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होलाष्टक प्रारंभ
नवमी
बुधवार
04:54
होलाष्टक समाप्त
पूर्णिमा
मंगलवार
17:09
नोट: Holashtak is the 8-day inauspicious period before Holi. Counts follow the sunrise rule. If Purnima does not include a local sunrise, that civil date is excluded, so some years show 7 days instead of 8.
होलाष्टक तिथि समयरेखा
8 दिनों की विस्तृत तिथियां
नवमी
📅 25 फ़र 2026
शुक्ल पक्ष
दशमी
📅 26 फ़र 2026
शुक्ल पक्ष
एकादशी
📅 27 फ़र 2026
शुक्ल पक्ष
द्वादशी
📅 28 फ़र 2026
शुक्ल पक्ष
त्रयोदशी
📅 1 मार्च 2026
शुक्ल पक्ष
चतुर्दशी
📅 2 मार्च 2026
शुक्ल पक्ष
पूर्णिमा
📅 3 मार्च 2026
शुक्ल पक्ष
🔥 होलिका दहन - शाम को
सभी समय स्थानीय समयक्षेत्र में दिखाए गए हैं। तिथियां सूर्योदय नियम का पालन करती हैं।
होलाष्टक को समझें
होलाष्टक शब्द होली + अष्टक (आठ) से बना है, जो होली से पहले के आठ दिनों को दर्शाता है। यह फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलता है, जब होलिका दहन होता है।
⏱️ अवधि
सामान्यतः 8 दिन, हालांकि कुछ वर्षों में 7 दिन भी हो सकते हैं यदि पूर्णिमा तिथि आपके स्थान पर सूर्योदय को नहीं छूती।
पारंपरिक ग्रंथों में इस समय सावधानी बरतने को कहा गया है। चंद्रमा संवेदनशील स्थिति में होता है, इसलिए शादी, गृह प्रवेश और संपत्ति के बड़े फैसले टाल दिए जाते हैं।
🕉️ होलाष्टक को अशुभ क्यों माना जाता है
वैदिक ज्योतिष में शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक (होली की ओर जाते हुए) का समय अप्रत्याशित माना जाता है। यह होलिका दहन की तैयारी का समय है—वह रात जब बुराई पर अच्छाई की जीत मनाते हैं।
इस अवधि में बड़े काम शुरू नहीं किए जाते क्योंकि ऊर्जाएं बदलाव में होती हैं। रोज की दिनचर्या और आध्यात्मिक साधना चलती रहती है, पर शादी, व्यापार या संपत्ति जैसे बड़े निर्णय टाल दिए जाते हैं।
⚠️ होलाष्टक के दौरान वर्जित कार्य
(ये पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। आपात स्थिति में उचित उपचार के साथ कार्य किए जा सकते हैं।)
✅ होलाष्टक के दौरान अनुमत कार्य
💡 ध्यान दें: होलाष्टक में बस नए शुभ काम नहीं शुरू किए जाते, जीवन थमता नहीं है।
📖 प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की कथा
होलाष्टक की कथा प्रह्लाद और उनके पिता राक्षस राज हिरण्यकशिपु से जुड़ी है। प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे।
हिरण्यकशिपु चाहता था कि सब उसे ही भगवान मानें, पर प्रह्लाद ने मना कर दिया। वह विष्णु की भक्ति में दृढ़ रहे। राजा ने प्रह्लाद को कई यातनाएं दीं—विष पिलाया, हाथियों के सामने डाला, सांपों से डसवाया, पहाड़ से फेंका—पर प्रह्लाद हर बार बच गए।
आखिर में हिरण्यकशिपु की बहन होलिका आगे आई। उसे वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। वह प्रह्लाद को लेकर धधकती चिता में बैठ गई। पर हुआ उलटा—होलिका जलकर राख हो गई और प्रह्लाद बच गए।
🔗 होलाष्टक से संबंध
ये 8 दिन प्रह्लाद की परीक्षा के समय को दर्शाते हैं। होलाष्टक बताता है कि बदलाव से पहले मुश्किल दौर आता है। पूर्णिमा पर होलिका दहन अहंकार और बुराई के नाश का प्रतीक है।
🎨 होली और होलिका दहन से जुड़ाव
होलाष्टक पूर्णिमा की शाम को होलिका दहन के साथ खत्म होता है। लोग अलाव जलाकर होलिका की हार और भक्ति की जीत मनाते हैं।
🔥 होलिका दहन (पूर्णिमा की शाम)
होलाष्टक के आखिरी दिन लोग अलाव के पास इकट्ठा होते हैं। आग में बुराई, अहंकार और पुरानी शिकायतें जलाई जाती हैं—होली से पहले एक तरह से शुद्धि।
🌈 धुलण्डी / रंग पंचमी (अगले दिन)
अगले दिन होली खेली जाती है रंगों के साथ। यह खुशी, माफी और नई शुरुआत का त्योहार है। 8 दिन के संयम के बाद पूरा उत्सव—संयम से उल्लास तक।
🙏 उपचार और सकारात्मक अभ्यास
📖 ज्ञान नोट
होलाष्टक में पंचांग का सूर्योदय नियम लागू होता है। तिथि तभी गिनी जाती है जब वह आपके स्थान पर सूर्योदय को छुए। इसी वजह से कुछ जगहों पर होलाष्टक 8 की जगह 7 दिन का होता है।
होलाष्टक उत्सव से पहले संयम का समय है—होली की खुशियों से पहले आत्म-चिंतन। यह दर्शाता है कि जीवन में सावधानी और उत्सव दोनों की जगह है, हर एक का अपना वक्त।