2026 Pradosh Vrat कैलेंडर
New Delhi के लिए गणना किया गया समय
गुरु प्रदोष
गुरु, जनवरी 1, 2026
पौष, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और गुरु
धन, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण का संयोग।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भृगु प्रदोष
शुक्र, जनवरी 16, 2026
माघ, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और शुक्र
सौभाग्य, सौंदर्य और दाम्पत्य‑संतुलन के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भृगु प्रदोष
शुक्र, जनवरी 30, 2026
माघ, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और शुक्र
सौभाग्य, सौंदर्य और दाम्पत्य‑संतुलन के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
शनि प्रदोष
शनि, फ़रवरी 14, 2026
फाल्गुन, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और शनि
शनि दोष शमन, बाधाओं में राहत और कर्मिक ऋण से मुक्ति के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भानु प्रदोष
रवि, मार्च 1, 2026
फाल्गुन, शुक्ल पक्ष
देवता: Lord Shiva with Sun God
Bestows health, vitality, and removes obstacles in career
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सोम प्रदोष
सोम, मार्च 16, 2026
चैत्र, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और चंद्रदेव
सर्वकामना सिद्धि, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मंगलकारी।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सोम प्रदोष
सोम, मार्च 30, 2026
चैत्र, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और चंद्रदेव
सर्वकामना सिद्धि, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मंगलकारी।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सौम्य प्रदोष
बुध, अप्रैल 15, 2026
वैशाख, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और बुध
बुद्धि, अध्ययन और संचार‑कौशल में वृद्धि।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भौम प्रदोष
मंगल, अप्रैल 28, 2026
वैशाख, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और मंगल
बल, साहस और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल; बाधा निवारण।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सौम्य प्रदोष
बुध, अप्रैल 29, 2026
वैशाख, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और बुध
बुद्धि, अध्ययन और संचार‑कौशल में वृद्धि।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
गुरु प्रदोष
गुरु, मई 14, 2026
ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और गुरु
धन, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण का संयोग।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
गुरु प्रदोष
गुरु, मई 28, 2026
Adhika Jyeshtha, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और गुरु
धन, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण का संयोग।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
शनि प्रदोष
शनि, जून 27, 2026
ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और शनि
शनि दोष शमन, बाधाओं में राहत और कर्मिक ऋण से मुक्ति के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भानु प्रदोष
रवि, जुलाई 12, 2026
आषाढ़, कृष्ण पक्ष
देवता: Lord Shiva with Sun God
Bestows health, vitality, and removes obstacles in career
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भानु प्रदोष
रवि, जुलाई 26, 2026
आषाढ़, शुक्ल पक्ष
देवता: Lord Shiva with Sun God
Bestows health, vitality, and removes obstacles in career
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सोम प्रदोष
सोम, अगस्त 10, 2026
श्रावण, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और चंद्रदेव
सर्वकामना सिद्धि, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मंगलकारी।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भौम प्रदोष
मंगल, अगस्त 25, 2026
श्रावण, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और मंगल
बल, साहस और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल; बाधा निवारण।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भौम प्रदोष
मंगल, सितंबर 8, 2026
भाद्रपद, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और मंगल
बल, साहस और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल; बाधा निवारण।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
गुरु प्रदोष
गुरु, सितंबर 24, 2026
भाद्रपद, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और गुरु
धन, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण का संयोग।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
गुरु प्रदोष
गुरु, अक्टूबर 8, 2026
Ashwina, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और गुरु
धन, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण का संयोग।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भृगु प्रदोष
शुक्र, अक्टूबर 23, 2026
Ashwina, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और शुक्र
सौभाग्य, सौंदर्य और दाम्पत्य‑संतुलन के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भृगु प्रदोष
शुक्र, नवंबर 6, 2026
कार्तिक, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और शुक्र
सौभाग्य, सौंदर्य और दाम्पत्य‑संतुलन के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भानु प्रदोष
रवि, नवंबर 22, 2026
कार्तिक, शुक्ल पक्ष
देवता: Lord Shiva with Sun God
Bestows health, vitality, and removes obstacles in career
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भानु प्रदोष
रवि, दिसंबर 6, 2026
मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष
देवता: Lord Shiva with Sun God
Bestows health, vitality, and removes obstacles in career
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
प्रदोष व्रत के बारे में
भगवान शिव के प्रति संध्या काल में की जाने वाली पवित्र पूजा
प्रदोष व्रत हिंदू कैलेंडर का एक पवित्र दिन है जो हर महीने दो बार आता है - शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। यह भगवान शिव को समर्पित है।
शिव पुराण के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत करने से हजारों अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है और विशेष रूप से संध्या काल में भगवान शिव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है।
सात प्रकार के प्रदोष व्रत हैं: सोम प्रदोष (सबसे शुभ), भौम प्रदोष, सौम्य प्रदोष, गुरु प्रदोष, भृगु प्रदोष, शनि प्रदोष (महा प्रदोष)।
"Pradosh Vrat दिव्य कृपा का दिन है"
Pradosh Vrat को श्रद्धा से मनाने का वर्णन ग्रंथों में मिलता है—ऐसा पालन हजारों यज्ञ और तीर्थों के समान पुण्य देता है।
प्रदोष व्रत दिशानिर्देश
भक्ति और आध्यात्मिक अनुशासन के साथ प्रदोष व्रत का पालन करने के लिए पारंपरिक दिशानिर्देश।
- प्रदोष व्रत के दिन अनाज, दाल और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए
- फल, दूध, मिठाई और साबुदाना खाया जा सकता है
- संध्या काल में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए
- बिल्व पत्र, फूल और दीपक अर्पित करना चाहिए
- शिव लिंगम अभिषेक करें
- बिल्व पत्र अर्पित करें
- घी का दीपक जलाएं
- ओम नमः शिवाय का जाप करें
- प्रदोष व्रत से पहले हल्का भोजन करें
- भारी या मसालेदार भोजन से बचें
- पर्याप्त आराम करें
- कठोर शारीरिक गतिविधियों से बचें
महत्वपूर्ण अनुस्मारक
विशिष्ट पालन प्रथाओं के लिए हमेशा अपने आध्यात्मिक गुरु या पारिवारिक परंपराओं से परामर्श लें। समय स्थान और स्थानीय रीति‑रिवाजों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। अपने शरीर की सुनें और केवल रीति‑रिवाज के बजाय भक्ति के साथ अभ्यास करें।
प्रदोष व्रत प्रश्नोत्तर — समय, प्रकार और विधि
प्रदोष व्रत क्या है?
