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पितृ पक्ष 2025 - तिथियां और समय

2025 में New Delhi के लिए पितृ पक्ष की सटीक तिथियां और समय

🕉️15 दिन
🙏पूर्वज पूजा
📅7 सितंबर 2025 - 21 सितंबर 2025
📍New Delhi
प्रारंभ: रविवार, 7 सितंबर 2025•समाप्त: रविवार, 21 सितंबर 2025

भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक - पितरों की पूजा और श्राद्ध की अवधि

वर्ष
2025

पितृ पक्ष प्रारंभ

पूर्णिमा

7सितंबर2025

रविवार

तिथि प्रारंभ

01:44

पितृ पक्ष समाप्त

अमावस्या

21सितंबर2025

रविवार

तिथि समाप्त

00:19

नोट: 16-day period for ancestor worship; Mahalaya Amavasya most important

पितृ पक्ष तिथि समयरेखा

15 दिनों की विस्तृत तिथियां

दिन 1

पूर्णिमा

🚩 प्रारंभ

📅 7 सितंबर 2025

रविवार

शुक्ल पक्ष • भाद्रपद

प्रारंभ01:44
समाप्त23:39

महत्व:

दिन 2

प्रतिपदा

⚡ मुख्य

📅 8 सितंबर 2025

सोमवार

कृष्ण पक्ष • आश्विन

प्रारंभ23:41
समाप्त21:13

महत्व:

दिन 3

अष्टमी

⚡ मुख्य

📅 14 सितंबर 2025

रविवार

कृष्ण पक्ष • आश्विन

प्रारंभ05:06
समाप्त03:07

महत्व:

दिन 4

नवमी

⚡ मुख्य

📅 15 सितंबर 2025

सोमवार

कृष्ण पक्ष • आश्विन

प्रारंभ03:08
समाप्त01:32

महत्व:

दिन 5

चतुर्दशी

⚡ मुख्य

📅 20 सितंबर 2025

शनिवार

कृष्ण पक्ष • आश्विन

प्रारंभ23:39
समाप्त00:18

महत्व:

दिन 6

अमावस्या

⭐ महालया

📅 21 सितंबर 2025

रविवार

कृष्ण पक्ष • आश्विन

प्रारंभ00:19
समाप्त01:25

महत्व:

मुख्य दिनों की व्याख्या

पूर्णिमा

पितृ पक्ष प्रारंभ

प्रतिपदा

श्राद्ध का पहला दिन

अष्टमी

अष्टमी तिथि पर मृत्यु

नवमी

विवाहित महिलाएं

चतुर्दशी

हिंसा/दुर्घटना से मृत्यु

⭐

महालया अमावस्या

सबसे महत्वपूर्ण - सभी पूर्वजों के लिए

पितृ पक्ष को समझें

पितृ पक्ष हिंदू परंपरा में सबसे पवित्र 15 दिनों की अवधि है जब पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या (महालया अमावस्या) पर समाप्त होता है।

⏱️ अवधि

15 दिन - भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक। इस दौरान प्रत्येक तिथि पर विशेष श्राद्ध किया जाता है।

हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस अवधि के दौरान पितर (पूर्वज) पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों का आशीर्वाद देने के लिए श्राद्ध और तर्पण स्वीकार करते हैं।

🙏 श्राद्ध विधि और अनुष्ठान

1. तर्पण (जल अर्पण)

पूर्वजों को जल, तिल और दूध चढ़ाया जाता है। यह सुबह जल्दी नदी, तालाब या घर में भी किया जा सकता है।

2. पिंडदान

चावल, जौ या आटे से बने पिंड (गोले) पूर्वजों को अर्पित किए जाते हैं, प्रत्येक तीन पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

3. ब्राह्मण भोजन

ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। वे पूर्वजों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

4. दान

वस्त्र, अनाज, दक्षिणा और खाद्य पदार्थों का दान करना शुभ माना जाता है।

⚠️ पितृ पक्ष में वर्जित कार्य

💍 विवाह और सगाई
शुभ कार्य और उत्सव टाले जाते हैं।
🏠 नया घर खरीदना / गृह प्रवेश
संपत्ति से जुड़े काम नहीं किए जाते।
🚗 नया वाहन खरीदना
महंगी खरीदारी टालें।
🏢 नया व्यवसाय शुरू करना
नए उपक्रम की शुरुआत नहीं करें।
🎉 उत्सव और पार्टियां
खुशी के समारोह स्थगित करें।
✂️ बाल कटवाना / दाढ़ी बनवाना
कुछ परिवारों में इससे बचा जाता है।

नोट: दैनिक कार्य, आध्यात्मिक साधना और कार्यालय का काम सामान्य रूप से चल सकता है। केवल शुभ और महत्वपूर्ण कार्य टाले जाते हैं।

🌟 मुख्य दिनों का महत्व

पूर्णिमा - पितृ पक्ष प्रारंभ

15 दिनों की अवधि की शुरुआत। पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं।

प्रतिपदा - श्राद्ध का पहला दिन

जिन पूर्वजों की मृत्यु प्रतिपदा तिथि पर हुई, उनका श्राद्ध।

अष्टमी - विशेष मृत्यु तिथि

अष्टमी को मरने वाले पूर्वजों के लिए श्राद्ध का दिन।

नवमी - विवाहित महिलाओं के लिए

नवमी को मरने वाली विवाहित महिलाओं का श्राद्ध।

चतुर्दशी - हिंसा/दुर्घटना से मृत्यु

अप्राकृतिक मृत्यु वाले पूर्वजों के लिए विशेष दिन।

⭐

महालया अमावस्या - सबसे महत्वपूर्ण

सभी पूर्वजों के लिए सार्वभौमिक श्राद्ध। यदि आप कोई अन्य दिन याद नहीं कर सकते, तो इस दिन अवश्य श्राद्ध करें।

📋 नियम और पालन

✅ क्या करें

  • प्रतिदिन स्नान और स्वच्छता बनाए रखें
  • सात्विक भोजन करें (शाकाहारी)
  • ब्राह्मणों और गरीबों को दान करें
  • पितरों को याद करें और प्रार्थना करें
  • काले तिल और चावल का उपयोग करें

❌ क्या न करें

  • मांस, मछली, अंडे न खाएं
  • प्याज, लहसुन से बचें (कुछ परंपराओं में)
  • नए कपड़े न खरीदें
  • शराब और तंबाकू का सेवन न करें
  • अनावश्यक झगड़े और क्रोध से बचें

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्रत व त्योहार

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अमावस्या तिथियां
अमावस्या पालन
एकादशी तिथियां
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पूर्णिमा तिथियां
पूर्णिमा पालन

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