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कजरी तीज 2026 — तिथि और व्रत विधि

कजरी तीज सोमवार 31 अगस्त 2026 को है — नीम-पूजा और मानसूनी लोकगीतों की लोक-तीज, भाद्रपद कृष्ण तृतीया के समय, फलाहार व्रत विधि और कजरी परंपरा के साथ।

Women singing kajari folk songs around a Neem tree decorated with offerings on Kajari Teej
PanchangBodh Editorial
7 min read
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कजरी तीज तीनों तीज में सबसे लोक-रंग वाली है — हरतालिका जितनी कठिन नहीं, और हरियाली से अधिक क्षेत्रीय गीतों और सामुदायिक भाव में रची-बसी। भाद्रपद की कृष्ण तृतीया को पड़ने वाली इस तीज को कई नामों से जाना जाता है: कजली तीज मानसूनी लोकगीतों के नाम पर, सातूड़ी तीज कुछ क्षेत्रों में सत्तू के भोग के नाम पर, और बड़ी तीज इसलिए कि यह दोनों तीज के बीच आती है।

वर्ष 2026 में कजरी तीज सोमवार, 31 अगस्त को है। नीचे नई दिल्ली के लिए भाद्रपद कृष्ण तृतीया का सटीक समय, नीम-पूजा विधि, फलाहार व्रत के नियम, कजरी लोकगीत की परंपरा, तथा यह तीज हरियाली और हरतालिका से कैसे भिन्न है — सब दिया गया है।

कजरी तीज 2026 एक दृष्टि में

🗓️

पर्व दिवस

सोमवार, 31 अगस्त 2026

🌙

तिथि

भाद्रपद कृष्ण तृतीया

⏱️

तृतीया आरंभ

30 अगस्त, 09:38

⏱️

तृतीया समाप्त

31 अगस्त, प्रातः 08:52

🌿

मुख्य अनुष्ठान

नीम-माता की पूजा

🍎

व्रत

फलाहार व्रत

🌅

सूर्योदय · सूर्यास्त

05:58 · 18:44

🎵

अन्य नाम

कजली तीज, सातूड़ी तीज

कजरी तीज 2026 तिथि और समय

भाद्रपद कृष्ण तृतीया का समय और सूर्योदय

कृष्ण तृतीया

30 Aug 09:38 → 31 Aug 08:52

भाद्रपद, नई दिल्ली

सूर्योदय · सूर्यास्त

05:58 · 18:44

31 अगस्त, नई दिल्ली

वर्ष 2026 में भाद्रपद की कृष्ण तृतीया 30 अगस्त 09:38 पर आरंभ होकर 31 अगस्त 08:52 पर समाप्त होती है (नई दिल्ली)। चूँकि 31 की भोर में सूर्योदय (05:58) पर तृतीया विद्यमान रहती है, कजरी तीज 31 अगस्त को मनाई जाती है। हरतालिका तीज के विपरीत, इसमें कोई विशेष प्रदोष या निशिता मुहूर्त नहीं होता — नीम-पूजा दिन में की जाती है और साँझ को स्त्रियाँ कजरी गायन के लिए एकत्र होती हैं। सूर्योदय का समय नगर के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

कजरी तीज व्रत विधि और नीम पूजा

फलाहार व्रत कैसे रखें और नीम-माता की पूजा कैसे करें

स्त्रियाँ प्रातः जल्दी उठकर स्नान करती हैं और उत्सवी वस्त्र — प्रायः हरे, मानसून के रंग — धारण करती हैं। व्रत फलाहार का होता है: फल, दूध, मेवे और सेंधा-नमक के व्यंजन खा सकती हैं, जो हरतालिका तीज के निर्जला व्रत से सरल है। केंद्र में नीम-पूजा होती है: स्त्रियाँ नीम के पेड़ के पास जाती हैं, उसके चारों ओर की भूमि स्वच्छ करती हैं, और तने पर सिंदूर, रोली, हल्दी और पवित्र धागा चढ़ाती हैं। मिठाई, फल, पुष्प और कहीं-कहीं सत्तू का भोग लगाती हैं, फिर सात परिक्रमा करती हैं — अपने पति की दीर्घायु और परिवार की कुशलता की कामना के साथ। कई घरों में नीम की एक छोटी टहनी लाकर चौकी पर उसकी पूजा भी की जाती है। अगले दिन प्रातः संक्षिप्त पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है। क्षेत्रीय रीतियाँ भिन्न होती हैं — कुछ स्थानों पर नीम के नीचे जल-कलश रखकर पूजा होती है, कहीं कजरी के विशेष पकवान बनते हैं — इसलिए जहाँ भिन्नता हो, अपनी परंपरा का पालन करें।

कजरी लोकगीत की परंपरा

मानसूनी गीत, झूले और सामुदायिक उत्सव

कजरी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के मानसूनी लोकगीत हैं। ये गीत वर्षा, विरह की पीड़ा, मिलन का आनंद और शिव-पार्वती की भक्ति का गान करते हैं — एक लहरदार सवाल-जवाब शैली में, प्रायः पेड़ों से बँधे झूलों पर बैठकर। कजरी तीज पर स्त्रियाँ आँगन में या किसी बड़े पेड़ के नीचे एकत्र होकर इन्हें साँझ भर गाती हैं, और पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस मानसूनी गायन की परंपरा को जीवित रखती हैं। नगरों में यह रिवाज़ क्षीण हुआ है, पर ग्रामीण विंध्य और बुंदेलखंड में यह आज भी एक जीवंत सामुदायिक उत्सव है। गीतों ने ही इस पर्व को नाम दिया: कजरी तीज — कजरी गायन की तीज।

