PanchangBodh logo
PanchangBodhसटीक वैदिक कैलेंडर

भावों में ग्रह

नौ में से हर ग्रह का बारह भावों में क्या अर्थ है — निरयण, खगोलीय गणना पर आधारित। फिर अपनी स्थितियाँ जानें, निःशुल्क।

9 ग्रह12 भाव108 स्थितियाँनिःशुल्क जाँच

भाव जीवन का एक क्षेत्र है — देह, धन, भाई-बहन, घर, संतान, कार्य, विवाह। ग्रह अभिनेता है। जब कोई ग्रह किसी भाव में बैठता है, तो वह अपने स्वभाव को उस क्षेत्र में प्रकट करता है: तृतीय भाव में मंगल अपनी ऊर्जा को प्रयास और पराक्रम बना देता है; पंचम भाव में गुरु अपनी वृद्धि संतान और विद्या को देता है। नौ ग्रह बारह भावों में मिलकर 108 स्थितियाँ बनाते हैं, और हर जन्मकुंडली इनमें से किन्हीं नौ का एक विशेष समुच्चय है।

इस वेबसाइट पर हर स्थिति उसी निरयण (लाहिरी) राशिचक्र में पढ़ी जाती है जिसका वैदिक ज्योतिष प्रयोग करता है, और आपकी जन्म तिथि, समय व स्थान से खगोलीय रूप से परिकलित होती है — किसी सूर्य-राशि तालिका से नहीं देखी जाती।

अपनी नौ स्थितियाँ जानें

जन्म विवरण दर्ज करें — हर ग्रह का भाव, राशि और अवस्था, निःशुल्क।

जन्म तिथि
जन्म समय
वैदिक गणना · लाहिरी अयनांश · निःशुल्क

एक ग्रह चुनें

हर ग्रह का अपना पृष्ठ उसे बारहों भावों में पढ़ता है। जिस ग्रह का पृष्ठ अभी लिखा जा रहा है, उसका कार्ड फ़िलहाल संक्षिप्त पाठ देता है।

शनि — भावों में

12 भाव

अनुशासन, देरी और कर्तव्य — शनि जहाँ बैठता है, वहीं जीवन आपसे टिकाऊ फल अर्जित करने को कहता है। बारहों स्थितियाँ, विवाह, करियर और घर के भाव विस्तार से।

अभी जाँचें

गुरु — भावों में

12 भाव

वृद्धि, ज्ञान और रक्षण — गुरु अपने भाव की हर वस्तु को बढ़ाता है और जिन तीन भावों पर दृष्टि डालता है उन्हें आशीष देता है। पंचम में संतान और विद्या; द्वितीय में धन और वाणी; नवम में भाग्य और श्रद्धा।

मंगल — भावों में

12 भाव

ऊर्जा, संघर्ष और पराक्रम — मंगल अपने भाव को ऊर्जा देता है और उसे तप्त करता है। प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश में यह मांगलिक प्रश्न उठाता है; तृतीय, षष्ठ, दशम और एकादश में उसकी ऊर्जा काम आती है।

सूर्य — भावों में

12 भाव

अधिकार, ओज और पिता — सूर्य जिस भाव में हो, वहीं आप दिखने के लिए बने हैं, और वहीं अहं को संयमित करना पड़ता है। दशम और प्रथम में सबसे प्रबल; सप्तम में सबसे माँग करने वाला।

चंद्र — भावों में

12 भाव

मन, माता और भावनात्मक आवश्यकता — चंद्र का भाव बताता है कि आप कहाँ शांति खोजते हैं और कौन-सी बात आपको सबसे सहज विचलित करती है। चतुर्थ उसका घर है; अष्टम और द्वादश उससे सबसे अधिक माँगते हैं।

बुध — भावों में

12 भाव

वाणी, व्यापार और विश्लेषण — बुध का भाव वह है जहाँ आप सबसे तेज़ सोचते और सबसे अच्छा मोल-भाव करते हैं। द्वितीय में प्रभावशाली वाणी; दशम में शब्दों और अंकों का करियर; तृतीय में चंचल कौशल।

शुक्र — भावों में

12 भाव

प्रेम, सुख और कलाएँ — शुक्र का भाव वह है जहाँ सुख और संबंध आपके जीवन में प्रवेश करते हैं। सप्तम में वह नैसर्गिक कारक अपने ही भाव में खड़ा होता है — जिसे शास्त्र सावधानी से पढ़ते हैं (कारको भाव नाशाय); द्वादश में शय्या-सुख; चतुर्थ में सुंदर घर।

राहु — भावों में

12 भाव

भूख और अपरिचित — राहु का भाव वह क्षेत्र है जिसकी ओर यह जीवन बार-बार धकेलता है, प्रायः पहले आसक्ति और बाद में प्रवीणता के रूप में। केतु सदा सामने वाले भाव में बैठता है, जो पहले से ज्ञात को दर्शाता है।

केतु — भावों में

12 भाव

विरक्ति और पहले से ज्ञात — केतु का भाव वह है जिसे आप छोड़ देते हैं, या बिना प्रयास सिद्ध कर लेते हैं और फिर रुचि खो देते हैं। द्वादश में यह मोक्ष की ओर संकेत करता है; सप्तम में उस साझेदारी की ओर जिसे सचेत रूप से चुनना पड़ता है।

