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होलाष्टक 2026 - तिथियां और समय

2026 में New Delhi के लिए होलाष्टक अवधि की सटीक तिथियां और समय

🕉️7 दिन
🎨होली से पहले
📅25 फ़र - 3 मार्च
📍New Delhi

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक - शुभ कार्यों से बचने की अवधि

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वर्ष
2026

होलाष्टक प्रारंभ

नवमी

25फ़रवरी2026

बुधवार

तिथि समय

04:54

होलाष्टक समाप्त

पूर्णिमा

3मार्च2026

मंगलवार

तिथि समय

17:09

नोट: Holashtak is the 8-day inauspicious period before Holi. Counts follow the sunrise rule. If Purnima does not include a local sunrise, that civil date is excluded, so some years show 7 days instead of 8.

होलाष्टक तिथि समयरेखा

8 दिनों की विस्तृत तिथियां

दिन 1

नवमी

🚩 शुरुआत

📅 25 फ़र 2026

शुक्ल पक्ष

प्रारंभ04:54
समाप्त02:42
दिन 2

दशमी

📅 26 फ़र 2026

शुक्ल पक्ष

प्रारंभ02:43
समाप्त00:34
दिन 3

एकादशी

📅 27 फ़र 2026

शुक्ल पक्ष

प्रारंभ00:35
समाप्त22:34
दिन 4

द्वादशी

📅 28 फ़र 2026

शुक्ल पक्ष

प्रारंभ22:35
समाप्त20:45
दिन 5

त्रयोदशी

📅 1 मार्च 2026

शुक्ल पक्ष

प्रारंभ20:46
समाप्त19:10
दिन 6

चतुर्दशी

📅 2 मार्च 2026

शुक्ल पक्ष

प्रारंभ19:12
समाप्त17:57
दिन 7

पूर्णिमा

🌕 पूर्णिमा

📅 3 मार्च 2026

शुक्ल पक्ष

प्रारंभ17:58
समाप्त17:09

🔥 होलिका दहन - शाम को

सभी समय स्थानीय समयक्षेत्र में दिखाए गए हैं। तिथियां सूर्योदय नियम का पालन करती हैं।

होलाष्टक को समझें

होलाष्टक शब्द होली + अष्टक (आठ) से बना है, जो होली से पहले के आठ दिनों को दर्शाता है। यह फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलता है, जब होलिका दहन होता है।

⏱️ अवधि

सामान्यतः 8 दिन, हालांकि कुछ वर्षों में 7 दिन भी हो सकते हैं यदि पूर्णिमा तिथि आपके स्थान पर सूर्योदय को नहीं छूती।

पारंपरिक ग्रंथों में इस समय सावधानी बरतने को कहा गया है। चंद्रमा संवेदनशील स्थिति में होता है, इसलिए शादी, गृह प्रवेश और संपत्ति के बड़े फैसले टाल दिए जाते हैं।

🕉️ होलाष्टक को अशुभ क्यों माना जाता है

वैदिक ज्योतिष में शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक (होली की ओर जाते हुए) का समय अप्रत्याशित माना जाता है। यह होलिका दहन की तैयारी का समय है—वह रात जब बुराई पर अच्छाई की जीत मनाते हैं।

इस अवधि में बड़े काम शुरू नहीं किए जाते क्योंकि ऊर्जाएं बदलाव में होती हैं। रोज की दिनचर्या और आध्यात्मिक साधना चलती रहती है, पर शादी, व्यापार या संपत्ति जैसे बड़े निर्णय टाल दिए जाते हैं।

⚠️ होलाष्टक के दौरान वर्जित कार्य

💍 विवाह और सगाई
मांगलिक संस्कार टाले जाते हैं।
🏠 गृह प्रवेश / घर खरीदना
नए घर में प्रवेश से बचें।
📄 संपत्ति पंजीकरण, बड़े निवेश
बड़े वित्तीय निर्णय टालें।
🚗 वाहन खरीदना
नए वाहन की खरीदारी टालें।
👶 संस्कार (मुंडन, नामकरण, उपनयन)
धार्मिक संस्कार स्थगित करें।
🏢 नया व्यवसाय / बड़े उद्यम शुरू करना
व्यापार शुभारंभ टालें।

(ये पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। आपात स्थिति में उचित उपचार के साथ कार्य किए जा सकते हैं।)

