गुरु नानक जयंती 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को, कार्तिक पूर्णिमा के दिन पड़ती है — और पंचांग में इसके आसपास पड़ने वाले तिथि-आधारित व्रतों के विपरीत, यह किसी पूजा-मुहूर्त से नहीं मनाई जाती। यह प्रकाश उत्सव है, प्रकाश का पर्व, जो सिख गुरुओं में प्रथम गुरु नानक देव जी के जन्म का स्मरण है — उनका जन्म 1469 में हुआ था। प्रकाश का अर्थ है ज्योति और भीतरी जागरण का उदय, और यह दिन उनके जीवन और उपदेश से संसार में आए ज्ञान-प्रकाश का सम्मान करता है, न कि घड़ी में देखे किसी शुभ मुहूर्त का।
चूँकि यह गुरुपर्व है, कोई ज्योतिषीय अनुष्ठान नहीं, इसलिए यह दिन गुरुद्वारे और संगत का है। तैयारी दो दिन पूर्व अखंड पाठ से आरंभ होती है — संपूर्ण गुरु ग्रंथ साहिब का अटूट, 48 घंटे का पाठ; गुरु ग्रंथ साहिब वह ग्रंथ है जिसे जीवंत, सनातन गुरु के रूप में पूजा जाता है, और यह पाठ गुरुपर्व की भोर तक पूरा होने के लिए नियत रहता है। भोर में श्रद्धालु प्रभात फेरी निकालते हैं और गलियों में शबद गाते चलते हैं, और दिन की नगर कीर्तन यात्रा का नेतृत्व पंज प्यारे करते हैं, जो गुरु ग्रंथ साहिब के आगे-आगे चलते हैं। कीर्तन, कथा और लंगर — सबके लिए खुला निःशुल्क सामुदायिक भोजन — पूरे दिन इस उत्सव को बनाए रखते हैं।
गुरु नानक जयंती 2026 — एक दृष्टि में
गुरुपर्व
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
तिथि
कार्तिक पूर्णिमा
प्रकाश उत्सव
प्रकाश का पर्व · जन्म 1469
अखंड पाठ
48 घंटे का अखंड पाठ
प्रभात फेरी
भोर की शबद-यात्रा
लंगर
सबके लिए निःशुल्क भोजन
गुरुपर्व और उसके आयोजन
तिथि, और दिन भर क्या होता है
गुरुपर्व
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
कार्तिक पूर्णिमा — पूर्णिमा तिथि
मुख्य आयोजन
प्रभात फेरी, नगर कीर्तन, लंगर
भोर से दिन भर, गुरुद्वारे में
तिथि परंपरा से कार्तिक की पूर्णिमा पर नियत है, और 2026 में यह पूर्णिमा मंगलवार, 24 नवंबर को पड़ती है — उसी रात जब कार्तिक के दीप पहले से जल रहे होते हैं, इसलिए प्रकाश का यह पर्व स्वाभाविक रूप से इसी दिन बैठता है। यहाँ किसी तिथि-आधारित व्रत की तरह पकड़ने योग्य कोई पूजा-मुहूर्त नहीं है: यह दिन शुभ मिनटों में नहीं, गुरुद्वारे में बहती भक्ति के प्रवाह में नापा जाता है। यह सूर्योदय से पहले प्रभात फेरी से खुलता है, प्रातःकाल के नगर कीर्तन और कीर्तन-कथा में बढ़ता है, और देर तक लंगर के साथ चलता रहता है, ताकि जो भी आए वह भोजन पाए और अपनाया जाए।
गुरुपर्व कैसे मनाया जाता है
अखंड पाठ, प्रभात फेरी, नगर कीर्तन और लंगर
गुरुपर्व से दो दिन पूर्व तैयारी अखंड पाठ से आरंभ होती है — संपूर्ण गुरु ग्रंथ साहिब का सतत, अटूट पाठ, जो लगभग 48 घंटे चलता है और उसी दिन की भोर में पूरा होने के लिए नियत रहता है; पाठकों की बारी बदलती रहती है जिससे पाठ कभी नहीं थमता। गुरुपर्व की भोर में श्रद्धालु प्रभात फेरी पर निकलते हैं और उजाला होते-होते मोहल्ले में शबद गाते चलते हैं। दिन की सबसे बड़ी शोभायात्रा नगर कीर्तन है, जिसका नेतृत्व पंज प्यारे — पाँच प्यारे — करते हैं; वे गुरु ग्रंथ साहिब के आगे चलते हैं, जिन्हें पूरे आदर के साथ ले जाया जाता है, जबकि संगत शबद गाती, मार्ग बुहारती और राह में मिठाई बाँटती चलती है। गुरुद्वारे के भीतर दिन कीर्तन और कथा से भरा रहता है, और सब लंगर में सम्मिलित होते हैं — निःशुल्क सामुदायिक भोजन, जिसे सेवादार पकाते और परोसते हैं और जिसे सब एक साथ भूमि पर बैठकर समान भाव से ग्रहण करते हैं — वही परंपरा जिससे गुरु नानक ने सिखाया कि कोई ऊँच या नीच नहीं।
गुरु नानक देव जी और उनकी शिक्षा
इक ओंकार और तीन स्तंभ
गुरु नानक देव जी, जिनका जन्म 1469 में हुआ, सिख गुरुओं में प्रथम और सिख पंथ के प्रवर्तक थे। उन्होंने दूर-दूर तक यात्राएँ कीं और सबसे बढ़कर इक ओंकार का उपदेश दिया — कि ईश्वर एक है, सभी नामों और रूपों के पीछे एक ही दिव्य सत्य है, जो हर प्राणी में विद्यमान है, कर्मकांड से परे और जाति-पंथ के भेदों से परे। इसी एक सत्य से उन्होंने गृहस्थ के योग्य जीवन-मार्ग निकाला, जो तीन स्तंभों में समाया है: नाम जपो — दिव्य नाम का स्मरण और जप; किरत करो — अपने परिश्रम से ईमानदारी की कमाई; और वंड छको — जो कमाओ उसे ज़रूरतमंदों के साथ बाँटकर खाओ। गुरुपर्व का लंगर और सेवा इन्हीं शिक्षाओं का साकार रूप हैं — भक्ति, ईमानदार श्रम और बाँटना, किसी कर्मकांड के रूप में नहीं, जीने के ढंग के रूप में।
अपने शहर का कार्तिक पूर्णिमा पंचांग देखें
गुरु नानक जयंती भक्ति से मनाई जाती है, किसी मुहूर्त से नहीं — पर 24 नवंबर को अपने शहर की कार्तिक पूर्णिमा तिथि, सूर्योदय, चंद्रोदय और चौघड़िया के लिए लाइव पंचांग खोलें।
गुरु नानक जयंती 2026 — आपके प्रश्न
तिथि, आयोजन और शिक्षा
