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दीपोत्सव 2026

दीपावली 2026

8 की साँझ अमावस्या को प्रदोष तक थामे रखती है, इसलिए लक्ष्मी का आवाहन स्थिर वृषभ लग्न में होता है — ताकि वे ठहरें, निकल न जाएँ। साथ में आपके शहर का मुहूर्त और आसपास के पाँच दिन।

A doorway lined with lit clay diyas and a rangoli at dusk on Diwali, lamps welcoming Lakshmi into the home
PanchangBodh Editorial
8 min read
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दीपावली की लक्ष्मी पूजा घड़ी से नहीं, साँझ को दो बातों के एक साथ पड़ने से तय होती है। रविवार, 8 नवंबर 2026 की संध्या को कार्तिक अमावस्या प्रदोष काल — सूर्यास्त के साथ खुलने वाली गोधूलि — भर उपस्थित रहती है, और पूजन तभी, स्थिर अर्थात् वृषभ लग्न में किया जाता है। स्थिर लग्न ही सारा मर्म है: स्थिर लग्न में घर बुलाई गई लक्ष्मी से यह प्रार्थना है कि वे घूमते आकाश के साथ आगे न बढ़ें, बल्कि टिकें और ठहरें। अमावस्या 8 को प्रातः 11:30 पर आरंभ होकर अगले दिन दोपहर 12:33 तक रहती है, अतः दीपों वाली यह संध्या 9 की नहीं, 8 की ही है।

इसी संध्या के चारों ओर दीपोत्सव का पाँच-दिनी क्रम चलता है। धनतेरस इसे 6 नवंबर को खोलता है; नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दीवाली इस वर्ष 8 को दीपावली के साथ ही पड़ती है; गोवर्धन पूजा 10 को आती है; और भाई दूज 11 नवंबर को इसे समेटता है। गोवर्धन से पहले का यह अंतराल इस वर्ष की विशेषता है: चूँकि अमावस्या दोपहर पार कर 9 तक खिंच जाती है, गोवर्धन को जिस शुक्ल प्रतिपदा की प्रातः चाहिए वह 10 को ही मिलती है — दीपावली के अगले दिन नहीं, दो दिन बाद।

दीपावली 2026 — एक दृष्टि में

🪔

पर्व दिवस

रविवार, 8 नवंबर 2026

🌑

तिथि

कार्तिक अमावस्या

🙏

लक्ष्मी पूजा (दिल्ली)

शाम 5:54 – 7:50

अमावस्या

8 नवंबर प्रातः 11:30 → 9 नवंबर दोपहर 12:33

🗓️

पाँच दिन

धनतेरस 6 → भाई दूज 11 नवंबर

🐄

गोवर्धन पूजा

मंगलवार, 10 नवंबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, शहर के अनुसार

प्रदोष और स्थिर वृषभ लग्न — आपके स्थान के लिए

नई दिल्ली

शाम 5:54 – 7:50

प्रदोष व वृषभ (स्थिर) लग्न · प्रदोष काल 5:31–7:55

मुंबई

शाम 6:01 – 8:25

प्रदोष काल · वृषभ लग्न स्थानीय रूप से देखें

प्रदोष काल सूर्यास्त से आरंभ होने वाली लगभग दो घंटे की गोधूलि है, अतः हर सौर अवधि की भाँति यह पश्चिम की ओर कुछ देर से खुलता है — नई दिल्ली में 5:31, मुंबई में 6:01। इसके भीतर वृषभ लग्न घरेलू लक्ष्मी पूजा की सर्वाधिक पसंदीदा अवधि है, क्योंकि यह स्थिर राशि देवी को घर में थामे रखती है; दिल्ली में इससे मुहूर्त लगभग शाम 5:54 से 7:50 तक सिमट आता है। बही-खाता और चोपड़ा पूजन करने वाले व्यापारी प्रायः आधी रात के आसपास वाले परवर्ती निशीथ मुहूर्त को चुनते हैं, जब अमावस्या सबसे गहरी होती है। पहला दीप जलाने से पहले अपने शहर का सूर्यास्त और लग्न पंचांग में देख लें।

दीपोत्सव के पाँच दिन

धनतेरस से भाई दूज तक, तिथि के साथ

दीपोत्सव पाँच दिन चलता है, हर दिन की अपनी तिथि और अपना विधान। धनतेरस, शुक्रवार 6 नवंबर, इसे खोलता है — धातु, स्वर्ण या नया बर्तन ख़रीदने, धन्वंतरि पूजन और पहले यम-दीप का दिन। नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दीवाली इस वर्ष रविवार 8 नवंबर को, दीपावली के ही दिन पड़ती है: चतुर्दशी का प्रातःकालीन अभ्यंग-स्नान और अमावस्या की सायंकालीन लक्ष्मी पूजा एक ही तिथि साझा करते हैं। दीपावली स्वयं, मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजन, उसी 8 की संध्या को है। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मंगलवार 10 नवंबर को — कृष्ण द्वारा पर्वत उठाने का स्मरण। भाई दूज बुधवार 11 नवंबर को क्रम समेटता है — बहन का तिलक और भाई की दीर्घायु की प्रार्थना।

