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दशम भाव में चंद्र

चंद्र जब दशम भाव में बैठता है, तो आपका कार्यक्षेत्र लोगों के सामने आ जाता है — सेवा, भोजन, शिक्षण, यात्रा या जल से जुड़ा काम। प्रतिष्ठा यहाँ इस बात से बनती है कि आपके साथ दूसरों को कैसा लगता है, और मन के साथ वह बदलती भी रहती है।

दशम भाव में चंद्र ऐसी आजीविका देता है जो बल से नहीं, संपर्क से चलती है। पहचान आपके व्यवहार, संवेदनशीलता और अपने आसपास बनाए गए माहौल से तय होती है, और कार्यक्षेत्र एक से अधिक बार दिशा बदल सकता है। इसे लोकप्रियता कहा जाएगा या बेचैनी, इसका उत्तर आपके लग्न, चंद्र की राशि, उसकी अवस्था और पक्ष में है — इन सबकी निःशुल्क गणना नीचे दी गई है।

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दशम भाव में चंद्र का अर्थ

दशम भाव कर्म का सबसे दृश्यमान रूप है — काम, पद, अधिकार और वह पहचान जो अपरिचित लोग आपको सौंप देते हैं। यहाँ बैठा चंद्र इस भूमिका को व्यक्तिगत बना देता है। आप केवल परिश्रम या उत्पादन के बल पर आगे नहीं बढ़ते; उन्नति इसलिए मिलती है कि लोग आपके पास सहज आते हैं, कि आप किसी जगह का मिज़ाज तुरंत भाँप लेते हैं और उसी के अनुसार ढल जाते हैं, और कि आपके रहते माहौल बेहतर हो जाता है। इस स्थिति के अनुकूल आजीविकाएँ प्रायः लोगों के संपर्क या लोगों की आवश्यकता पर टिकी होती हैं — आतिथ्य, भोजन, परिचर्या और स्वास्थ्य-सेवा, शिक्षण, परामर्श, लोकसेवा, होटल और पर्यटन, जल या तरल पदार्थों से जुड़ा कार्य, तथा जनता के सामने निभाया जाने वाला कोई भी दायित्व। चंद्र मन का कारक है, इसलिए आपका काम और आपकी मनोदशा आपस में बँधे रहते हैं। जिस दिन मन ठहरा रहता है, आपकी कार्यकुशलता असाधारण होती है; जिस दिन नहीं, उसकी ख़बर पूरे कार्यालय तक पहुँच जाती है। प्रतिष्ठा यहाँ भावनात्मक पूँजी है — धीरे-धीरे अर्जित होती है और शीघ्र ख़र्च हो जाती है।

दशम से चंद्र अपनी एकमात्र पूर्ण दृष्टि चतुर्थ भाव पर डालता है — घर, माता, मानसिक शांति, भूमि और वाहन। विशेष पूर्ण दृष्टियाँ केवल मंगल, गुरु और शनि को, तथा इस परंपरा की मान्यता के अनुसार राहु-केतु को प्राप्त हैं; चंद्र को ऐसी कोई विशेष दृष्टि प्राप्त नहीं; अपने से सप्तम भाव पर पड़ने वाली उसकी एकमात्र पूर्ण दृष्टि सामान्य कोटि की है, विशेष नहीं। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र श्रेणीबद्ध आंशिक दृष्टि भी बताता है, जो चंद्र से गिनी जाती है — चंद्र से चतुर्थ और अष्टम पर तीन-चौथाई, अर्थात् आपके प्रथम और पंचम भाव पर; पंचम और नवम पर आधी, यानी द्वितीय और षष्ठ भाव पर; तथा तृतीय और दशम पर एक-चौथाई। यहाँ गृहस्थी और कार्यक्षेत्र एक ही धुरी पर रहते हैं — भीतर का माहौल दफ़्तर तक चला जाता है, काम का दबाव घर लौट आता है, और निवास बदलने के साथ आजीविका भी प्रायः बदल जाती है। दशम वही स्थान है जहाँ चंद्र को दिग्बल नहीं मिलता — उसका दिग्बल चतुर्थ भाव में है — इसलिए यह आजीविका बल से नहीं, संपर्क और अनुकूलन से आगे बढ़ती है।

