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सावन शिवरात्रि 2026 — तिथि व निशिता काल मुहूर्त

सावन की मासिक शिवरात्रि मंगलवार 11 अगस्त 2026 की रात्रि को है — मध्यरात्रि निशिता काल पूजा और रात भर चलने वाली चार प्रहर की पूजा के साथ।

Oil lamps and bilva leaves before a Shivling on Sawan Shivratri night, water vessel ready for jalabhishek
PanchangBodh Editorial
8 min read
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सावन के सभी सोमवार और व्रतों में, मास के भीतर पड़ने वाली शिवरात्रि शिव भक्त के लिए सबसे भावपूर्ण रात्रियों में से एक है। सावन शिवरात्रि — श्रावण मास की मासिक शिवरात्रि — कृष्ण चतुर्दशी को रखी जाती है, जब श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और रात के चारों प्रहरों में शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं।

2026 में यह रात्रि मंगलवार, 11 अगस्त को पड़ती है, और मुख्य पूजा 12 अगस्त की भोर में मध्यरात्रि के निशिता काल में की जाती है। नीचे नई दिल्ली के लिए तिथि और निशिता काल का सटीक समय, चार प्रहर की मुहूर्त सारणी, तथा जलाभिषेक की पूजा विधि दी गई है — इस स्पष्ट सूचना के साथ कि व्रत 11 अगस्त को रखा जाता है, 12 को नहीं।

सावन शिवरात्रि 2026 — एक दृष्टि में

🗓️

व्रत की रात्रि

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

🌙

तिथि

कृष्ण चतुर्दशी

⏱️

तिथि आरंभ

11 अगस्त, प्रातः 04:55

⏱️

तिथि समाप्त

12 अगस्त, रात्रि 01:54

🕛

निशिता काल पूजा

00:05 – 00:48 (12 अगस्त)

🌅

पारण

12 अगस्त प्रातः

सावन शिवरात्रि क्या है और कब है

श्रावण के भीतर पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि

प्रत्येक चंद्र मास में उसकी कृष्ण चतुर्दशी को एक शिवरात्रि होती है — मासिक शिवरात्रि। श्रावण में पड़ने वाली शिवरात्रि का महत्व विशेष है, क्योंकि पूरा मास ही शिव को समर्पित है। 2026 में चतुर्दशी 11 अगस्त प्रातः 04:55 से 12 अगस्त रात्रि 01:54 तक रहती है, इसलिए 11 की रात्रि ही शिवरात्रि की रात्रि है। चूँकि शिवरात्रि की पूजा मध्यरात्रि के निशिता काल पर केंद्रित रात्रि अनुष्ठान है, व्रत 11 अगस्त को रखा जाता है और अगले प्रातः इसका समापन होता है। 12 अगस्त को श्रावण अमावस्या है, जो एक अलग पर्व है — इसी बिंदु पर बहुत से पंचांग गलत पढ़ लिए जाते हैं।

⚠️

11 अगस्त की रात्रि, 12 को नहीं

सावन शिवरात्रि का व्रत 11 अगस्त की रात्रि को रखा जाता है। 12 अगस्त को श्रावण अमावस्या है — यह एक अलग पर्व है, इसे शिवरात्रि न समझें।

निशिता काल व चार प्रहर मुहूर्त

11 अगस्त 2026 की रात्रि के लिए नई दिल्ली का समय

निशिता काल — मुख्य पूजा

00:05 – 00:48 (12 अगस्त की भोर)

प्रहरसमयअर्पण
प्रथम प्रहर≈ 18:57 – 21:38 (11 अगस्त)जल (जलाभिषेक)
द्वितीय प्रहर≈ 21:38 – 00:20दही
तृतीय प्रहर≈ 00:20 – 03:01 (12 अगस्त)घी
चतुर्थ प्रहर≈ 03:01 – 05:42शहद

प्रहर की अवधि सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच रात्रि को चार भागों में बाँटकर निकाली जाती है; ऊपर के समय अनुमानित हैं और आपके शहर के अनुसार बदल सकते हैं।

जलाभिषेक व पूजा विधि

शिव की रात्रि पूजा किस प्रकार की जाती है

व्रत का आरंभ 11 अगस्त की भोर में संकल्प से होता है कि दिन भर व्रत रखकर रात्रि में पूजा की जाएगी। श्रद्धालु स्नान करते हैं, फलाहार व्रत रखते हैं, और शिव मंदिर जाकर या घर में शिवलिंग की पूजा करते हैं। अभिषेक जल से, और प्रायः दूध, दही, घी, शहद तथा गंगाजल से किया जाता है, फिर बिल्वपत्र, धतूरा, श्वेत पुष्प, चंदन और भस्म अर्पित की जाती है — पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय के साथ। पूर्ण जागरण रखने वाले चारों प्रहरों में पूजा करते हैं; मुख्य पूजा निशिता काल में होती है। व्रत का पारण 12 अगस्त प्रातः समापन आरती के बाद किया जाता है।