वैदिक बनाम पाश्चात्य: आपकी स्थितियाँ क्यों भिन्न हैं

पाश्चात्य ज्योतिष सायन राशिचक्र प्रयोग करता है, जो ऋतुओं से बँधा है; वैदिक ज्योतिष निरयण राशिचक्र प्रयोग करता है, जो स्थिर तारों से बँधा है। आज दोनों में लगभग 24 अंश का अंतर है (लाहिरी अयनांश), इसलिए किसी पाश्चात्य राशि के आरंभिक अंशों में स्थित ग्रह प्रायः आपकी वैदिक कुंडली में पिछली राशि में होता है, और लग्न — तथा उसके साथ हर भाव — उतना ही खिसक जाता है। यदि पाश्चात्य कुंडली आपके शनि को वृश्चिक में रखती है, तो वैदिक कुंडली में वह तुला में हो सकता है।

इस वेबसाइट पर भाव पूर्ण-राशि (राशि) कुंडली के अनुसार हैं।

बारह भाव, एक-एक पंक्ति में

हर भाव को भाव-विश्लेषण पृष्ठों पर विस्तार से पढ़ा जाता है। यहाँ संक्षिप्त परिचय है, ताकि ग्रह-पृष्ठ समझ में आएँ।

प्रथम भाव — स्वयं और देहलग्न, रूप-रंग, ओज
द्वितीय भाव — धन, परिवार और वाणीबचत, भोजन, वाणी
तृतीय भाव — पराक्रम, भाई-बहन और प्रयासकौशल, छोटी यात्राएँ
चतुर्थ भाव — घर, माता और शांतिसंपत्ति, वाहन, हृदय
पंचम भाव — सृजन, संतान और पुण्यप्रेम, बुद्धि, पूर्व पुण्य
षष्ठ भाव — सेवा, स्वास्थ्य और बाधाएँऋण, प्रतिद्वंद्वी, दैनिक कार्य
सप्तम भाव — विवाह और साझेदारीजीवनसाथी, व्यापारिक साझेदार
अष्टम भाव — गहराई, आयु और परिवर्तनउत्तराधिकार, शोध, संकट
नवम भाव — धर्म, भाग्य और पिताश्रद्धा, गुरु, लंबी यात्राएँ
दशम भाव — करियर और सार्वजनिक भूमिकाप्रतिष्ठा, अधिकार, कर्म
एकादश भाव — लाभ और संपर्कआय, मित्र, बड़े भाई-बहन
द्वादश भाव — हानि, विसर्जन और मोक्षव्यय, विदेश, निद्रा
भाव-विश्लेषण हब पर पूर्ण भाव-अर्थ

भावों में ग्रह — सामान्य प्रश्न

Q: किसी ग्रह का किसी भाव में होना क्या दर्शाता है?

भाव क्षेत्र है, ग्रह अभिनेता। किसी भाव में स्थित ग्रह अपने स्वभाव को जीवन के उस क्षेत्र में प्रकट करता है — सप्तम विवाह के लिए, दशम करियर के लिए — जिस राशि में वह खड़ा है और जो ग्रह उस पर दृष्टि डालते हैं, उनसे रंगकर।

Q: ग्रह और भाव के कुल कितने संयोग होते हैं?

एक सौ आठ: नौ ग्रह बारह भावों में। आपकी अपनी कुंडली में एक साथ इनमें से नौ होते हैं, हर ग्रह के लिए एक।

Q: क्या वैदिक और पाश्चात्य ज्योतिष में भावों के ग्रह एक समान होते हैं?

नहीं। वैदिक ज्योतिष निरयण (लाहिरी) राशिचक्र प्रयोग करता है, जो इस समय सायन राशिचक्र से लगभग 24 अंश पीछे है, इसलिए किसी पाश्चात्य राशि के आरंभिक अंशों में स्थित ग्रह प्रायः आपकी वैदिक कुंडली में पिछली राशि में चला जाता है।

Q: कौन-से ग्रह शुभ हैं और कौन-से अशुभ?

स्वभाव से गुरु, शुक्र, बढ़ता हुआ चंद्र और अपीड़ित बुध शुभ हैं; शनि, मंगल, सूर्य, राहु और केतु अशुभ। कार्य से हर ग्रह किसी विशेष लग्न के लिए, जिन भावों का वह स्वामी है उनके अनुसार, शुभ या अशुभ बन जाता है — इसीलिए वही स्थिति भिन्न लग्नों के लिए भिन्न पढ़ी जाती है।

Q: क्या मुझे अपना सटीक जन्म समय चाहिए?

भावों के लिए, हाँ। ग्रह की राशि और नक्षत्र आपकी तिथि से निकलते हैं; उसका भाव लग्न पर निर्भर करता है, जो हर दो घंटे में एक पूरी राशि बदल देता है। समय के बिना हम राशियाँ दिखाते हैं और भावों को अनुपलब्ध लिखते हैं, अनुमान नहीं लगाते।

सूचना: शास्त्रीय ज्योतिष (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका) पर आधारित। भाव-स्थिति का विश्लेषण प्रवृत्तियाँ बताता है, गारंटी नहीं। व्यक्तिगत मार्गदर्शन हेतु योग्य ज्योतिषी से संपर्क करें।