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भाव स्वामी स्थिति — भाव स्वामी गणक

प्रत्येक भाव का स्वामी कहां बैठा है? 6ठे में दशमेश और 11वें में दशमेश — करियर की बिल्कुल अलग कहानी। अपनी पूर्ण 12×12 मैट्रिक्स देखें।

वैदिक ज्योतिष में भाव स्वामी की स्थिति सबसे मौलिक सिद्धांत है। प्रत्येक भाव का स्वामी कहां बैठा है — यह उस भाव के फल को सीधे निर्धारित करता है। दशमेश लग्न में = स्वनिर्मित करियर। दशमेश 12वें में = विदेश करियर। एक ही भाव, अलग स्वामी स्थिति — बिल्कुल अलग जीवन अनुभव।

12 भाव स्वामी स्थिति

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12 भावों का अर्थ — संदर्भ तालिका

1
तनु

स्वयं, व्यक्तित्व, शरीर

2
धन

धन, परिवार, वाणी

3
सहज

साहस, भाई-बहन, संवाद

4
सुख

माता, संपत्ति, सुख

5
पुत्र

संतान, बुद्धि, पूर्व पुण्य

6
रिपु

शत्रु, रोग, सेवा

7
जाया

विवाह, साझेदारी, व्यापार

8
आयु

आयु, परिवर्तन, गुप्त

9
भाग्य

भाग्य, धर्म, पिता

10
कर्म

कर्म, व्यवसाय, यश

11
लाभ

लाभ, आय, इच्छा

12
व्यय

हानि, मोक्ष, विदेश

संपूर्ण भाव विश्लेषण

भाव विश्लेषण मुख्य पृष्ठ

भाव स्वामी — सामान्य प्रश्न

Q.वैदिक ज्योतिष में भाव स्वामी क्या है?

भाव स्वामी वह ग्रह है जो किसी भाव में स्थित राशि का शासक है। उदाहरण: यदि आपके 5वें भाव में कर्क राशि है, तो चंद्र आपके 5वें भाव का स्वामी है। इस स्वामी की स्थिति तय करती है कि भाव के विषय आपके जीवन में कैसे प्रकट होंगे।

Q.भाव स्वामी के लिए सबसे अच्छी स्थिति कौन सी है?

स्वामी अपने ही भाव में सबसे बलवान होता है (जैसे पंचमेश पंचम में)। केंद्रों (1, 4, 7, 10) में शक्ति मिलती है, त्रिकोणों (1, 5, 9) में भाग्य। त्रिक भावों (6, 8, 12) में चुनौतीपूर्ण पर सदैव नकारात्मक नहीं।

Q.परिवर्तन योग क्या है?

जब दो भाव स्वामी अपने स्थान बदल लेते हैं — जैसे पंचमेश नवम में और नवमेश पंचम में — तो परिवर्तन योग बनता है। महा परिवर्तन (शुभ भावों के बीच) अत्यंत शुभ। दैन्य परिवर्तन (त्रिक भाव सहित) चुनौतीपूर्ण।

Q.क्या वक्री स्वामी का प्रभाव अलग होता है?

वक्री स्वामी की स्वामित्व नहीं बदलता — केवल व्यवहार बदलता है। वक्री स्वामी अक्सर भाव के पिछले कर्मों पर पुनर्विचार करता है। स्थिति प्रभाव वही रहता है, पर परिणाम अपरंपरागत ढंग से या विलंब से आ सकते हैं।

Q.एक ग्रह दो भावों का स्वामी हो तो?

अधिकांश ग्रह दो राशियों और इसलिए दो भावों के स्वामी होते हैं। शनि मकर और कुंभ दोनों का स्वामी है। जहां शनि बैठता है वहां दोनों भावों के विषय प्रकट होते हैं। बलवान भाव को प्राथमिकता मिलती है, पर दोनों विषय मिश्रित होते हैं।

Q.दशमेश की स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्यों है?

दशमेश करियर की दिशा निर्धारित करता है। लग्न में = स्वनिर्मित करियर। 4थे में = अचल संपत्ति या स्वदेश। 7वें में = साझेदारी व्यापार। 12वें में = विदेश या संस्थागत कार्य। यह सबसे अधिक पूछी जाने वाली स्थितियों में से एक है।