हरियाली तीज सावन का हरियाली पर्व है — वह दिन जब विवाहित और कुँवारी स्त्रियाँ हरे वस्त्र धारण करती हैं, मेहँदी लगाती हैं, फूलों से सजे झूलों पर झूलती हैं और शिव-पार्वती के लिए व्रत रखती हैं। श्रावण की शुक्ल तृतीया को पड़ने वाला यह पर्व शिव और पार्वती के पुनर्मिलन तथा मानसून में धरती के हरे-भरे होने का उत्सव मनाता है।
2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त को पड़ती है। नीचे नई दिल्ली के लिए शुक्ल तृतीया का सटीक समय, प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त, तीज व्रत पूजा विधि, व्रत कथा, तथा पर्व के केंद्र में स्थित हरियाली और झूले का अर्थ दिया गया है।
हरियाली तीज 2026 — एक दृष्टि में
पर्व दिवस
शनिवार, 15 अगस्त 2026
तिथि
शुक्ल तृतीया
तृतीया आरंभ
14 अगस्त, सायं 18:48
तृतीया समाप्त
15 अगस्त, सायं 17:30
पूजा मुहूर्त
15 अगस्त, ~05:54 – 09:07
व्रत रखती हैं
विवाहित व कुँवारी स्त्रियाँ
हरियाली तीज 2026 तिथि व पूजा मुहूर्त
शुक्ल तृतीया का समय और प्रातःकालीन अवधि
पूजा मुहूर्त
05:54 – 09:07
15 अगस्त, प्रातः (नई दिल्ली)
शुक्ल तृतीया
14 Aug 18:48 → 15 Aug 17:30
2026 में श्रावण की शुक्ल तृतीया 14 अगस्त सायं 18:48 से आरंभ होकर 15 अगस्त सायं 17:30 पर समाप्त होती है (नई दिल्ली)। चूँकि 15 की भोर में तृतीया विद्यमान रहती है, हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाती है। पूजा के लिए प्रातःकाल शुभ है — लगभग 05:54 से 09:07 के बीच — और बहुत सी स्त्रियाँ संध्या के प्रदोष काल में भी पूजा करती हैं। सटीक अवधि आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार बदलती है।
तीज व्रत पूजा विधि
तीज व्रत किस प्रकार रखा और शिव-पार्वती की पूजा की जाती है
स्त्रियाँ भोर से निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। वे स्नान कर हरे वस्त्र धारण करती हैं, मेहँदी लगाती हैं और हरी चूड़ियाँ तथा बिंदी पहनती हैं। शिव और पार्वती की प्रतिमाएँ, प्रायः मिट्टी या बालू से बनी, चौकी पर स्थापित कर रोली, अक्षत, पुष्प, फल, मिष्ठान्न से पूजी जाती हैं, और पार्वती को सिंदूर अर्पित किया जाता है। तीज की कथा पढ़ी जाती है, पार्वती से दांपत्य सुख की प्रार्थना की जाती है, और आरती की जाती है। वृक्षों पर सजे झूले बाँधे जाते हैं, तीज के गीत गाए जाते हैं, और स्त्रियाँ मिलकर उत्सव मनाती हैं। व्रत का पारण चंद्रदर्शन या संध्या पूजा के बाद, परिवार की परंपरा के अनुसार किया जाता है।
हरियाली तीज व्रत कथा
पार्वती की तपस्या और शिव से पुनर्मिलन
तीज की कथा स्मरण कराती है कि पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए अनेक जन्मों तक कठोर तपस्या की। एक कथन के अनुसार, उनके पिता उनका विवाह अन्यत्र करना चाहते थे, तब उनकी सखियाँ उन्हें वन में ले गईं — यही आगे चलकर हरतालिका नाम का मूल बना — जहाँ उन्होंने बालू का शिवलिंग बनाकर अखंड भक्ति से उसकी पूजा की। अंततः प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया। हरियाली तीज इसी मिलन का उत्सव है, और स्त्रियाँ उसी अटल भक्ति का आवाहन करते हुए अपने दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं।
हरियाली, झूला और विवाहित स्त्रियाँ
हरियाली तीज का महत्व
हरियाली — हरीतिमा — इस पर्व का नाम है, क्योंकि यह तब आता है जब सावन की वर्षा धरती को हरा कर देती है और ऋतु अपने चरम पर होती है। स्त्रियाँ हरा रंग धारण करती हैं, जो पार्वती का तथा उर्वरता और नवजीवन का रंग है, और वृक्षों पर बँधे झूलों पर झूलकर विरह और मिलन के गीत गाती हैं। विवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत पति की दीर्घायु और गृहस्थी की सुख-शांति के लिए है; कुँवारी कन्याओं के लिए योग्य वर की प्रार्थना। यदि आपके मन में विवाह हो, तो हमारा कुंडली मिलान साधन वैदिक गुण-मिलान प्रस्तुत करता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाली तीज 2026 की तिथि, मुहूर्त व व्रत
