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लत्ता दोष कैलकुलेटर

हर ग्रह गिनकर एक नक्षत्र पर "लात" मारता है — देखें कि आज कौन-से नक्षत्र लत्ता में हैं, और कहीं आपका नक्षत्र तो उनमें नहीं।

लत्ता दोष का अर्थ है ग्रह की "लात": शास्त्रीय मुहूर्त-ग्रंथों में हर ग्रह अपनी स्थिति से गिनकर एक निश्चित नक्षत्र पर आघात करता है — सूर्य अपने से आगे बारहवें तारे पर, चंद्रमा पीछे बाईसवें पर, और इसी क्रम में अन्य ग्रह। लत्ता में पड़ा नक्षत्र शुभारम्भ के लिए, और सबसे बढ़कर विवाह के लिए, टाला जाता है: विवाह मुहूर्त की शास्त्रीय कसौटियों में लत्ता दोष की जाँच प्रमुख है। यह पृष्ठ आज के लत्ता-आघात सजीव गणना से दिखाता है, और आपके जन्म नक्षत्र को भी उनसे मिलाकर देख सकता है।

आज के लत्ता-आघात — 16 अगस्त 2026

ग्रहआज का नक्षत्रलातलत्ता में नक्षत्रआघात का शास्त्रीय फल
सूर्यPurolattaAshlesha12 आगेPurva Ashadhaकार्य-व्यवसाय में रुकावट
मंगलPurolattaArdra3 आगेPushyaगम्भीर अनिष्ट — मुहूर्त में वर्जित
गुरुPurolattaPushya6 आगेHastaपारिवारिक मामलों में अनिष्ट — मुहूर्त में वर्जित
शनिPurolattaRevati8 आगेPunarvasuबाधा और विलम्ब
चंद्रPrishthalattaHasta22 पीछेMulaबड़ी हानि की आशंका
बुधPrishthalattaAshlesha7 पीछेKrittikaपद-प्रतिष्ठा को धक्का
शुक्रPrishthalattaHasta5 पीछेAshleshaकलह और खटपट
राहुPrishthalattaDhanishta9 पीछेSwatiकष्ट और क्लेश

क्या आपका नक्षत्र आज लत्ता में है?

अपना जन्म नक्षत्र चुनें और कोई भी तिथि जाँचें — आज की, या विवाह-मुहूर्त जैसी आने वाली कोई घड़ी।

जन्म नक्षत्र
तिथि
फलदीपिका XXVI.42–47 · लाहिरी अयनांश · निःशुल्क

लत्ता दोष क्या है?

चित्र एकदम भौतिक है: एक नक्षत्र में खड़ा ग्रह दूसरे पर लात मारता है। चार ग्रह आगे की ओर मारते हैं, राशि-क्रम में — सूर्य अपने से बारहवें तारे पर, मंगल तीसरे पर, गुरु छठे पर, शनि आठवें पर। ये पुरोलत्ता हैं — आगे की लातें। चार पीछे की ओर — चंद्रमा अपने से बाईसवें पर, बुध सातवें पर, शुक्र पाँचवें पर, राहु नौवें पर: ये पृष्ठलत्ता। आघात खाया नक्षत्र तब तक "लत्ता में" रहता है, जब तक मारने वाला ग्रह अपने नक्षत्र में टिका है।

गिनती समावेशी है — ग्रह का अपना नक्षत्र पहला — और सामान्य 27 तारों पर चलती है, अभिजित के बिना; रेवती के बाद गिनती फिर अश्विनी से जुड़ती है। टीका का अपना उदाहरण: मूल में बैठा सूर्य कृत्तिका पर लात मारता है — मूल से गिनकर बारहवाँ तारा।

विवाह मुहूर्त में लत्ता दोष

लत्ता का शास्त्रीय सन्दर्भ मुहूर्त है, और सबसे बढ़कर विवाह: ग्रंथों का निर्देश है कि विवाह-लग्न का नक्षत्र लत्ता में न हो, और परम्परा क्रूर ग्रह — शनि, मंगल, सूर्य या राहु — की लात को सौम्य ग्रह की लात से भारी मानती है। श्लोक संयोग का स्तर भी बताते हैं: एक ही तारे पर दो लत्ताएँ मिल जाएँ तो दोष दुगुना पढ़ा जाता है।

दैनिक उपयोग में पाठ हल्का रहता है: आज आपके जन्म नक्षत्र पर लात पड़ी हो, तो इसे नए कार्यों पर सावधानी का झंडा मानें — वही स्वर जो वेध का है; सर्वतोभद्र चक्र पर दोनों प्रायः साथ ही देखे जाते हैं।