प्रदोष व्रत भगवान शिव का व्रत है, जो त्रयोदशी—हर पक्ष की तेरहवीं तिथि—पर रखा जाता है, इसलिए यह महीने में दो बार आता है। इसकी विशेषता इसका समय है। पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के आसपास का संध्या समय, जब शिव नंदी के सींगों के बीच नृत्य करते हैं। यह भोर का नहीं, सांझ का व्रत है।
पूजा का समय—प्रदोष काल कब होता है?
प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले शुरू होकर करीब एक घंटे बाद तक चलता है—कुल मिलाकर लगभग डेढ़ घंटा। चूँकि यह सूर्यास्त पर टिका है, सटीक समय आपके शहर और ऋतु के साथ बदलता है। ऊपर दिया गया समय आपके चुने हुए शहर के लिए गणना की गई है, किसी दिल्ली-आधारित अनुमान से नहीं।
एक वर्ष में कितने प्रदोष व्रत होते हैं?
सामान्य वर्ष में 24—हर चंद्र मास में दो, एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। जिस वर्ष अधिक मास पड़ता है, संख्या बढ़ जाती है। ऊपर दी गई सूची हर तिथि को उसके वार-प्रकार के साथ दर्शाती है, ताकि आप अपने व्रत पहले से चुन सकें।
सोम प्रदोष, शनि प्रदोष और अन्य प्रकार क्या हैं?
व्रत उस वार का स्वरूप ले लेता है जिस दिन वह पड़ता है। सोम प्रदोष (सोमवार) पारिवारिक मनोकामना और दांपत्य सुख के लिए रखा जाता है; शनि प्रदोष (शनिवार) शनि की पीड़ा से राहत की ओर उन्मुख है और इसे प्रायः महा प्रदोष कहते हैं। भौम (मंगलवार), गुरु (गुरुवार), शुक्र (शुक्रवार), बुध (बुधवार) और भानु (रविवार)—हर एक का अपना भाव है। ऊपर की सूची में हर अवसर उसके प्रकार के साथ अंकित है।
घर पर प्रदोष व्रत कैसे करें?
अधिकांश लोग दिनभर व्रत रखते हैं, संध्या पूजा से पहले स्नान करते हैं, और प्रदोष काल में शिव की आराधना करते हैं—जल या दूध से अभिषेक, बिल्वपत्र, दीप और “ॐ नमः शिवाय” का जप। प्रदोष व्रत कथा पढ़ी जाती है, और संध्या पूजा के बाद पारण किया जाता है। अपनी परंपरा का पालन करें; यह जानकारी समझ के लिए है, धार्मिक निर्देश के रूप में नहीं।
प्रदोष व्रत में क्या खा सकते हैं?
पालन अलग-अलग होता है। कुछ इसे निर्जल रखते हैं; बहुत से लोग दिनभर केवल फल, दूध और जल लेते हैं; कुछ बिना अन्न, प्याज-लहसुन के एक बार सात्त्विक भोजन करते हैं, जिसमें सेंधा नमक का प्रयोग होता है। वही रूप चुनें जो आपके स्वास्थ्य और परंपरा के अनुकूल हो।
क्या प्रदोष का समय शहर के अनुसार बदलता है?
हाँ, और यहाँ यह अधिकांश व्रतों से ज़्यादा मायने रखता है, क्योंकि प्रदोष काल सूर्यास्त से जुड़ा है। कोलकाता, दिल्ली और मुंबई के सूर्यास्त में लगभग एक घंटे तक का अंतर हो सकता है, जिससे पूरी पूजा-अवधि खिसक जाती है। ऊपर अपना शहर चुनें और प्रदोष काल की आपके स्थान के लिए फिर से गणना हो जाती है।