महत्व और तीनों तीज

कजरी तीज का महत्व

कजरी तीज दोनों अधिक प्रसिद्ध तीज के बीच पड़ती है और उसका अपना स्वतंत्र स्वरूप है। जहाँ हरियाली तीज हरी और उल्लासमयी है और हरतालिका तीज कठिन और भक्तिमयी, वहाँ कजरी तीज लोक-परंपरा में रची-बसी है — नीम-पूजा, क्षेत्रीय गीत, पेड़ के नीचे स्त्रियों का एकत्र होना। यह मुख्यतः विंध्य क्षेत्र, राजस्थान के कुछ भागों, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है, और नगरीय भारत में कम दिखती है। विवाहित स्त्रियाँ इसे अपने पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं; कुँवारी कन्याएँ योग्य वर की कामना से। यदि आपके या परिवार में किसी के लिए विवाह की बात चल रही हो, तो हमारा कुंडली मिलान साधन वैदिक गुण-मिलान और अनुकूलता का सार प्रस्तुत करता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कजरी तीज 2026 की तिथि, विधि और परंपरा

कजरी तीज 2026 में कब है?+
कजरी तीज 2026 में सोमवार, 31 अगस्त को है। यह भाद्रपद की कृष्ण तृतीया को मनाई जाती है, जो नई दिल्ली समय अनुसार 30 अगस्त 09:38 से 31 अगस्त 08:52 तक रहती है। चूँकि 31 की भोर में तृतीया विद्यमान रहती है, व्रत उसी दिन रखा जाता है।
कजरी तीज, हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?+
तीनों शिव-पार्वती का सम्मान करती हैं, पर तिथि, भाव और कठोरता में भिन्न हैं। हरियाली तीज श्रावण की शुक्ल तृतीया की हरी, मानसूनी तीज है। कजरी तीज भाद्रपद की कृष्ण तृतीया की लोक-तीज है — नीम-पूजा और कजरी गायन से पहचानी जाती है, विशेषकर विंध्य क्षेत्र में। हरतालिका तीज, एक पखवाड़े बाद शुक्ल तृतीया को, सबसे कठिन है — निर्जला व्रत।
कजरी तीज का व्रत कैसे रखा जाता है?+
स्त्रियाँ फलाहार व्रत रखती हैं — फल, दूध, मेवे और सेंधा-नमक के व्यंजन खा सकती हैं, हरतालिका तीज के निर्जला व्रत से भिन्न। वे नीम के पेड़ की पूजा करती हैं — उसके तने पर धागा बाँधती हैं, सिंदूर, मिठाई और पुष्प अर्पित करती हैं, और उसकी परिक्रमा करती हैं। साँझ को स्त्रियाँ मिलकर मानसून और शिव-पार्वती पर कजरी लोकगीत गाती हैं। अगले दिन प्रातः व्रत का पारण किया जाता है।
कजरी तीज पर नीम की पूजा क्यों होती है?+
नीम के पेड़ को नीम-माता — देवी का एक रूप — के रूप में पूजा जाता है। कजरी तीज की परंपरा में स्त्रियाँ नीम की शुद्ध और रक्षात्मक शक्ति की पूजा करती हैं, अपने पति की दीर्घायु और परिवार की कुशलता की कामना के साथ। पेड़ को जीवंत देवता माना जाता है — सजाया जाता है, भोग लगाया जाता है और प्रार्थना में परिक्रमा की जाती है।
कजरी गीत क्या होते हैं?+
कजरी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के लोकगीत हैं, जिन्हें परंपरा में मानसून में स्त्रियाँ गाती हैं। ये वर्षा, प्रेमियों के मिलन, ऋतु की सुंदरता और शिव-पार्वती की भक्ति का गान करते हैं। कजरी तीज पर स्त्रियाँ पेड़ के नीचे या झूलों पर बैठकर इन्हें गाती हैं — इन्हीं गीतों से पर्व को नाम मिला है।
क्या कजरी तीज को सातूड़ी तीज या बड़ी तीज भी कहते हैं?+
हाँ। कजरी तीज को कजली तीज (लोकगीतों के नाम पर), सातूड़ी तीज (कुछ क्षेत्रों में सत्तू के भोग के नाम पर) और बड़ी तीज (हरियाली और हरतालिका के बीच की "बड़ी" तीज) भी कहा जाता है। सभी नाम भाद्रपद कृष्ण तृतीया के इसी व्रत को दर्शाते हैं।
स्रोत और अस्वीकरण: तिथि और समय नई दिल्ली के लिए खगोलीय गणना से परिकलित और पारंपरिक पंचांग से सत्यापित हैं। कजरी तीज भाद्रपद की कृष्ण तृतीया को पड़ती है; चूँकि 2026 अधिक मास का वर्ष है, यह निज भाद्रपद मास है, जिसे गणना-इंजन से निर्धारित किया गया है। सूर्योदय का समय नगर के अनुसार बदलता है, इसलिए पर्व का दिन कहीं-कहीं भिन्न हो सकता है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें। क्षेत्र और परिवार की रीतियाँ भिन्न होती हैं — जहाँ भिन्नता हो, अपनी परंपरा का पालन करें। यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्य से है।