ऊपर कही हर बात राशि के अनुसार बदलती है। तुला लग्न में चंद्र कर्क में आता है — अपनी ही राशि में और दशमेश होकर दशम में; यह इस स्थिति का सबसे सुस्थिर रूप है, जहाँ सार्वजनिक भूमिका कोई पड़ाव नहीं, जीवन भर का काम बन जाती है। सिंह लग्न में वही चंद्र वृषभ में उच्च का होता है, पर द्वादश भाव का स्वामी भी; तब आजीविका विदेश, पर्दे के पीछे के कार्य या किसी संस्था की सेवा से जुड़ सकती है — अंश भी देखें, क्योंकि वृषभ में 3 अंश परम उच्च का बिंदु है और 4 अंश से आगे मूलत्रिकोण। कुंभ लग्न में चंद्र वृश्चिक में नीच का और षष्ठेश होता है; महत्वाकांक्षा तब भी रहती है, पर सार्वजनिक जीवन की मानसिक क़ीमत अधिक चुकानी पड़ती है और स्थिरता अर्जित करनी होती है। कन्या, वृश्चिक और धनु लग्न में चंद्र मित्र राशि में रहता है, जबकि मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, मकर और मीन लग्न में सम राशि में। पक्ष का महत्व राशि से कम नहीं — शुक्ल पक्ष का चंद्र इस भूमिका को भर देता है, कृष्ण पक्ष का किसी शुभ ग्रह की युति या दृष्टि माँगता है, जिसे शास्त्रीय टीका वास्तविक बचाव मानती है।

भाव-स्थिति राशि कुंडली के अनुसार है। चलित कुंडली में भाव लग्न के अंश से नापे जाते हैं, इसलिए अपनी राशि के आरंभिक या अंतिम अंशों में बैठा चंद्र नवम या एकादश भाव में आ सकता है — यदि आपका चंद्र किसी संधि के पास हो, तो इस पृष्ठ को अंतिम मानने से पहले दोनों कुंडलियाँ मिला लें।

शुभ या अशुभ? क्या तय करता है

स्वतः न शुभ, न अशुभ। दशम भाव का चंद्र पहले आपको प्रिय बनाता है, शक्तिशाली बाद में — और जिस भी काम में लोग आपको चुनते हैं, वहाँ यही सबसे बड़ी बढ़त है। परिणाम अनुकूल तब रहता है जब चंद्र वृषभ में उच्च का हो, कर्क में स्वराशि का, शुक्ल पक्ष का, अथवा किसी शुभ ग्रह की युति या दृष्टि में। परीक्षा तब कड़ी होती है जब वह वृश्चिक में नीच का हो, कृष्ण पक्ष में सूर्य के निकट हो, या पाप ग्रहों के बीच दबा हो — ऐसे में प्रतिष्ठा ऊपर-नीचे होती रहती है और कार्यक्षेत्र बार-बार नए सिरे से आरंभ करना पड़ता है। संक्षेप में कहें तो — दृश्यमान, लोगों पर टिकी आजीविका, जिसकी दिशा औसत से अधिक बदलती है। यह प्रवृत्ति है, निर्णय नहीं, और पूरी कुंडली इसे संशोधित करती है।

यह स्थिति आपके कार्यजीवन में क्या करती है

लोकप्रियता ही व्यावसायिक पूँजी

यहाँ उन्नति तकनीकी से पहले सामाजिक होती है। ग्राहक को याद रहता है कि बैठक कैसी लगी, कनिष्ठ सहयोगी इस कारण टिके रहते हैं कि आपने उनकी कोई बात ध्यान से सुनी, और नियोक्ता आपको इसलिए बनाए रखता है कि आपके होने से दल शांत रहता है। यह वास्तविक संपत्ति है और चक्रवृद्धि की तरह बढ़ती जाती है — सिफ़ारिश, दोबारा मिलने वाला काम और मुँहज़बानी प्रशंसा किसी औपचारिक योग्यता से अधिक फल देते हैं। क़ीमत यह चुकानी पड़ती है कि आप हमेशा खुले में रहते हैं। मन का कारक चंद्र ही है, इसलिए निजी उदासी सार्वजनिक होने में देर नहीं लगाती और आलोचना काम पर नहीं, अपने ऊपर लगती है। दो आदतें इस पूँजी की रक्षा करती हैं — जो आप वास्तव में पूरा करते हैं उसका लिखित लेखा रखें, ताकि आपका योगदान केवल महसूस न हो, दिखे भी; और बड़े निर्णय भारी दिन पर नहीं, संतुलित दिन पर लें। जो प्रतिष्ठा आत्मीयता पर बनी हो, उसके नीचे निरंतरता का धरातल चाहिए।