✅ होलाष्टक के दौरान अनुमत कार्य

💼 दैनिक कार्य, ऑफिस, सामान्य जीवन
रोज का काम सामान्य रूप से चलता रहता है।
🧘 आध्यात्मिक गतिविधियां (जप, ध्यान, व्रत, पाठ)
आध्यात्मिक साधना के लिए उपयुक्त समय।
🤲 दान, सेवा, लोगों/पशुओं की मदद
दान-पुण्य और सेवा के काम अच्छे माने जाते हैं।
🛕 मंदिर दर्शन, कथा पढ़ना
धार्मिक अध्ययन और दर्शन के लिए उपयुक्त समय।

💡 ध्यान दें: होलाष्टक में बस नए शुभ काम नहीं शुरू किए जाते, जीवन थमता नहीं है।

📖 प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की कथा

होलाष्टक की कथा प्रह्लाद और उनके पिता राक्षस राज हिरण्यकशिपु से जुड़ी है। प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे।

हिरण्यकशिपु चाहता था कि सब उसे ही भगवान मानें, पर प्रह्लाद ने मना कर दिया। वह विष्णु की भक्ति में दृढ़ रहे। राजा ने प्रह्लाद को कई यातनाएं दीं—विष पिलाया, हाथियों के सामने डाला, सांपों से डसवाया, पहाड़ से फेंका—पर प्रह्लाद हर बार बच गए।

आखिर में हिरण्यकशिपु की बहन होलिका आगे आई। उसे वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। वह प्रह्लाद को लेकर धधकती चिता में बैठ गई। पर हुआ उलटा—होलिका जलकर राख हो गई और प्रह्लाद बच गए।

🔗 होलाष्टक से संबंध

ये 8 दिन प्रह्लाद की परीक्षा के समय को दर्शाते हैं। होलाष्टक बताता है कि बदलाव से पहले मुश्किल दौर आता है। पूर्णिमा पर होलिका दहन अहंकार और बुराई के नाश का प्रतीक है।

🎨 होली और होलिका दहन से जुड़ाव

होलाष्टक पूर्णिमा की शाम को होलिका दहन के साथ खत्म होता है। लोग अलाव जलाकर होलिका की हार और भक्ति की जीत मनाते हैं।

🔥 होलिका दहन (पूर्णिमा की शाम)

होलाष्टक के आखिरी दिन लोग अलाव के पास इकट्ठा होते हैं। आग में बुराई, अहंकार और पुरानी शिकायतें जलाई जाती हैं—होली से पहले एक तरह से शुद्धि।

🌈 धुलण्डी / रंग पंचमी (अगले दिन)

अगले दिन होली खेली जाती है रंगों के साथ। यह खुशी, माफी और नई शुरुआत का त्योहार है। 8 दिन के संयम के बाद पूरा उत्सव—संयम से उल्लास तक।

🙏 उपचार और सकारात्मक अभ्यास

📿 मंत्र जप
नरसिम्ह मंत्र या होली से संबंधित मंत्रों का जप करें।
🧘 ध्यान और योग
आंतरिक शांति के लिए नियमित ध्यान करें।
🍛 व्रत और सात्विक भोजन
उपवास या हल्का सात्विक भोजन लें।
📚 धार्मिक ग्रंथ पढ़ना
भागवत पुराण या होली कथा का पाठ करें।
🪔 दीप दान
शाम को दीपक जलाएं और प्रार्थना करें।
💝 दान और सेवा
जरूरतमंदों की मदद करें और दान करें।

📖 ज्ञान नोट

होलाष्टक में पंचांग का सूर्योदय नियम लागू होता है। तिथि तभी गिनी जाती है जब वह आपके स्थान पर सूर्योदय को छुए। इसी वजह से कुछ जगहों पर होलाष्टक 8 की जगह 7 दिन का होता है।

होलाष्टक उत्सव से पहले संयम का समय है—होली की खुशियों से पहले आत्म-चिंतन। यह दर्शाता है कि जीवन में सावधानी और उत्सव दोनों की जगह है, हर एक का अपना वक्त।

संबंधित पेज

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्रत व त्योहार

पंचक योग
अशुभ अवधि और समय
पूर्णिमा तिथियां
पूर्णिमा पालन
एकादशी तिथियां
भगवान विष्णु के लिए पवित्र उपवास
ग्रहण तिथियां
सूर्य और चंद्र ग्रहण

मुहूर्त व पंचांग

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