💡

रुद्राभिषेक

शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। इसकी सामग्री और विधि अलग पृष्ठ पर दी गई है।रुद्राभिषेक विधि व सामग्री →

सावन शिवरात्रि शिव भक्तों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

सबसे पवित्र मास की सबसे पवित्र शिवरात्रि

सावन शिव का अपना मास है, और इसकी शिवरात्रि पाप-नाश, संकल्प-सिद्धि और मानसिक शांति के लिए दोगुनी फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु आरोग्य के लिए, विवाह और दांपत्य सुख के लिए, तथा पुरानी कठिनाइयों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं, क्योंकि शिव आशुतोष हैं — सरल और सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाने वाले। कहा जाता है कि इस रात्रि का एक दीप, एक बिल्वपत्र और हृदय से किया गया ॐ नमः शिवाय कहीं बड़े अनुष्ठान के बराबर फल देता है।

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महामृत्युंजय जप

रात्रि जागरण में महामृत्युंजय मंत्र का जप आरोग्य और रक्षा के लिए किया जाता है।महामृत्युंजय मंत्र अर्थ सहित →
लाइव पंचांग

अपने शहर का निशिता काल जानें

यह समय नई दिल्ली के लिए गणना किया गया है। अपने शहर के सटीक सूर्यास्त, मध्यरात्रि निशिता काल और रात के मुहूर्त के लिए हमारे लाइव साधनों का उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन शिवरात्रि 2026 की तिथि, निशिता काल व व्रत

सावन शिवरात्रि 2026 में कब है?+
सावन (मासिक) शिवरात्रि 2026 में मंगलवार, 11 अगस्त की रात्रि को मनाई जाती है। यह कृष्ण चतुर्दशी तिथि को पड़ती है, जो नई दिल्ली समय अनुसार 11 अगस्त प्रातः 04:55 से 12 अगस्त रात्रि 01:54 तक रहती है। मुख्य मध्यरात्रि पूजा निशिता काल में — लगभग 12 अगस्त की भोर 00:05 से 00:48 के बीच — की जाती है।
सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को है या 12 को?+
व्रत और रात्रि-जागरण पूजा 11 अगस्त को रखी जाती है, क्योंकि शिवरात्रि की पूजा रात्रि का अनुष्ठान है और चतुर्दशी तिथि 11 की रात्रि को व्याप्त रहती है। 12 अगस्त को श्रावण अमावस्या है। इसलिए सावन शिवरात्रि के लिए 11 अगस्त (रात्रि) को अंकित करें, 12 को नहीं।
निशिता काल क्या है और सावन शिवरात्रि 2026 पर यह कब है?+
निशिता काल रात्रि के मध्य की पवित्र अवधि है, जब शिव पूजा सर्वाधिक शुभ मानी जाती है। सावन शिवरात्रि 2026 पर नई दिल्ली में यह लगभग 12 अगस्त की भोर 00:05 से 00:48 तक है। मुख्य अभिषेक और पूजा इसी काल में की जाती है।
शिवरात्रि की चार प्रहर पूजा क्या है?+
रात्रि को चार प्रहरों (लगभग तीन-तीन घंटे की अवधियों) में बाँटकर हर प्रहर में शिव की पूजा की जाती है। परंपरा में प्रथम प्रहर में जल, द्वितीय में दही, तृतीय में घी और चतुर्थ प्रहर में शहद अर्पित किया जाता है। जो रात भर जाग सकें वे चारों प्रहर पूजा करते हैं; शेष निशिता काल पर ध्यान देते हैं।
सावन शिवरात्रि का व्रत और जलाभिषेक कैसे करें?+
श्रद्धालु दिन भर व्रत रखते हैं, स्नान करते हैं, और शिवलिंग पर जल तथा प्रायः दूध चढ़ाकर — बिल्वपत्र, धतूरा, श्वेत पुष्प के साथ, ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए — जलाभिषेक करते हैं। मुख्य पूजा निशिता काल में होती है; व्रत का पारण अगले प्रातः, 12 अगस्त को, समापन पूजा के बाद किया जाता है।
सावन शिवरात्रि पर शिव को क्या अर्पित करें?+
अभिषेक के लिए जल और दूध, बिल्वपत्र (तीन दल वाला बेल पत्र), धतूरा और आक के पुष्प, श्वेत चंदन, भाँग तथा भस्म। शिव पूजा में तुलसी दल और केतकी पुष्प परंपरागत रूप से वर्जित माने जाते हैं। सभी अर्पण पंचाक्षरी मंत्र — ॐ नमः शिवाय — के साथ किए जाते हैं।
स्रोत और अस्वीकरण: समय नई दिल्ली के लिए स्विस एफेमेरिस से गणना कर पारंपरिक पंचांग से मिलाया गया है। निशिता काल और प्रहरों की अवधि आपके स्थानीय सूर्यास्त और सूर्योदय के अनुसार बदलती है, इसलिए व्रत से पहले अपने शहर का समय अवश्य पुष्टि कर लें। सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 की रात्रि को मनाई जाती है; अगला दिन, 12 अगस्त, श्रावण अमावस्या है।