विजय मुहूर्त दिन के उन शुभ समयों में से एक है जिनका पंचांग में अलग नाम है। पारंपरिक काल-गणना में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को पंद्रह बराबर भागों में बाँटा जाता है, जिन्हें मुहूर्त कहते हैं, और इनमें ग्यारहवाँ मुहूर्त ‘विजय’ कहलाता है। यह दोपहर बाद, अपराह्न (दोपहर बाद के पहर) के बीच में पड़ता है। परंपरा में इसे ऐसे कार्य शुरू करने के लिए अच्छा माना जाता है जिनमें सफलता चाहिए — नया व्यवसाय, कोई महत्वपूर्ण यात्रा, किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करना या उसे जमा करना, या किसी योजना का पहला क़दम।
चूँकि यह घड़ी का कोई तय घंटा नहीं, बल्कि दिन की अवधि का एक हिस्सा है, इसलिए पूरे देश के लिए इसका कोई एक समय नहीं होता। यह आपके अपने शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के हिसाब से शुरू और समाप्त होता है, और दिन छोटे-बड़े होने के साथ रोज़ थोड़ा खिसकता रहता है। इसे अक्सर अभिजित मुहूर्त से मिला दिया जाता है, पर ये दो अलग मुहूर्त हैं: अभिजित आठवाँ मुहूर्त है, जो स्थानीय मध्याह्न पर पड़ता है, जबकि विजय ग्यारहवाँ है — उससे तीन मुहूर्त, यानी दो से तीन घंटे, आगे।
विजय मुहूर्त — एक नज़र में
- अर्थ
- विजय अर्थात् जीत
- कौन-सा मुहूर्त
- दिन के 15 मुहूर्तों में ग्यारहवाँ
- दिन में कब
- दोपहर बाद, अपराह्न के बीच में
- अवधि
- दिन की अवधि ÷ 15: दिल्ली में लगभग 41–56 मिनट
- किस पर निर्भर
- आपके शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त
- इससे अलग
- अभिजित — आठवाँ मुहूर्त, स्थानीय मध्याह्न पर
इसे अक्सर ‘48 मिनट’ का क्यों कहा जाता है? जिस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक ठीक बारह घंटे हों, उस दिन उसका पंद्रहवाँ हिस्सा 48 मिनट होता है, इसलिए यही आँकड़ा दोहराया जाता है। पर ज़्यादातर दिनों में यह अवधि बारह घंटे से कम या ज़्यादा होती है: नई दिल्ली में एक मुहूर्त दिसंबर के अंत में लगभग 41 मिनट का और जून के अंत में लगभग 56 मिनट का होता है, और विजय मुहूर्त भी उसी के साथ घटता-बढ़ता है।
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हर खाना सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय का पंद्रहवाँ हिस्सा है, इसलिए गर्मियों में पूरी पट्टी लंबी हो जाती है और सर्दियों में छोटी। दसवें से बारहवें खाने तक का समय अपराह्न कहलाता है।
उदाहरण: दशहरा 2026, नई दिल्ली
एक वास्तविक दिन पर यही विधि, क़दम-दर-क़दम
नीचे मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 — दशहरे के दिन — नई दिल्ली की गणना दी गई है। सूर्योदय और सूर्यास्त खगोलीय गणना से सेकंड तक निकाले गए हैं।
- 1सूर्योदय और सूर्यास्तसुबह 6:25:03 · शाम 5:46:30
- 2दिन की अवधि (सूर्यास्त − सूर्योदय)11 घंटे 21 मिनट 27 सेकंड
- 3एक मुहूर्त (दिन की अवधि ÷ 15)45 मिनट 26 सेकंड
- 4आरंभ: सूर्योदय + 10 मुहूर्तसुबह 6:25:03 + 7 घंटे 34 मिनट 20 सेकंड = दोपहर 1:59
- 5समाप्ति: सूर्योदय + 11 मुहूर्तसुबह 6:25:03 + 8 घंटे 19 मिनट 46 सेकंड = दोपहर 2:45
विजय मुहूर्त
दोपहर 1:59 – 2:45
नई दिल्ली · मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 (दशहरा)
उसी दिन नई दिल्ली में अभिजित मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 बजे तक है, और मुंबई में — जहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त देर से होते हैं — विजय मुहूर्त दोपहर 2:19 से 3:06 बजे तक है। सभी परिणाम निकटतम मिनट तक पूर्णांकित हैं।
दशहरा 2026 — तिथि, अपराह्न का नियम और पूजाअपना विजय मुहूर्त कैसे निकालें
कोई भी शहर, कोई भी दिन — बस सूर्योदय और सूर्यास्त चाहिए
इसके लिए अपने शहर और तिथि के बस दो समय चाहिए — स्थानीय सूर्योदय और स्थानीय सूर्यास्त। सूर्यास्त में से सूर्योदय घटाकर दिन की अवधि निकालें और उसे 15 से भाग देकर एक मुहूर्त की लंबाई पाएँ। फिर सूर्योदय से गिनें: दस मुहूर्त पूरे होने पर विजय मुहूर्त शुरू होता है और ग्यारह पूरे होने पर समाप्त। ‘आज का पंचांग’ में आपके शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त दिया रहता है; वहीं से दोनों समय लेकर ऊपर के क़दम दोहराएँ। उत्तर हर जगह एक-सा नहीं होगा। पश्चिम के शहरों में घड़ी के हिसाब से सूर्य आम तौर पर देर से उगता और डूबता है, इसलिए उसी दिन वहाँ यह मुहूर्त देर से शुरू होता है; और हर शहर में यह समय ऋतुओं के साथ वर्ष भर खिसकता रहता है।
इसका प्रयोग कब और क्यों होता है
शुभ आरंभ, और अभिजित से इसका अंतर
विजय मुहूर्त उन शुरुआतों के लिए चुना जाता है जिनका महत्व अधिक हो — किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करना या उसे जमा करना, यात्रा पर निकलना, नया व्यवसाय शुरू करना, या किसी लंबी योजना का पहला ठोस क़दम उठाना। यह ख़ास तौर पर तब काम आता है जब मध्याह्न का अभिजित मुहूर्त बीत चुका हो या छूट गया हो, क्योंकि इससे दिन के उत्तरार्ध में भी शुभ आरंभ का अवसर मिल जाता है। दोनों को अलग-अलग समझें: अभिजित पंद्रह में आठवाँ मुहूर्त है और स्थानीय मध्याह्न पर पड़ता है, जबकि विजय ग्यारहवाँ है और दोपहर बाद आता है। एक सावधानी भी रखें: गुरुवार को राहु काल दिन के आठ भागों में छठा होता है, और हर गुरुवार विजय मुहूर्त पूरी तरह उसी के भीतर पड़ता है — इसलिए यदि आपका परिवार राहु काल में नया कार्य टालता है, तो उस दिन दोनों देख लें। यही शब्द विजयदशमी, यानी दशहरे, के नाम में भी है: परंपरा के अनुसार श्रीराम ने इसी विजय मुहूर्त में रावण पर चढ़ाई के लिए प्रस्थान किया था, और उस दिन इसे दोपहर का सबसे शुभ समय माना जाता है।
अपने शहर का आज का सूर्योदय और सूर्यास्त देखें
विजय मुहूर्त निकालने के लिए बस यही दो समय चाहिए। इन्हें ‘आज का पंचांग’ से लें और ऊपर के क़दम अपनाएँ, या मध्याह्न के शुभ समय के लिए अभिजित मुहूर्त देखें।
विजय मुहूर्त — आपके प्रश्न
अर्थ, समय और अभिजित से अंतर
