत मार्गदर्शन और दान सुझाव — सभी आपके स्वामी ग्रहों के अनुसार व्यक्तिगत होते हैं।
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