दिशा बदलें, प्रतिष्ठा बनी रहे

जिनकी कुंडली में यह स्थिति होती है, उनमें से बहुत कम तीस वर्ष तक एक ही पदनाम पर टिकते हैं। चंद्र सब ग्रहों से तेज़ चलता है और कभी वक्री नहीं होता; दशम में यही चपलता ऐसे कार्यक्षेत्र के रूप में दिखती है जो स्वयं को बार-बार नया करता है — विषय बदलना, पढ़ाई की ओर लौटना, नौकरी छोड़कर अपना उद्यम खड़ा करना। ठीक से सँभालें तो यह विस्तार है — लोगों को साधने का वही कौशल हर नए परिवेश में काम आता है, और सुनने वाले भी साथ चले आते हैं। न सँभालें तो जीवनवृत्त बिखर जाता है और कोई परत दूसरी पर नहीं चढ़ती। कसौटी यही है कि हर परिवर्तन में एक सूत्र बचा रहे। उस सूत्र को नाम दें — सेवा, शिक्षण, आतिथ्य, परिचर्या — और पदनाम उसके चारों ओर बदलते रहें। शुक्ल पक्ष का चंद्र इन मोड़ों को शीघ्र थाम लेता है; कृष्ण पक्ष का अधिक समय और अधिक ठोस बचत माँगता है।

घर और कार्यस्थल एक ही धुरी पर

चतुर्थ भाव पर पड़ने वाली दृष्टि आपकी आजीविका को गृहस्थी से बाँध देती है, और यह बंधन दोनों ओर से काम करता है। घर व्यवस्थित हो तो कामकाज सधता है; कार्यक्षेत्र अस्त-व्यस्त हो तो वह आपके साथ दरवाज़े के भीतर चला आता है। ऐसी कुंडलियों में प्रायः घर से चलने वाला काम, पारिवारिक व्यवसाय और भूमि-भवन से जुड़ी आमदनी दिखाई देती है, या ऐसी माता जिनकी अपनी आजीविका ने आपके चुनावों को दिशा दी हो — चंद्र चतुर्थ भाव का तथा माता का कारक है, इसलिए आपकी महत्वाकांक्षा पर उनका असर प्रायः छोटा नहीं होता। व्यावहारिक सलाह सादी है, पर खरी उतरती है — नींद और भोजन के समय की रक्षा करें, घर का एक कोना या दिन का एक घंटा ऐसा रखें जहाँ काम प्रवेश न करे, और घर की व्यवस्था को निजी मामला नहीं, व्यावसायिक आधार मानें। चंद्र का दिग्बल चतुर्थ भाव में है; घर सँभलता है तो दशम भाव को बल मिलता है।

लग्न अनुसार: आपकी पंक्ति

यहाँ चंद्र किस राशि में है और किन भावों का स्वामी है, यह आपके लग्न से बदलता है। आपकी पंक्ति चिह्नित है।

ये सामान्य प्रवृत्तियाँ हैं, पूरी कुंडली पर निर्भर — शैक्षिक, भविष्यवाणी नहीं, और व्यक्तिगत परामर्श का विकल्प नहीं।