दीपों की पंक्ति और स्थिर लग्न का अर्थ

लक्ष्मी का लौटना, और समय इतना ठीक क्यों

दीपावली — दीपावलि अर्थात् 'दीपों की पंक्ति' — लक्ष्मी के लौटने और उनके स्वागत में सजाई गई राह का पर्व है। देहरी और मुंडेर पर सजे दीप केवल उत्सव नहीं; वे एक प्रकाशित मार्ग हैं, बुहारा और उजला घर, ताकि श्री — सौभाग्य की देवी — भीतर आएँ और ठहरें। समय इतना ठीक-ठीक इसीलिए है। लक्ष्मी का आवाहन प्रदोष में होता है, दिन और रात के मिलन की बेला में जब अमावस्या सबसे गहरी रहती है, और स्थिर वृषभ लग्न में, ताकि जो बुलाया जाए वह टिके, निकल न जाए। रात की एक पुरानी परत राम का अयोध्या-आगमन है, जब नगरवासियों ने सारा नगर दीपों से भर कर उनका मार्ग आलोकित किया — वही भाव, कि प्रकाश प्रिय के लिए राह बनाता है। बुहारा घर, स्थिर लौ और स्थिर लग्न — तीनों मिलकर एक ही निवेदन करते हैं: देवी ठहरें।

लाइव पंचांग

अपने शहर का आज का पंचांग और मुहूर्त देखें

ऊपर दिए प्रदोष और वृषभ-लग्न मुहूर्त दिल्ली और मुंबई के लिए हैं। 8 नवंबर — या किसी भी दिन — अपने शहर का सूर्यास्त, अमावस्या और चौघड़िया देखने के लिए लाइव पंचांग खोलें।

दीपावली 2026 — आपके प्रश्न

तिथि, मुहूर्त, पाँच दिन और गोवर्धन

दीपावली 2026 में कब है?+
दीपावली — लक्ष्मी पूजा — रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। सायंकालीन पूजन 8 को ही निश्चित है, क्योंकि उस संध्या प्रदोष काल भर कार्तिक अमावस्या उपस्थित रहती है। तिथि 8 को प्रातः 11:30 पर आरंभ होकर 9 को दोपहर 12:33 पर समाप्त होती है, अतः दीप और लक्ष्मी पूजा 8 की ही संध्या को होते हैं।
दीपावली 2026 का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त क्या है?+
पूजन प्रदोष काल में — सूर्यास्त पर खुलने वाली गोधूलि में — किया जाता है, और उसके भीतर स्थिर वृषभ लग्न को वरीयता दी जाती है। यह आपके अपने सूर्यास्त से निकलता है, इसलिए कोई एक राष्ट्रीय समय नहीं: नई दिल्ली में वृषभ-लग्न मुहूर्त लगभग शाम 5:54 से 7:50 (प्रदोष काल 5:31 से 7:55) है, और मुंबई में प्रदोष शाम 6:01 से 8:25 तक चलता है। अपने शहर का सूर्यास्त पंचांग में देख लें।
लक्ष्मी पूजा वृषभ लग्न में क्यों की जाती है?+
वृषभ एक स्थिर राशि है। स्थिर लग्न में घर बुलाई गई लक्ष्मी से यह प्रार्थना है कि वे घूमते आकाश के साथ आगे न बढ़ें, बल्कि टिकें और ठहरें — ताकि सौभाग्य की देवी वर्ष भर घर में थमी रहें। प्रदोष के साथ, जब अमावस्या सबसे गहरी रहती है, यह उन्हें बुलाने का सर्वाधिक शुभ क्षण बनता है।
निशीथ मुहूर्त कब है और इसे कौन चुनता है?+
निशीथ मुहूर्त आधी रात के आसपास पड़ता है, जब अमावस्या सबसे गहरी होती है। बही-खाता और चोपड़ा पूजन करने वाले व्यापारी और प्रतिष्ठान प्रायः सायंकालीन प्रदोष के स्थान पर इसी परवर्ती अवधि को चुनते हैं। घरेलू लक्ष्मी पूजा के लिए संध्या का प्रदोष और वृषभ-लग्न मुहूर्त ही सामान्य विकल्प है।
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को क्यों, दीपावली के अगले दिन क्यों नहीं?+
सामान्यतः गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले प्रातः होती है। 2026 में अमावस्या 9 को दोपहर 12:33 तक रहती है, इसलिए गोवर्धन को जिस शुक्ल प्रतिपदा की प्रातः चाहिए वह 9 को नहीं मिलती — वह 10 की सुबह ही रहती है। इसी से गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मंगलवार, 10 नवंबर को खिसक जाते हैं, दीपावली के दो दिन बाद।
दीपावली 2026 के पाँच दिन कौन-से हैं?+
धनतेरस शुक्रवार 6 नवंबर; नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दीवाली रविवार 8 नवंबर — इस वर्ष दीपावली के ही दिन; उसी 8 की संध्या को दीपावली और लक्ष्मी पूजा; गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मंगलवार 10 नवंबर; और भाई दूज बुधवार 11 नवंबर। छोटी दीवाली और दीपावली एक ही तिथि साझा करती हैं क्योंकि चतुर्दशी 8 को ही अमावस्या को स्थान दे देती है।
स्रोत और अस्वीकरण: तिथियाँ और समय नामित शहरों के लिए, IST में, लाहिरी अयनांश से गणना किए गए हैं और प्रकाशित दीपावली पंचांगों से मिलान करके देखे गए हैं। प्रदोष और लग्न की खिड़कियाँ आपके शहर के सूर्यास्त से बदलती हैं, इसलिए पूजन आरंभ करने से पहले अपना स्थानीय मुहूर्त पंचांग में देख लें। दीप, तेल की बत्तियाँ और पटाखे बच्चों के आसपास सावधानी माँगते हैं — उत्सव सुरक्षित रखें।