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गुरु का नक्षत्र गोचर वार्षिक राशि परिवर्तन में और गहराई जोड़ता है। चूँकि गुरु एक राशि में लगभग 13 माह रहता है, इस बीच यह 3-4 नक्षत्रों से होकर गुज़रता है। हर नक्षत्र गुरु की कृपा को अपना रंग देता है — पुष्य नक्षत्र (गुरु की उच्च स्थिति) में गुरु परम शुभ माना जाता है, जबकि आर्द्रा में गुरु अधिक चुनौतीपूर्ण, परिवर्तनकारी ऊर्जा लाता है। गुरु के नक्षत्र का अनुसरण पूजा, यज्ञ और आध्यात्मिक दीक्षा के शुभ समय निर्धारण में बड़ा सहायक होता है।
नक्षत्र गोचर सारणी 2026
4 परिवर्तनपुनर्वसु (Punarvasu)
↩ वक्रीमिथुन राशि में · स्वामी: बृहस्पति · देवता: Aditi
13 अग 2025, 5:05 पूर्वाह्न → 18 जून 2026, 9:01 अपराह्न
💡 Includes retrograde period within this nakshatra
पुष्य (Pushya)
वर्तमानकर्क राशि में · स्वामी: शनि · देवता: Brihaspati
18 जून 2026, 9:01 अपराह्न → 19 अग 2026, 3:12 पूर्वाह्न
आश्लेषा (Ashlesha)
कर्क राशि में · स्वामी: बुध · देवता: Nagas
19 अग 2026, 3:12 पूर्वाह्न → 31 अक्टू 2026, 12:02 अपराह्न
मघा (Magha)
↩ वक्रीसिंह राशि में · स्वामी: केतु · देवता: Pitris
31 अक्टू 2026, 12:02 अपराह्न → 25 जन 2027, 1:31 पूर्वाह्न
💡 Includes retrograde period within this nakshatra
11 नव 2025 → 11 मार्च 2026
कर्क राशि में · 90.9° → 80.9°
13 दिस 2026 → 13 अप्रैल 2027
सिंह राशि में · 122.8° → 112.8°
नक्षत्र गोचर क्या है?
नक्षत्र 13°20' के भाग हैं — राशि से सूक्ष्म। मुहूर्त निर्णय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
