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इष्ट देवता कैलकुलेटर

कुंडली से जानें अपने आराध्य देव

आत्मा ने शरीर चुनने से पहले एक दिव्य रूप चुना था। वह रूप कौन सा है — जानें।

इष्ट देवता — आपके आराध्य — आत्मकारक ग्रह की नवांश स्थिति से निकाले जाते हैं। अपना जन्म विवरण दर्ज करें और अपना दिव्य संबंध जानें।

जन्म विवरण दर्ज करें

आत्मकारक और इष्ट देवता की सटीक गणना के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान आवश्यक है।

Date of Birth
Time of Birth

इष्ट देवता क्या होते हैं?

इष्ट देवता का अर्थ है 'चुना हुआ देव' — वह दिव्य रूप जिससे आपकी आत्मा का सबसे गहरा कार्मिक संबंध है। यह जन्म-धर्म या परंपरा से नहीं, बल्कि कुंडली में आत्मकारक ग्रह की नवांश स्थिति से गणितीय रूप से निकाला जाता है। 'इष्ट' शब्द 'इष्' धातु से बना है — इच्छा करना, चुनना। आपका इष्ट देवता वह दिव्य द्वार है जो ब्रह्मांड ने विशेष रूप से आपके लिए खोला है।

इष्ट देवता जानना केवल बौद्धिक अभ्यास नहीं है। यह बताता है कि किस देव की प्रार्थना, कौन सा मंत्र और कौन सी साधना आपके अन्तःकरण में सबसे अधिक अनुनाद उत्पन्न करेगी।

दो शास्त्रीय विधियाँ

Method A

विधि क — जैमिनी करकांश (गहरी विधि)

जैमिनी सूत्र और बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (अ. 82) के अनुसार: आत्मकारक ग्रह खोजें (सर्वाधिक अंश वाला)। उसकी नवांश (D9) राशि ज्ञात करें — यही 'करकांश लग्न' है। वहाँ से 12वाँ भाव देखें। उसमें स्थित ग्रह (या रिक्त होने पर राशिपति) — इष्ट देवता का संकेत देता है।

Method B

विधि ख — चंद्र नक्षत्र (सरल विधि)

सरल और प्रचलित विधि: जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उस नक्षत्र के अधिपति देव आपके इष्ट देवता माने जाते हैं। जब जन्म समय अनिश्चित हो तब यह विधि उपयोगी है।

शास्त्रीय प्रमाण

मुख्य स्रोत: बृहत्पाराशर होरा शास्त्र अध्याय 82 (करकांश अध्याय); जैमिनी सूत्र अध्याय 1, पाद 2, सूत्र 69–81; मंत्रेश्वर कृत फल-दीपिका।

इष्ट देवता — सामान्य प्रश्न और उत्तर