2026 एकादशी कैलेंडर
New Delhi के लिए गणना किया गया समय
षट्तिला एकादशी
बुध, जनवरी 14, 2026, 03:19 अपराह्न
माघ, कृष्ण पक्ष
षट्तिला एकादशी—संपन्नता और दान‑पुण्य का साधन; आर्थिक बाधाएं घटती हैं।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
जया एकादशी
गुरु, जनवरी 29, 2026, 04:37 अपराह्न
माघ, शुक्ल पक्ष
जया एकादशी—कठिनाइयों पर विजय और सत्कर्मों में सफलता।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
जया एकादशी
शुक्र, फ़रवरी 13, 2026, 12:23 अपराह्न
फाल्गुन, कृष्ण पक्ष
विजया एकादशी—विजय और सिद्धि के लिए शुभ; बाधाएँ हटती हैं।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
आमलकी एकादशी
शुक्र, फ़रवरी 27, 2026, 12:34 पूर्वाह्न
फाल्गुन, शुक्ल पक्ष
आमलकी/आमलकी एकादशी—आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद। (नोट: परंपरा अनुसार तिथियां भिन्न हैं)
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
पापमोचनी एकादशी
रवि, मार्च 15, 2026, 08:12 पूर्वाह्न
चैत्र, कृष्ण पक्ष
पापमोचनी एकादशी पाप क्षय और आंतरिक शुद्धि का दिन है—पुरानी भूलों को छोड़ने की शक्ति देती है।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
कामदा एकादशी
रवि, मार्च 29, 2026, 08:46 पूर्वाह्न
चैत्र, शुक्ल पक्ष
कामदा एकादशी शुभता और आध्यात्मिक वृद्धि देती है। नकारात्मक प्रभाव घटते हैं और शांति‑समृद्धि बढ़ती है।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
वरूथिनी एकादशी
सोम, अप्रैल 13, 2026, 01:18 पूर्वाह्न
वैशाख, कृष्ण पक्ष
वरूथिनी एकादशी सुरक्षा और बल देती है—भय और चुनौतियों पर विजय में सहायक। (नोट: परंपरा अनुसार तिथियां भिन्न हैं)
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
मोहिनी एकादशी
सोम, अप्रैल 27, 2026, 06:08 अपराह्न
वैशाख, शुक्ल पक्ष
मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ी है—कृपा और आंतरिक सौंदर्य का प्रतीक।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
अपरा एकादशी
बुध, मई 13, 2026, 02:53 अपराह्न
ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष
अपरा एकादशी पुराने संकटों से उबारकर शांति और आध्यात्मिक प्रगति में सहायक मानी जाती है।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
पद्मिनी एकादशी
मंगल, मई 26, 2026, 05:12 पूर्वाह्न
Adhika Jyeshtha, शुक्ल पक्ष
पद्मिनी (अधिक मास) एकादशी—असाधारण आध्यात्मिक फल देती है। (नोट: परंपरा अनुसार तिथियां भिन्न हैं)
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
रमा एकादशी
गुरु, जून 11, 2026, 12:58 पूर्वाह्न
Adhika Jyeshtha, कृष्ण पक्ष
परमा (अधिक मास) एकादशी—श्रेष्ठ आध्यात्मिक लाभ और स्वतंत्रता। (नोट: परंपरा अनुसार तिथियां भिन्न हैं)
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
निर्जला एकादशी
गुरु, जून 25, 2026, 06:13 अपराह्न
ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष
निर्जला एकादशी सबसे कठिन—बिना पानी के। इसके पुण्य सभी एकादशियों के समतुल्य माने जाते हैं।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
योगिनी एकादशी
शुक्र, जुलाई 10, 2026, 08:17 पूर्वाह्न
आषाढ़, कृष्ण पक्ष
योगिनी एकादशी स्वास्थ्य, समृद्धि और साधना‑फल के लिए शुभ मानी जाती है। (नोट: परंपरा अनुसार तिथियां भिन्न हैं)
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
देवशयनी एकादशी
शनि, जुलाई 25, 2026, 09:13 पूर्वाह्न
आषाढ़, शुक्ल पक्ष
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास आरंभ—आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ काल।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
