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"जानें किस राशि और नक्षत्र में विराजमान हैं नवग्रह"
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु की सटीक राशि, नक्षत्र, डिग्री, वक्री और अस्त स्थिति — स्विस एफेमेरिस आधारित गणना।
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ग्रह स्थिति वैदिक ज्योतिष का एक मूलभूत पहलू है जो राशि चक्र में ग्रहों की वर्तमान स्थिति — राशि, नक्षत्र और सटीक डिग्री — को दर्शाता है। यह जानकारी कुंडली विश्लेषण, दैनिक भविष्यफल, और शुभ मुहूर्त निर्धारण के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक ग्रह किस राशि और नक्षत्र में है, इससे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर उसका प्रभाव समझा जा सकता है।
वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह (नवग्रह) होते हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। राहु-केतु छाया ग्रह हैं जो चंद्र-सौर ग्रहण बिंदुओं को दर्शाते हैं। प्रत्येक ग्रह जीवन के विशिष्ट पहलुओं पर प्रभाव रखता है।
12 राशियां (मेष से मीन) और 27 नक्षत्र (अश्विनी से रेवती) ज्योतिषीय गणना की नींव हैं। प्रत्येक राशि 30° की होती है और प्रत्येक नक्षत्र 13°20' का। ग्रहों की राशि और नक्षत्र स्थिति से उनके प्रभाव का पता चलता है।
जब कोई ग्रह पीछे की ओर चलता दिखे, तो उसे वक्री कहते हैं। वक्री ग्रहों का प्रभाव अधिक तीव्र माना जाता है और ये प्रायः देरी, पुनर्विचार या आंतरिक परिवर्तन लाते हैं। सूर्य और चंद्र को छोड़कर सभी ग्रह वक्री हो सकते हैं।
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत निकट आ जाए, तो वह अस्त हो जाता है। अस्त ग्रह कमज़ोर माने जाते हैं। प्रत्येक ग्रह की अलग अस्तगमन सीमा होती है - शुक्र 10°, बुध 14°, मंगल 17°, गुरु 11°, शनि 15°।
ग्रह स्थिति और ज्योतिष के बारे में सामान्य प्रश्न
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