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शनि का नक्षत्र गोचर अपनी मंद गति के कारण प्रत्येक नक्षत्र में कई महीनों तक चलता है। जब शनि किसी नए नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो कर्म पाठों का स्वरूप सूक्ष्म रूप से बदल जाता है। पुष्य में शनि व्यवस्थित विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व लाता है, जबकि उत्तर भाद्रपद में आध्यात्मिक साधना को गहरा करता है। शनि एक नक्षत्र में लगभग 3-5 माह रहता है, इसीलिए हर नक्षत्र अवधि ढाई वर्ष के दीर्घ राशि गोचर में एक अलग अध्याय रचती है — जो व्यापारिक चक्र और न्यायिक मामलों के समय निर्धारण में नक्षत्र अनुसरण को अत्यंत मूल्यवान बनाती है।
नक्षत्र गोचर सारणी 2026
4 परिवर्तनपूर्वा भाद्रपद (Purva Bhadrapada)
↩ वक्रीमीन राशि में · स्वामी: बृहस्पति · देवता: Aja Ekapada
3 अक्टू 2025, 11:41 अपराह्न → 20 जन 2026, 10:52 पूर्वाह्न
💡 Includes retrograde period within this nakshatra
उत्तरा भाद्रपद (Uttara Bhadrapada)
वर्तमानमीन राशि में · स्वामी: शनि · देवता: Ahir Budhnya
20 जन 2026, 10:52 पूर्वाह्न → 17 मई 2026, 2:37 अपराह्न
रेवती (Revati)
↩ वक्रीमीन राशि में · स्वामी: बुध · देवता: Pushan
17 मई 2026, 2:37 अपराह्न → 9 अक्टू 2026, 8:51 अपराह्न
💡 Includes retrograde period within this nakshatra
उत्तरा भाद्रपद (Uttara Bhadrapada)
↩ वक्रीमीन राशि में · स्वामी: शनि · देवता: Ahir Budhnya
9 अक्टू 2026, 8:51 अपराह्न → 8 फर 2027, 7:51 पूर्वाह्न
💡 Includes retrograde period within this nakshatra
27 जुल 2026 → 11 दिस 2026
मीन राशि में · 350.5° → 343.7°
नक्षत्र गोचर क्या है?
नक्षत्र 13°20' के भाग हैं — राशि से सूक्ष्म। मुहूर्त निर्णय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