कामिका एकादशी
रवि, अगस्त 9, 2026, 02:00 अपराह्न
श्रावण, कृष्ण पक्ष
कामिका एकादशी सद्भावनापूर्ण इच्छाओं की पूर्ति और बाधा निवारण में सहायक।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
पुत्रदा एकादशी
रवि, अगस्त 23, 2026, 02:01 पूर्वाह्न
श्रावण, शुक्ल पक्ष
पुत्रदा एकादशी परिवार के कल्याण और सौहार्द के लिए मंगलकारी—घर‑परिवार के बंधन मजबूत करने का दिन। (नोट: परंपरा अनुसार तिथियां भिन्न हैं)
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
अजा एकादशी
सोम, सितंबर 7, 2026, 07:30 अपराह्न
भाद्रपद, कृष्ण पक्ष
अजा एकादशी कठिनाइयों पर विजय और अंतःशांति की ओर बढ़ने में सहायक।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
परिवर्तिनी एकादशी
मंगल, सितंबर 22, 2026, 08:02 अपराह्न
भाद्रपद, शुक्ल पक्ष
परिवर्तिनी/पार्श्व एकादशी भगवान के दिव्य परिवर्तन का उत्सव—सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों लाभ।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
इंदिरा एकादशी
मंगल, अक्टूबर 6, 2026, 02:08 पूर्वाह्न
Ashwina, कृष्ण पक्ष
इंदिरा एकादशी पितरों की शांति और पारिवारिक सौहार्द के लिए विशेष। (नोट: परंपरा अनुसार तिथियां भिन्न हैं)
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
पापांकुशा एकादशी
गुरु, अक्टूबर 22, 2026, 02:13 अपराह्न
Ashwina, शुक्ल पक्ष
पापांकुशा एकादशी बाधाएँ दूर कर सिद्धि और सफलता दिलाने वाली मानी जाती है।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
रमा एकादशी
गुरु, नवंबर 5, 2026, 11:04 पूर्वाह्न
कार्तिक, कृष्ण पक्ष
रमा एकादशी कृपा और समृद्धि का आशीर्वाद देती है।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
प्रबोधिनी एकादशी
शुक्र, नवंबर 20, 2026, 07:16 पूर्वाह्न
कार्तिक, शुक्ल पक्ष
प्रबोधिनी/देवोत्थान एकादशी—भगवान विष्णु के जागरण का दिन; नए आरंभ के लिए शुभ। (नोट: परंपरा अनुसार तिथियां भिन्न हैं)
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
उत्पन्ना एकादशी
शुक्र, दिसंबर 4, 2026, 11:04 अपराह्न
मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष
उत्पन्ना एकादशी—एकादशी देवी का आरंभ; दीर्घकालीन दोषों से मुक्ति का अवसर।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
मोक्षदा एकादशी
रवि, दिसंबर 20, 2026, 10:10 अपराह्न
मार्गशीर्ष, शुक्ल पक्ष
मोक्षदा एकादशी—मोक्ष और परम शांति की साधना का श्रेष्ठ दिन।
एकादशी तिथि समय
अनुष्ठान तिथियां
About Ekadashi
Sacred days of spiritual purification and devotion to Lord Vishnu
Ekadashi literally means "eleven" in Sanskrit, referring to the 11th day of each lunar fortnight. It is considered one of the most auspicious days for spiritual practices.
According to the Padma Purana, Ekadashi Devi emerged from Lord Vishnu to defeat the demon Mura, earning the boon of granting liberation to devotees.
Regular observance of Ekadashi brings numerous spiritual, mental, and physical benefits to devoted practitioners.
Each Ekadashi has unique significance and is associated with specific benefits and spiritual practices.
"Ekadashi दिव्य कृपा का दिन है"
Ekadashi को श्रद्धा से मनाने का वर्णन ग्रंथों में मिलता है—ऐसा पालन हजारों यज्ञ और तीर्थों के समान पुण्य देता है।
Fasting Observance Guidelines
Traditional guidelines for observing Ekadashi fasting with devotion and spiritual discipline.
