सूर्य ग्रहण 20262
सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण
नई दिल्ली से दिखाई नहीं देगा — सूतक मान्य नहीं
नीचे दिए गए समय केवल संदर्भ के लिए आपके शहर की घड़ी में हैं।
⚠️ सुरक्षा चेतावनी: कभी भी नंगी आंखों से सूर्य ग्रहण न देखें। केवल प्रमाणित सौर फ़िल्टर का उपयोग करें।
सूर्य ग्रहण
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नई दिल्ली से दिखाई नहीं देगा — सूतक मान्य नहीं
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⚠️ सुरक्षा चेतावनी: कभी भी नंगी आंखों से सूर्य ग्रहण न देखें। केवल प्रमाणित सौर फ़िल्टर का उपयोग करें।
चंद्र ग्रहण 20262
चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण
✓ नई दिल्ली से दिखाई देगा
सूतक काल: 3 मार्च, 06:20 am से 3 मार्च, 06:47 pm तक
परंपरागत पालन संबंधी जानकारी — केवल शैक्षिक उद्देश्य से।
🌙 आध्यात्मिक अवधि: चंद्र ग्रहण मंत्र जप, ध्यान और आत्म-शुद्धि के लिए पवित्र समय है।
चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण
नई दिल्ली से दिखाई नहीं देगा — सूतक मान्य नहीं
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🌙 आध्यात्मिक अवधि: चंद्र ग्रहण मंत्र जप, ध्यान और आत्म-शुद्धि के लिए पवित्र समय है।
ग्रहण चरणों की व्याख्या
वैदिक ज्ञान
ग्रहण का आध्यात्मिक महत्व और पालन
महत्व
सूर्य ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेता है। वैदिक परंपरा में इसे आध्यात्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना गया है। सूर्य — प्रकाश और जीवन का स्रोत — जब कुछ समय के लिए ढक जाता है, तो उसे प्रकाश और अंधकार के शाश्वत संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इस अवधि में मंत्र, प्रार्थना और दान का फल कई गुना बढ़ा हुआ माना जाता है। शास्त्र इस काल को आत्मनिरीक्षण, ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त बताते हैं।
संस्कृत श्लोक
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। जन्मान्तर सहस्रेषु दारिद्र्यं नोपजायते॥
"जो प्रतिदिन सूर्य (आदित्य) को नमस्कार करते हैं, उन्हें सहस्रों जन्मों तक दरिद्रता नहीं आती।"
यस्य स्मृत्या च नामोक्त्या तपः पूजा क्रियादिषु। न्यूनं संपूर्णतां याति सद्यो वन्दे तमच्युतम्॥
"राहु जब तेजस्वी सूर्य को ग्रस लेता है, उस काल में धर्म का आचरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।"
पारंपरिक पालन
- सूर्योदय से ग्रहण की समाप्ति तक उपवास रखने की परंपरा है
- ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करना
- मंत्र जप — विशेषकर सूर्य मंत्र और गायत्री मंत्र
- ग्रहण समाप्त होने के बाद दान देना
- बहुत से श्रद्धालु ग्रहण काल प्रार्थना और ध्यान में बिताते हैं
- ग्रहण के बाद घर और पूजा-स्थल की शुद्धि करना
वैदिक मार्गदर्शन
करें
- •ग्रहण काल में साधना जारी रखें
- •मंत्र जप करें
- •ग्रहण के समय ध्यान करें
- •ग्रहण के बाद ज़रूरतमंदों को दान दें
- •भोजन से पहले स्नान करें
- •पेयजल और खाद्य पदार्थों की शुद्धि करें
न करें
- •ग्रहण काल में खाना-पीना
- •ग्रहण के समय सोना
- •ग्रहण के दौरान यात्रा
- •नए कार्यों का आरंभ
- •पके भोजन को खुला रखना
- •बिना आवश्यकता धारदार वस्तुओं का प्रयोग
नोट: यह जानकारी पारंपरिक वैदिक ग्रंथों पर आधारित है। ग्रहण से पहले के सूतक काल के नियमों और भोजन प्रतिबंधों के लिए हमारी सूतक काल मार्गदर्शिका देखें। ग्रहण के पूर्ण वैज्ञानिक और वैदिक विवरण के लिए ग्रहण मार्गदर्शिका पढ़ें।