ग्रह गोचर (राशि परिवर्तन)

ग्रह भ्रमण — राशि चक्र में ग्रहों का संचरण

वैदिक ज्योतिष में गोचर से तात्पर्य है ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करना। यह राशि परिवर्तन जीवन के विभिन्न क्षेत्रों — स्वास्थ्य, करियर, विवाह, धन — पर गहरा प्रभाव डालता है। प्रत्येक ग्रह की गोचर अवधि भिन्न होती है।

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नवग्रह गोचर

प्रत्येक ग्रह के गोचर की अवधि, प्रभाव और महत्व जानें

Sun Transit - सूर्य गोचर

सूर्य गोचर

Sun Transit

🔄~1 माह प्रति राशि
Moon Transit - चंद्र गोचर

चंद्र गोचर

Moon Transit

🔄~2.25 दिन प्रति राशि
Mars Transit - मंगल गोचर

मंगल गोचर

Mars Transit

🔄~45 दिन प्रति राशि

राहु गोचर

Rahu Transit

🔄~18 माह प्रति राशि

शास्त्रीय संदर्भ

बृहत् पाराशर होर शास्त्र

"गोचरे ग्रहभुक्तिश्च फलदा सर्वदा भवेत्।
जन्मकुण्डल्यनुसारं गोचरः शुभदो भवेत्॥"

गोचर में ग्रहों की भुक्ति सदैव फल देने वाली होती है। जन्म कुंडली के अनुसार गोचर शुभ या अशुभ फल प्रदान करता है।

महर्षि पराशर

📖गोचर (Transit) को समझें

1.

गोचर में ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है — इसे "राशि परिवर्तन" या "संक्रमण" कहते हैं।

2.

गोचर फल जन्म कुंडली (चंद्र राशि) के आधार पर निर्धारित होता है — यही "गोचर फल" कहलाता है।

3.

शनि, गुरु, राहु-केतु जैसे धीमे ग्रहों का गोचर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है।

4.

चंद्र, सूर्य, बुध जैसे तेज़ ग्रहों का गोचर अल्पकालिक प्रभाव देता है — जैसे मूड, ऊर्जा।

5.

वैदिक ज्योतिष में "अष्टकवर्ग" पद्धति से गोचर के शुभ/अशुभ फल की गणना होती है।

6.

शनि का गोचर विशेष महत्वपूर्ण है — "साढ़े साती" और "ढैय्या" इसी से बनते हैं।

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