दीपावली की लक्ष्मी पूजा घड़ी से नहीं, साँझ को दो बातों के एक साथ पड़ने से तय होती है। रविवार, 8 नवंबर 2026 की संध्या को कार्तिक अमावस्या प्रदोष काल — सूर्यास्त के साथ खुलने वाली गोधूलि — भर उपस्थित रहती है, और पूजन तभी, स्थिर अर्थात् वृषभ लग्न में किया जाता है। स्थिर लग्न ही सारा मर्म है: स्थिर लग्न में घर बुलाई गई लक्ष्मी से यह प्रार्थना है कि वे घूमते आकाश के साथ आगे न बढ़ें, बल्कि टिकें और ठहरें। अमावस्या 8 को प्रातः 11:30 पर आरंभ होकर अगले दिन दोपहर 12:33 तक रहती है, अतः दीपों वाली यह संध्या 9 की नहीं, 8 की ही है।
इसी संध्या के चारों ओर दीपोत्सव का पाँच-दिनी क्रम चलता है। धनतेरस इसे 6 नवंबर को खोलता है; नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दीवाली इस वर्ष 8 को दीपावली के साथ ही पड़ती है; गोवर्धन पूजा 10 को आती है; और भाई दूज 11 नवंबर को इसे समेटता है। गोवर्धन से पहले का यह अंतराल इस वर्ष की विशेषता है: चूँकि अमावस्या दोपहर पार कर 9 तक खिंच जाती है, गोवर्धन को जिस शुक्ल प्रतिपदा की प्रातः चाहिए वह 10 को ही मिलती है — दीपावली के अगले दिन नहीं, दो दिन बाद।
दीपावली 2026 — एक दृष्टि में
पर्व दिवस
रविवार, 8 नवंबर 2026
तिथि
कार्तिक अमावस्या
लक्ष्मी पूजा (दिल्ली)
शाम 5:54 – 7:50
अमावस्या
8 नवंबर प्रातः 11:30 → 9 नवंबर दोपहर 12:33
पाँच दिन
धनतेरस 6 → भाई दूज 11 नवंबर
गोवर्धन पूजा
मंगलवार, 10 नवंबर
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, शहर के अनुसार
प्रदोष और स्थिर वृषभ लग्न — आपके स्थान के लिए
नई दिल्ली
शाम 5:54 – 7:50
प्रदोष व वृषभ (स्थिर) लग्न · प्रदोष काल 5:31–7:55
मुंबई
शाम 6:01 – 8:25
प्रदोष काल · वृषभ लग्न स्थानीय रूप से देखें
प्रदोष काल सूर्यास्त से आरंभ होने वाली लगभग दो घंटे की गोधूलि है, अतः हर सौर अवधि की भाँति यह पश्चिम की ओर कुछ देर से खुलता है — नई दिल्ली में 5:31, मुंबई में 6:01। इसके भीतर वृषभ लग्न घरेलू लक्ष्मी पूजा की सर्वाधिक पसंदीदा अवधि है, क्योंकि यह स्थिर राशि देवी को घर में थामे रखती है; दिल्ली में इससे मुहूर्त लगभग शाम 5:54 से 7:50 तक सिमट आता है। बही-खाता और चोपड़ा पूजन करने वाले व्यापारी प्रायः आधी रात के आसपास वाले परवर्ती निशीथ मुहूर्त को चुनते हैं, जब अमावस्या सबसे गहरी होती है। पहला दीप जलाने से पहले अपने शहर का सूर्यास्त और लग्न पंचांग में देख लें।
दीपोत्सव के पाँच दिन
धनतेरस से भाई दूज तक, तिथि के साथ
दीपोत्सव पाँच दिन चलता है, हर दिन की अपनी तिथि और अपना विधान। धनतेरस, शुक्रवार 6 नवंबर, इसे खोलता है — धातु, स्वर्ण या नया बर्तन ख़रीदने, धन्वंतरि पूजन और पहले यम-दीप का दिन। नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दीवाली इस वर्ष रविवार 8 नवंबर को, दीपावली के ही दिन पड़ती है: चतुर्दशी का प्रातःकालीन अभ्यंग-स्नान और अमावस्या की सायंकालीन लक्ष्मी पूजा एक ही तिथि साझा करते हैं। दीपावली स्वयं, मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजन, उसी 8 की संध्या को है। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मंगलवार 10 नवंबर को — कृष्ण द्वारा पर्वत उठाने का स्मरण। भाई दूज बुधवार 11 नवंबर को क्रम समेटता है — बहन का तिलक और भाई की दीर्घायु की प्रार्थना।
दीपों की पंक्ति और स्थिर लग्न का अर्थ
लक्ष्मी का लौटना, और समय इतना ठीक क्यों
दीपावली — दीपावलि अर्थात् 'दीपों की पंक्ति' — लक्ष्मी के लौटने और उनके स्वागत में सजाई गई राह का पर्व है। देहरी और मुंडेर पर सजे दीप केवल उत्सव नहीं; वे एक प्रकाशित मार्ग हैं, बुहारा और उजला घर, ताकि श्री — सौभाग्य की देवी — भीतर आएँ और ठहरें। समय इतना ठीक-ठीक इसीलिए है। लक्ष्मी का आवाहन प्रदोष में होता है, दिन और रात के मिलन की बेला में जब अमावस्या सबसे गहरी रहती है, और स्थिर वृषभ लग्न में, ताकि जो बुलाया जाए वह टिके, निकल न जाए। रात की एक पुरानी परत राम का अयोध्या-आगमन है, जब नगरवासियों ने सारा नगर दीपों से भर कर उनका मार्ग आलोकित किया — वही भाव, कि प्रकाश प्रिय के लिए राह बनाता है। बुहारा घर, स्थिर लौ और स्थिर लग्न — तीनों मिलकर एक ही निवेदन करते हैं: देवी ठहरें।
अपने शहर का आज का पंचांग और मुहूर्त देखें
ऊपर दिए प्रदोष और वृषभ-लग्न मुहूर्त दिल्ली और मुंबई के लिए हैं। 8 नवंबर — या किसी भी दिन — अपने शहर का सूर्यास्त, अमावस्या और चौघड़िया देखने के लिए लाइव पंचांग खोलें।
दीपावली 2026 — आपके प्रश्न
तिथि, मुहूर्त, पाँच दिन और गोवर्धन
