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नई दिल्ली में आज का राहु काल

इस समय नया काम शुरू न करें

नई दिल्ली
राहु काल 2:06 PM–3:51 PM IST • कुल 1 hour 45 minutes • सूर्योदय 05:23

आज का राहु काल

इस समय नया काम शुरू न करें

शुरू
खत्म
कितनी देर
1 hour 45 minutes
अभी नहीं चल रहा
नई दिल्ली

आज की ख़ास बातें — नई दिल्ली

  • नया काम 2:06 PM से पहले या 3:51 PM के बाद शुरू करें।
  • सुबह बातचीत और मिलना-जुलना ठीक है; दोपहर को चल रहे काम निपटाएं।
  • नीचे देखें कि आने वाले दिनों में यह समय कब से कब तक रहेगा।

अगले 6 दिन

आने वाले दिनों का राहु काल

19
शुक्रवार, जून 19, 2026
शुक्रवार
शुरू
10:37 AM
खत्म
12:22 PM
कितनी देर
1 hour 45 minutes
20
शनिवार, जून 20, 2026
शनिवार
शुरू
8:53 AM
खत्म
10:38 AM
कितनी देर
1 hour 45 minutes
21
रविवार, जून 21, 2026
रविवार
शुरू
5:37 PM
खत्म
7:21 PM
कितनी देर
1 hour 44 minutes
22
सोमवार, जून 22, 2026
सोमवार
शुरू
7:09 AM
खत्म
8:53 AM
कितनी देर
1 hour 44 minutes
23
मंगलवार, जून 23, 2026
मंगलवार
शुरू
3:52 PM
खत्म
5:37 PM
कितनी देर
1 hour 45 minutes
24
बुधवार, जून 24, 2026
बुधवार
शुरू
12:23 PM
खत्म
2:08 PM
कितनी देर
1 hour 45 minutes

राहु काल: रोज़ का वह समय जब नया काम टालना चाहिए

भारतीय घरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच एक छोटा सा समय होता है जिसमें कोई नया काम शुरू नहीं करते। इसे राहु काल कहते हैं। यह करीब डेढ़ घंटे का होता है और हर दिन, हर शहर में अलग-अलग समय पर आता है — क्योंकि सूर्योदय-सूर्यास्त बदलते रहते हैं।

कैसे निकालते हैं राहु काल

पंचांग में इसे इस तरह निकालते हैं:

  1. अपने शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त का समय लें।
  2. दिन की कुल लंबाई निकालें (सूर्यास्त − सूर्योदय)।
  3. इसे आठ बराबर हिस्सों में बाँट दें।
  4. जिस दिन का राहु काल देखना है, उस दिन के लिए तय हिस्सा चुनें (नीचे तालिका देखें)।
  5. उस हिस्से का शुरू से खत्म का समय ही उस दिन का राहु काल है।
दिनराहु काल का हिस्साकब आता है
सोमवारदूसरासुबह का समय
मंगलवारसातवाँशाम होने से पहले
बुधवारपाँचवाँदोपहर का समय
गुरुवारछठादोपहर के बाद
शुक्रवारचौथादेर सुबह
शनिवारतीसरासुबह का समय
रविवारआठवाँशाम का समय

ध्यान रहे: कुछ किताबों में एक फिक्स्ड टाइम दिया होता है, लेकिन सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाला गया समय ज़्यादा सही रहता है क्योंकि यह आपके शहर के हिसाब से होता है।

राहु काल के हिसाब से दिन कैसे प्लान करें

ये काम इस समय शुरू न करें

  • कोई नया काम या कारोबार
  • पहली बार किसी से मिलना या इंटरव्यू
  • ज़रूरी कागज़ों पर दस्तख़त
  • बड़ी ख़रीदारी या पेमेंट
  • कोई उद्घाटन या शुभ काम
  • सफ़र पर निकलना

ये काम चलते हैं

  • जो काम पहले से चल रहा है, उसे जारी रखें
  • रोज़मर्रा के छोटे-मोटे काम
  • पढ़ाई, अभ्यास, या घर की साफ़-सफ़ाई
  • जो काम टाला नहीं जा सकता

अगर टालना मुश्किल हो तो:

राहु काल शुरू होने से पहले ही काम शुरू कर दें और जारी रखें, या राहु काल खत्म होने के बाद शुरू करें। थोड़ा रुककर मन शांत करने से भी फ़ायदा होता है।

आम सवाल-जवाब

क्या राहु काल रोज़ एक ही टाइम पर होता है?

नहीं, हर दिन थोड़ा अलग होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त बदलते हैं, तो राहु काल का समय भी बदल जाता है। तरीका वही रहता है, बस टाइम अलग होता है।

राहु काल कितनी देर का होता है?

आमतौर पर करीब डेढ़ घंटे का। गर्मियों में दिन बड़े होते हैं तो थोड़ा ज़्यादा, सर्दियों में थोड़ा कम।

अगर कोई काम पहले से चल रहा हो, तो राहु काल में रोक देना चाहिए?

नहीं, रोकने की ज़रूरत नहीं। परंपरा सिर्फ़ नया काम शुरू करने से रोकती है। जो काम पहले से चल रहा है, वह जारी रख सकते हैं।

क्या रात में भी राहु काल होता है?

राहु काल को आमतौर पर दिन का समय माना जाता है — सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच। रात के लिए अलग नियम होते हैं।

राहु को 'छाया ग्रह' क्यों कहते हैं?

पुराणों में राहु की कथा है — जब राहु ने अमृत चखा तो भगवान विष्णु ने उसका सिर काट दिया। तब से राहु को छाया ग्रह कहते हैं — जो रोशनी में अंधेरा लाता है (जैसे ग्रहण में होता है)।

आसान तरीके

  • नया काम राहु काल के बाहर शुरू करें
  • इस समय में रोज़मर्रा के काम निपटाएं — मेल देखना, तैयारी करना, अभ्यास करना
  • अगर हो सके तो नया काम अभिजीत मुहूर्त में शुरू करें अभिजीत मुहूर्त
  • अगर टालना मुश्किल हो, तो शांत मन से काम शुरू करें

याद रखने की बातें

  1. 1. राहु काल में कोई नया काम शुरू न करें।
  2. 2. हर दिन और हर शहर में इसका समय अलग होता है।
  3. 3. दिन को आठ बराबर हिस्सों में बाँटते हैं — एक हिस्सा राहु का होता है।
  4. 4. जो काम पहले से चल रहा है, वह जारी रख सकते हैं। ज़रूरी काम तो होंगे ही।
  5. 5. अगर हो सके तो नया काम अभिजीत मुहूर्त में शुरू करें।

और जानकारी के लिए

ऋग्वेद 5.40 (स्वर्भानु की कथा)

विष्णु पुराण (राहु की उत्पत्ति)

बी. वी. रमन — मुहूर्त

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