शनि अस्त 2026 - तिथियां और समय

ग्रह अस्त

"जब न्याय और कर्म का कारक ग्रह सूर्य के तेज में लुप्त हो जाता है।"

New Delhi के लिए शनि अस्त (Saturn Combustion) 2026 की सटीक तिथियां। वैदिक ज्योतिष में, यह चरण अनुशासन, कर्म और करियर पर शनि के प्रभाव में अस्थायी कमी का प्रतीक है। जानें कि इन समयों में अपने मुहूर्तों और निर्णयों को कैसे संभालें।

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वर्ष
2026

2026 में शनि अस्त तिथियां और समय

अवधि 1

अस्त आरंभ

शनि सूर्य के निकट

8मार्च2026

रविवार

राशि

Pisces (Meena)

8.37°

स्थानीय समय

15:06 UTC+5:30

अस्त समाप्त

शनि सूर्य से दूर

12अप्रैल2026

रविवार

राशि

Pisces (Meena)

12.66°

स्थानीय समय

05:38 UTC+5:30

⏱️अवधि: 35 दिन

प्राचीन ग्रंथ से

Brihat Parashara Hora Shastra

अस्तं गते तु सौम्ये च क्रूरे वा सूर्यसन्निधौ। तद्बलं हीयते सर्वं फलं नैव प्रदीयते॥

astaṃ gate tu saumye ca krūre vā sūryasannidhau tadbalaṃ hīyate sarvaṃ phalaṃ naiva pradīyate

जब शुभ या क्रूर ग्रह सूर्य के समीप अस्त हो जाता है, तो उसका सम्पूर्ण बल क्षीण हो जाता है और वह अपने फल नहीं दे पाता।

महर्षि पराशर

शनि अस्त कैसे होता है - खगोलीय व्याख्या

शनि सूर्य के चारों ओर लगभग 29.5 वर्षों में एक चक्कर लगाता है और पृथ्वी से देखने पर सूर्य के सापेक्ष विभिन्न स्थितियों में होता है।

जब शनि सूर्य के 15 डिग्री के भीतर आ जाता है, तो उसे अस्त माना जाता है। इस निकटता के कारण शनि सूर्य की चमक में खो जाता है और दृश्य रूप से दिखाई नहीं देता।

वैदिक ज्योतिष में, अस्त शनि को कमजोर माना जाता है। यह अनुशासन, दीर्घायु और कर्म को प्रभावित करता है।

आज कैसे गणना की जाती है:

सूर्य-शनि कोणीय दूरी ≤ 15°

NASA JPL DE440/441 + Lahiri Ayanāṃśa

शनि अस्त पैटर्न और आवृत्ति

साल 2026 में शनि अस्त की 1 अवधि है।

शनि की धीमी गति के कारण, शनि अस्त की अवधि आमतौर पर 10-15 दिनों तक रहती है। शनि का लंबा परिक्रमण काल होने के कारण, प्रत्येक वर्ष में सामान्यतः एक शनि अस्त अवधि होती है।

ज्योतिषीय प्रभाव

  • कर्म और अनुशासन में बाधा
  • दीर्घायु और स्वास्थ्य में चुनौतियां
  • सेवा और नौकरी में समस्याएं
  • मानसिक तनाव बढ़ना
  • वृद्धजन संबंधों में तनाव

उपाय

  • महत्वपूर्ण दीर्घकालिक निर्णयों से बचें
  • शनि मंत्र का जाप करें (ॐ शं शनैश्चराय नमः)
  • नीली वस्तुएं और तिल दान करें
  • शनिवार को व्रत रखें
  • रुद्राक्ष माला पहनें