लग्नदशम में चंद्र की राशिअवस्थाचंद्र के स्वामित्व वाले भाव
मेषमकरसम (शनि)चतुर्थ
वृषभकुंभसम (शनि)तृतीय
मिथुनमीनसम (गुरु)द्वितीय
कर्कमेषसम (मंगल)प्रथम
सिंहवृषभउच्चद्वादश
कन्यामिथुनमित्र राशि (बुध)एकादश
तुलाकर्कस्वगृहीदशम
वृश्चिकसिंहमित्र राशि (सूर्य)नवम
धनुकन्यामित्र राशि (बुध)अष्टम
मकरतुलासम (शुक्र)सप्तम
कुंभवृश्चिकनीचषष्ठ
मीनधनुसम (गुरु)पंचम

यहाँ आपके चंद्र की अवस्था और गति

भावों में चंद्र— वृषभ में उच्च का या कर्क में स्वराशि का होकर वह ऐसी सार्वजनिक भूमिका देता है जिस पर लोग भरोसा करते हैं और जो वर्षों अपना रूप बनाए रखती है; वृश्चिक में नीच का हो तो वही दृश्यता अधिक मानसिक व्यय और बार-बार नई शुरुआत के साथ आती है। अवस्था को पक्ष के साथ पढ़ना आवश्यक है, क्योंकि पक्षबल स्वयं षड्बल का अंग है — कृष्ण पक्ष का, सूर्य के निकट बैठा चंद्र इस स्थिति का सबसे क्षीण रूप है, और शास्त्रीय टीका शुभ ग्रह की युति या दृष्टि को सच्ची रक्षा मानती है। चंद्र कभी वक्री नहीं होता, पर शास्त्रीय अस्त-अंशों के अनुसार सूर्य से 12 अंश के भीतर वह अस्त माना जाता है — अर्थात् अमावस्या के आसपास का भाग। इससे आगे राशि, संगति और चतुर्थ भाव पर पड़ने वाली दृष्टि ही अधिकांश बातें तय करती हैं।

अन्य भावों में चंद्र

भावों में चंद्र — सभी 12 भाव

इस स्थिति के उपाय

ये पारंपरिक उपाय केवल शैक्षिक और सांस्कृतिक जानकारी के रूप में दिए गए हैं; ये चिकित्सकीय, व्यावसायिक या आर्थिक परामर्श का विकल्प नहीं हैं और किसी परिणाम का वचन नहीं देते। दोनों का लक्ष्य वही है जो यह भाव माँगता है — सार्वजनिक भूमिका के पीछे एक स्थिर मन। यहाँ किसी रत्न की सलाह नहीं दी जा रही।

घर सँभालें, कार्यक्षेत्र सधेगा

दशम से चंद्र की एकमात्र पूर्ण दृष्टि चतुर्थ भाव पर जाती है, इसलिए कार्यजीवन का सबसे सीधा सहारा दफ़्तर में नहीं, घर में है। सोने और भोजन के समय नियत रखें, क्योंकि इस स्थिति का असली साधन वही मन है जिसे विश्राम और पोषण गढ़ते हैं। जहाँ संभव हो, माता या परिवार की किसी वरिष्ठ स्त्री की साधारण, व्यावहारिक सेवा करें — शास्त्र चंद्र को सीधे माता से जोड़ते हैं। सोमवार चंद्र का वार है; उस दिन जल या दूध अर्पित करना इसी भावना का पारंपरिक रूप है। इसे किसी वादे से नहीं, इस बात से परखें कि आपका सप्ताह पहले से कम उथल-पुथल भरा लगता है या नहीं। यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य से दी गई है।

सार्वजनिक भूमिका को सेवा से जोड़ें

यह स्थिति प्रतिष्ठा लोगों से पाती है, इसलिए इसके अनुकूल उपाय कार्यक्षेत्र से अलग नहीं, उसी के भीतर किया गया परोपकार है। वर्ष में कम से कम एक व्यक्ति को बिना कहे मार्गदर्शन दें। अन्न से जुड़ा दान करें — चंद्र भोजन और पोषण का कारक है, और सोमवार को चावल, दूध या श्वेत वस्त्र देना इसी का शास्त्रीय रूप है। चंद्र का बीज मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः” सोमवार प्रातः जपना इसके साथ प्रचलित है। दान को चर्चा से दूर रखें; जो प्रतिष्ठा सद्भाव पर टिकी हो, उसका प्रचार उसे ही क्षीण कर देता है। ये पारंपरिक उपाय केवल शैक्षिक जानकारी हैं, किसी व्यावसायिक परिणाम का वचन नहीं।