- Begin fast from sunrise on Ekadashi day
- Complete abstinence from grains and beans
- Only fruits, milk, and water allowed (if not doing Nirjala)
- Break fast on Dwadashi after sunrise
- Maintain celibacy during the fast
- Chant Vishnu mantras and names
- Read Bhagavad Gita or Vishnu Purana
- Perform meditation and prayer
- Visit Vishnu temples if possible
- Engage in charitable activities
- Eat light meal on Dashami (day before)
- Avoid heavy or spicy foods
- Stay hydrated (except during Nirjala)
- Get adequate rest
- Avoid strenuous physical activities
महत्वपूर्ण अनुस्मारक
विशिष्ट पालन प्रथाओं के लिए हमेशा अपने आध्यात्मिक गुरु या पारिवारिक परंपराओं से परामर्श लें। समय स्थान और स्थानीय रीति‑रिवाजों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। अपने शरीर की सुनें और केवल रीति‑रिवाज के बजाय भक्ति के साथ अभ्यास करें।
एकादशी प्रश्नोत्तर — व्रत, पारण और प्रकार
एकादशी क्या है?
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, जिसे भगवान विष्णु के व्रत के रूप में रखा जाता है। यह महीने में दो बार आती है—एक शुक्ल पक्ष में, एक कृष्ण पक्ष में—इसलिए वर्ष में लगभग चौबीस एकादशी होती हैं। पद्म पुराण इसे आध्यात्मिक शुद्धि के सबसे प्रभावी दिनों में गिनता है।
एक वर्ष में कितनी एकादशी होती हैं?
सामान्यतः चौबीस—हर चंद्र मास में दो। जिस वर्ष अधिक मास पड़ता है, इनकी संख्या पच्चीस या छब्बीस हो सकती है, जिनमें पद्मिनी और परमा एकादशी जुड़ जाती हैं। ऊपर की सूची वर्ष की हर एकादशी नाम सहित दिखाती है, इसलिए सही गिनती वही है जो आप वहाँ देखते हैं।
एकादशी व्रत का पारण कब करें?
व्रत अगली सुबह, द्वादशी को, पारण नामक निश्चित समय में खोला जाता है—सूर्योदय के बाद, द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले, और हरि वासर (द्वादशी के पहले चरण) में कभी नहीं। बहुत जल्दी या बहुत देर से पारण करना व्रत को निष्फल कर देता है, ऐसा माना जाता है। इसीलिए अगले दिन का सूर्योदय एकादशी की तिथि जितना ही महत्वपूर्ण है।
कुछ एकादशी तिथियाँ अलग क्यों होती हैं (स्मार्त बनाम वैष्णव)?
जब एकादशी तिथि दो सूर्योदयों तक फैलती है या दशमी से मिल जाती है, तब स्मार्त और वैष्णव (इस्कॉन) परंपराएँ अलग-अलग दिन तय कर सकती हैं—स्मार्त पहले दिन व्रत रखते हैं, वैष्णव दूसरे (गौण) दिन, ताकि व्रत दशमी से मुक्त रहे। अपनी-अपनी परंपरा में दोनों सही हैं। ऊपर की सूची जहाँ अंतर हो, वहाँ दोनों तिथियाँ दिखाती है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते, और क्या खा सकते हैं?
एकादशी पर अन्न—विशेषकर चावल—त्याग दिया जाता है; परंपरा इसे एक भारीपन से जोड़ती है जो दिन के उद्देश्य के विरुद्ध है। बहुत से लोग फल, दूध और कंद-मूल तक सीमित रहते हैं, या पूर्णतः निराहार व्रत रखते हैं (निर्जला एकादशी पर निर्जल)। साधारण नमक के स्थान पर सेंधा नमक लिया जाता है। वही रूप अपनाएँ जो आपका परिवार और स्वास्थ्य अनुमति दे।
सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी है?
निर्जला एकादशी (जून) के बारे में माना जाता है कि एक ही निर्जल व्रत में यह सभी एकादशियों का पुण्य समेट लेती है, इसीलिए इसका पालन सबसे व्यापक रूप से होता है। देवउठनी/प्रबोधिनी (नवंबर), जब विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, और दक्षिण में वैकुंठ एकादशी (दिसंबर–जनवरी) भी प्रमुख हैं। हर एक का अपना महत्व और कथा है।
क्या एकादशी का समय शहर के अनुसार बदलता है?
हाँ। तिथि की शुरुआत और समाप्ति आपके चुने हुए शहर के स्थानीय समय में गणना की जाती है, इसलिए वे स्थान के साथ बदलती हैं। इससे भी महत्वपूर्ण, पारण का समय अगली सुबह आपके स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करता है—इसीलिए पारण का सही समय पाने के लिए शहर चुनना ज़रूरी है। कैलेंडर को स्थानीय बनाने के लिए ऊपर अपना शहर चुनें।