पितृ पक्ष प्रारंभ
पूर्णिमा
रविवार
01:44
पितृ पक्ष समाप्त
अमावस्या
रविवार
00:19
नोट: 16-day period for ancestor worship; Mahalaya Amavasya most important
पितृ पक्ष तिथि समयरेखा
15 दिनों की विस्तृत तिथियां
पूर्णिमा
📅 7 सितंबर 2025
रविवार
शुक्ल पक्ष • भाद्रपद
महत्व:
प्रतिपदा
📅 8 सितंबर 2025
सोमवार
कृष्ण पक्ष • आश्विन
महत्व:
अष्टमी
📅 14 सितंबर 2025
रविवार
कृष्ण पक्ष • आश्विन
महत्व:
नवमी
📅 15 सितंबर 2025
सोमवार
कृष्ण पक्ष • आश्विन
महत्व:
चतुर्दशी
📅 20 सितंबर 2025
शनिवार
कृष्ण पक्ष • आश्विन
महत्व:
अमावस्या
📅 21 सितंबर 2025
रविवार
कृष्ण पक्ष • आश्विन
महत्व:
मुख्य दिनों की व्याख्या
पूर्णिमा
पितृ पक्ष प्रारंभ
प्रतिपदा
श्राद्ध का पहला दिन
अष्टमी
अष्टमी तिथि पर मृत्यु
नवमी
विवाहित महिलाएं
चतुर्दशी
हिंसा/दुर्घटना से मृत्यु
महालया अमावस्या
सबसे महत्वपूर्ण - सभी पूर्वजों के लिए
पितृ पक्ष को समझें
पितृ पक्ष हिंदू परंपरा में सबसे पवित्र 15 दिनों की अवधि है जब पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या (महालया अमावस्या) पर समाप्त होता है।
⏱️ अवधि
15 दिन - भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक। इस दौरान प्रत्येक तिथि पर विशेष श्राद्ध किया जाता है।
हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस अवधि के दौरान पितर (पूर्वज) पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों का आशीर्वाद देने के लिए श्राद्ध और तर्पण स्वीकार करते हैं।
🙏 श्राद्ध विधि और अनुष्ठान
1. तर्पण (जल अर्पण)
पूर्वजों को जल, तिल और दूध चढ़ाया जाता है। यह सुबह जल्दी नदी, तालाब या घर में भी किया जा सकता है।
2. पिंडदान
चावल, जौ या आटे से बने पिंड (गोले) पूर्वजों को अर्पित किए जाते हैं, प्रत्येक तीन पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
3. ब्राह्मण भोजन
ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। वे पूर्वजों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
4. दान
वस्त्र, अनाज, दक्षिणा और खाद्य पदार्थों का दान करना शुभ माना जाता है।
⚠️ पितृ पक्ष में वर्जित कार्य
नोट: दैनिक कार्य, आध्यात्मिक साधना और कार्यालय का काम सामान्य रूप से चल सकता है। केवल शुभ और महत्वपूर्ण कार्य टाले जाते हैं।
🌟 मुख्य दिनों का महत्व
पूर्णिमा - पितृ पक्ष प्रारंभ
15 दिनों की अवधि की शुरुआत। पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं।
प्रतिपदा - श्राद्ध का पहला दिन
जिन पूर्वजों की मृत्यु प्रतिपदा तिथि पर हुई, उनका श्राद्ध।
अष्टमी - विशेष मृत्यु तिथि
अष्टमी को मरने वाले पूर्वजों के लिए श्राद्ध का दिन।
नवमी - विवाहित महिलाओं के लिए
नवमी को मरने वाली विवाहित महिलाओं का श्राद्ध।
चतुर्दशी - हिंसा/दुर्घटना से मृत्यु
अप्राकृतिक मृत्यु वाले पूर्वजों के लिए विशेष दिन।
महालया अमावस्या - सबसे महत्वपूर्ण
सभी पूर्वजों के लिए सार्वभौमिक श्राद्ध। यदि आप कोई अन्य दिन याद नहीं कर सकते, तो इस दिन अवश्य श्राद्ध करें।
📋 नियम और पालन
✅ क्या करें
- प्रतिदिन स्नान और स्वच्छता बनाए रखें
- सात्विक भोजन करें (शाकाहारी)
- ब्राह्मणों और गरीबों को दान करें
- पितरों को याद करें और प्रार्थना करें
- काले तिल और चावल का उपयोग करें
❌ क्या न करें
- मांस, मछली, अंडे न खाएं
- प्याज, लहसुन से बचें (कुछ परंपराओं में)
- नए कपड़े न खरीदें
- शराब और तंबाकू का सेवन न करें
- अनावश्यक झगड़े और क्रोध से बचें