ये उपाय केवल शैक्षिक उद्देश्य से दिए गए हैं। मोती चंद्रमा का पारंपरिक रत्न है, पर रत्न प्रबल प्रभाव डालते हैं और परंपरा में भी इनके प्रति सावधानी बरती जाती है — पूर्ण कुंडली विश्लेषण के बिना इसे कभी धारण न करें। हर उपाय को श्रद्धा से किया गया सहायक अभ्यास मानें, निश्चित फल देने वाला साधन नहीं।

चंद्र के सभी उपाय चंद्र मुख्य पृष्ठ पर

गोचर का चंद्र बनाम जन्मकालीन चंद्र

तीन बातों को अलग रखें। यह पृष्ठ जन्मकालीन चंद्र की बात करता है — जन्म कुंडली के दशम भाव में स्थित चंद्र, जो आजीविका और सार्वजनिक छवि की आजीवन प्रवृत्ति बताता है। गोचर का चंद्र इससे भिन्न है — वह एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है और सारा राशिचक्र लगभग 27.3 दिन में पूरा करता है, इसलिए प्रत्येक मास थोड़े ही समय के लिए वह आपकी जन्म राशि से दशम में आता है; वे दिन किसी प्रस्तुति, आरंभ या कठिन बातचीत के लिए उपयोगी होते हैं, इससे अधिक नहीं। तीसरी बात चंद्र की महादशा है, जो विंशोत्तरी पद्धति में 10 वर्ष चलती है और तभी इस स्थिति के विषय वास्तव में परिपक्व होते हैं; आप उसमें कहाँ खड़े हैं, यह दशा-समयरेखा दिखाती है।

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सामान्य प्रश्न

सार्वजनिक आजीविका, बदलती दिशा और प्रतिष्ठा से जुड़े वे प्रश्न जो पाठक प्रायः पूछते हैं।

Q: क्या दशम भाव का चंद्र आजीविका के लिए शुभ है?

दृश्यता और ऐसे हर काम के लिए प्रायः शुभ जिसमें लोग आपको चुनते हैं; किसी एक अटूट कार्यरेखा के लिए उतना नहीं। यह स्थिति जनसंपर्क वाली आजीविका देती है — परिचर्या, भोजन, आतिथ्य, शिक्षण, स्वास्थ्य-सेवा, यात्रा और आम जनता से जुड़ा कार्य — जहाँ प्रतिष्ठा इस पर टिकी होती है कि आपके साथ दूसरों को कैसा अनुभव होता है। साथ ही दिशा बदलती रहती है। बल राशि पर निर्भर करता है — कर्क में स्वराशि और वृषभ में उच्च सबसे प्रबल स्थितियाँ हैं, वृश्चिक में नीच सबसे कठिन, और शुक्ल या कृष्ण पक्ष इन सबको घटाता-बढ़ाता है।

Q: दशम भाव का चंद्र किन व्यवसायों के अनुकूल है?

उन कामों के, जिनका सीधा वास्ता लोगों से पड़ता है। चंद्र के शास्त्रीय कारकत्व भोजन और तरल पदार्थ, परिचर्या और स्वास्थ्य-सेवा, आतिथ्य और होटल, शिक्षण और परामर्श, यात्रा तथा जल से जुड़े कार्यों की ओर संकेत करते हैं, और साथ ही जनता के सामने निभाई जाने वाली भूमिकाओं की ओर; स्त्रियों तथा बच्चों से जुड़े कार्यक्षेत्र भी बार-बार दिखते हैं। पदनाम से अधिक प्रवृत्ति महत्वपूर्ण है — जहाँ सफलता इस बात से नापी जाती है कि लोग आपसे कैसे जुड़ते हैं, वहाँ आप अच्छा करते हैं; जहाँ केवल अकेले का उत्पादन गिना जाता है, वहाँ उतना नहीं। दशमांश वर्ग कुंडली इस दायरे को और स्पष्ट कर देती है।

Q: क्या दशम भाव का चंद्र प्रसिद्धि देता है?

