प्राचीन भारतीय अंकशास्त्र – जानें आपके जीवन में अंकों का रहस्य
वैदिक अंक ज्योतिष (अंकशास्त्र) एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो हमारे जीवन में अंकों के ब्रह्मांडीय प्रभाव को प्रकट करता है। वेदों में निहित यह प्रणाली प्रत्येक अंक (1-9) को नवग्रह में से एक से जोड़ती है, जिससे व्यक्तित्व, भाग्य और जीवन उद्देश्य के बारे में अंतर्दृष्टि मिलती है। पाश्चात्य अंक ज्योतिष के विपरीत, वैदिक अंक ज्योतिष अंक 4 और 7 के लिए राहु और केतु—छाया ग्रहों—का उपयोग करता है, जो गहरी कार्मिक समझ प्रदान करता है।
जन्मांक / मानसिक अंक
आपकी जन्म तिथि से गणना किया गया, मूलांक आपके आंतरिक व्यक्तित्व, प्राकृतिक प्रतिभाओं और आप खुद को कैसे देखते हैं, यह प्रकट करता है। यह वह अंक है जो आपके अवचेतन मन को नियंत्रित करता है।
भाग्य अंक / नियति अंक
आपकी पूर्ण जन्म तिथि (दिन+माह+वर्ष) से निकाला गया, भाग्यांक आपके जीवन पथ, कार्मिक पाठ और वह नियति दिखाता है जो आपको पूरी करनी है।
नाम अंक
आपके नाम के अक्षरों से गणना किया गया, नामांक प्रभावित करता है कि दूसरे आपको कैसे देखते हैं, आपकी सामाजिक बातचीत और करियर की सफलता।
वैदिक अंक ज्योतिष में, प्रत्येक अंक नौ ग्रहों (नवग्रह) में से एक द्वारा शासित है। यह ग्रह प्रभाव उस अंक की विशेषताओं को आकार देता है।
| अंक | ग्रह |
|---|---|
| 1 | सूर्य(Surya) |
| 2 | चंद्र(Chandra) |
| 3 | गुरु(Guru) |
| 4 | राहु(Rahu) |
| 5 | बुध(Budh) |
| 6 | शुक्र(Shukra) |
| 7 | केतु(Ketu) |
| 8 | शनि(Shani) |
| 9 | मंगल(Mangal) |
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