शास्त्रीय स्रोत

लत्ता दोष फलदीपिका के अध्याय XXVI (श्लोक 42–47) से आता है, जहाँ मंत्रेश्वर हर ग्रह की लात और आघात खाए नक्षत्र के फल गिनाते हैं — सूर्य की लत्ता से कार्यों में धक्का, चंद्रमा की लत्ता से हानि, शुक्र की लत्ता से कलह, और इसी क्रम में आगे। इसी अध्याय में सर्वतोभद्र सामग्री भी है — इसीलिए दोनों प्रणालियाँ परम्परा में साथ पढ़ी जाती हैं। इन श्लोकों में केतु को कोई लत्ता नहीं मिलती; उसे लत्ता देने वाला पाठ सर्वतोभद्र-परम्परा की बाद की रीति है, जिसे यह कैलकुलेटर केवल नामांकित विकल्प के रूप में देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लत्ता दोष क्या होता है?

लत्ता — शाब्दिक अर्थ में लात — मुहूर्त का शास्त्रीय दोष है: हर ग्रह अपनी स्थिति से गिनकर एक नक्षत्र पर आघात करता है। सूर्य आगे बारहवें तारे पर, मंगल तीसरे, गुरु छठे, शनि आठवें पर; चंद्रमा पीछे बाईसवें पर, बुध सातवें, शुक्र पाँचवें और राहु नौवें पर। लत्ता में पड़ा नक्षत्र शुभारम्भ के लिए टाला जाता है।

लत्ता दोष किस ग्रंथ में है?

मंत्रेश्वर की फलदीपिका, अध्याय XXVI, श्लोक 42–47 — वही अध्याय जिसमें सर्वतोभद्र चक्र की सामग्री है। श्लोक हर ग्रह की लात और आघात खाए नक्षत्र का फल गिनाते हैं, और यह भी कि एक तारे पर मिली दो लत्ताएँ दोष को दुगुना करती हैं।

लत्ता नक्षत्र की गिनती कैसे होती है?

समावेशी ढंग से, सामान्य 27 नक्षत्रों पर — ग्रह का अपना तारा पहला, अभिजित शामिल नहीं, रेवती के बाद गिनती फिर अश्विनी से। टीका का उदाहरण: मूल में बैठा सूर्य कृत्तिका पर आघात करता है — मूल से बारहवाँ तारा।

विवाह के लिए लत्ता दोष क्यों महत्त्व रखता है?

शास्त्र लत्ता को मुख्यतः विवाह मुहूर्त पर लागू करते हैं: विवाह-घड़ी का नक्षत्र लत्ता में न हो, और शनि, मंगल, सूर्य या राहु की लात सौम्य ग्रह की लात से भारी मानी जाती है। वेध और पंचक की तरह यह भी उन नक्षत्र-कसौटियों में है, जिनसे मुहूर्त को पार होना चाहिए।

क्या केतु की भी लत्ता होती है?

शास्त्रीय श्लोकों में नहीं — फलदीपिका आठ ग्रहों को लात देती है और केतु को छोड़ती है। सर्वतोभद्र-परम्परा का एक बाद का पाठ केतु को राहु की तरह पीछे नौवाँ देता है; यह कैलकुलेटर उसे स्वतः बंद रखता है और नामांकित विकल्प के रूप में देता है।

आज मेरा जन्म नक्षत्र लत्ता में है — क्या करूँ?

इसे सावधानी का झंडा मानें, उसी स्वर में जो वेध का है: नए आरम्भ, हस्ताक्षर और मुहूर्त-स्तर के कदम टल सकें तो साफ़ घड़ी की प्रतीक्षा करें। मारने वाला ग्रह अपना नक्षत्र छोड़ते ही आघात बीत जाता है — चंद्रमा के लिए लगभग एक दिन, मंद ग्रहों के लिए अधिक।

लत्ता का आघात कितने समय रहता है?

जब तक मारने वाला ग्रह अपने नक्षत्र में है: चंद्रमा के लिए लगभग एक दिन, सूर्य के लिए करीब पखवाड़ा, और गुरु, शनि व राहु के लिए हफ़्तों से महीनों तक। इस पृष्ठ की दैनिक तालिका सदा वर्तमान आघात दिखाती है।

लत्ता दोष फलदीपिका XXVI की शास्त्रीय मुहूर्त-सावधानी है — शुभारम्भ के लिए दूसरी घड़ी चुनने का कारण, आपके दिन का फ़ैसला कभी नहीं।