यह आपको परिचित बनाता है, जो प्रसिद्धि से भिन्न बात है। यहाँ लोकप्रियता स्थानीय और संबंध-आधारित होती है — आपका क्षेत्र, आपके ग्राहक, आपका परिवेश — व्यापक जनसमूह नहीं; “चंद्र जनता का कारक है”, यह बात मुख्यतः मेदिनी ज्योतिष — राष्ट्र और समाज के फलादेश — से आई है, जन्म कुंडली के कारकत्व से नहीं। व्यापक पहचान के लिए और सहयोग चाहिए — बलवान दशमेश, केंद्र में शुभ ग्रह और सुदृढ़ दशमांश। यह स्थिति निश्चित रूप से जो देती है, वह ऐसी उपस्थिति है जिसे लोग स्नेह से याद रखते हैं।

Q: चंद्र दशम भाव में हो तो कार्यक्षेत्र बार-बार क्यों बदलता है?

क्योंकि चंद्र मन का कारक है और सब ग्रहों में सबसे तेज़ चलता है, तथा दशम वही एक स्थान है जहाँ उसे दिग्बल नहीं मिलता — उसका दिग्बल चतुर्थ भाव में है। इसलिए यह आजीविका बल से नहीं, अनुकूलन से आगे बढ़ती है, और अनुकूलन बाहर से परिवर्तन जैसा दिखता है। यदि हर मोड़ पर एक सूत्र बना रहे तो कुछ व्यर्थ नहीं जाता। शुक्ल पक्ष का चंद्र प्रायः शीघ्र ठहर जाता है; कृष्ण पक्ष का, अथवा शनि, मंगल या राहु से पीड़ित चंद्र यह अस्थिर अवधि लंबी कर देता है।

Q: क्या दशम भाव का चंद्र कोई विशेष योग बनाता है?

पंच महापुरुष योग नहीं। यह प्रश्न यहाँ इसलिए उठता है कि दशम स्वयं केंद्र है और वे पाँचों योग केंद्र से ही गिने जाते हैं — पर केवल मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि के लिए, जब वे लग्न से केंद्र में अपनी अथवा उच्च राशि में हों; चंद्र कितना भी सुस्थित हो, इनमें से एक भी नहीं बनाता। चंद्र से जुड़े योग अवश्य लागू होते हैं, और दशम के चंद्र पर वे आपकी कुंडली के निश्चित भावों पर आ बैठते हैं — चंद्र से द्वितीय में, अर्थात् आपके एकादश भाव में, सूर्य के अतिरिक्त कोई ग्रह हो तो सुनफा; चंद्र से द्वादश में, यानी आपके नवम भाव में, हो तो अनफा; और दोनों ओर ग्रह हों तो दुरुधरा। गजकेसरी के लिए बृहत् पाराशर होरा शास्त्र गुरु का लग्न या चंद्र से केंद्र में होना, शुभ ग्रह का सहयोग तथा नीच न होना माँगता है, जबकि केवल “चंद्र से केंद्र में गुरु” वाला सरल नियम फलदीपिका का केसरी योग है, जिसे अधिकांश गणक अपनाते हैं; आपके लिए दोनों मत एक ही स्थान पर मिल जाते हैं, क्योंकि चंद्र दशम में हो तो प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव का गुरु लग्न से भी केंद्र में पड़ता है और इस चंद्र से भी। तीसरा केमद्रुम है, जिसकी शर्तें और जिसके भंग दोनों एक पंक्ति की जाँच से कहीं अधिक हैं। इस पृष्ठ के संदर्भ में एक बात निश्चित है — आपका चंद्र लग्न से केंद्र में है, और लग्न से केंद्र का चंद्र शास्त्रीय केमद्रुम-भंग में गिना जाता है। पूरी शर्तें केमद्रुम दोष वाले पृष्ठ पर देखें।

सूचना: शास्त्रीय ज्योतिष (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका) पर आधारित। भाव-स्थिति का विश्लेषण प्रवृत्तियाँ बताता है, गारंटी नहीं देता। व्यक्तिगत परामर्श हेतु योग्य ज्योतिषी से संपर्क करें।