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कामिका एकादशी 2026 — तिथि, पारण व व्रत विधि

श्रावण 2026 की कृष्ण पक्ष एकादशी — तिथि का समय, पारण मुहूर्त, व्रत विधि और भगवान विष्णु की कथा के साथ।

A lamp and tulsi leaves before an image of Vishnu on Kamika Ekadashi, with an open scripture beside them
PanchangBodh Editorial
7 min read
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कामिका एकादशी श्रावण के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो भगवान विष्णु की भक्ति में रखी जाती है। 2026 में यह रविवार, 9 अगस्त को पड़ती है। उत्तर भारत के सावन मास की दो एकादशियों में यह पहली है, और पापों के नाश तथा मन की शांति के लिए रखी जाती है।

नीचे नई दिल्ली के लिए एकादशी तिथि का सटीक समय, 10 अगस्त का अत्यंत महत्वपूर्ण पारण मुहूर्त, क्रमवार व्रत विधि, और व्रत के समय पढ़ी या सुनी जाने वाली कथा दी गई है।

कामिका एकादशी 2026 — एक दृष्टि में

🗓️

तिथि

रविवार, 9 अगस्त 2026

🌙

तिथि (एकादशी)

श्रावण कृष्ण एकादशी

⏱️

एकादशी आरंभ

8 अगस्त, 14:00 (IST)

⏱️

एकादशी समाप्त

9 अगस्त, 11:06 (IST)

🍽️

पारण (10 अगस्त)

05:47 – 08:01 (IST)

🙏

आराध्य

भगवान विष्णु

तिथि, एकादशी व पारण समय

व्रत कब रखें और कब खोलें

एकादशी तिथि आरंभ

8 अगस्त, अपराह्न 02:00

एकादशी तिथि समाप्त

9 अगस्त, पूर्वाह्न 11:06

व्रत का दिन

रविवार, 9 अगस्त

व्रत इसी दिन रखा जाता है

पारण (व्रत खोलना)

10 अगस्त, प्रातः 05:47 – 08:01

द्वादशी को, सूर्योदय के बाद

एकादशी तिथि 8 अगस्त की अपराह्न आरंभ होकर 9 अगस्त की पूर्वाह्न देर से समाप्त होती है, इसलिए व्रत रविवार, 9 अगस्त को रखा जाता है। सबसे महत्वपूर्ण समय पारण का है — व्रत अगली सुबह, द्वादशी को (10 अगस्त), ऊपर दिए गए मुहूर्त में, सूर्योदय के बाद और द्वादशी की समाप्ति से पूर्व खोला जाता है। इस अवधि के बाहर व्रत खोलने से बचा जाता है। ये समय नई दिल्ली के लिए हैं; अपने शहर का पारण अवश्य पुष्टि कर लें।

⚠️

पारण का ध्यान रखें

व्रत केवल पारण मुहूर्त में ही खोलें — सूर्योदय के बाद और द्वादशी की समाप्ति से पूर्व। इसे टालना उचित नहीं माना जाता।

व्रत विधि

एकादशी व्रत कैसे रखा जाता है, क्रमवार

दशमी की संध्या को हल्का, अन्न-आधारित भोजन करें, फिर एकादशी को सूर्योदय से व्रत आरंभ करें। बहुत लोग निर्जल व्रत रखते हैं; कुछ फल और दूध पर फलाहार रखते हैं। प्रातः स्नान करें, फिर भगवान विष्णु की पूजा करें — तुलसी दल, पुष्प, दीप और धूप अर्पित करें, तथा कामिका एकादशी कथा पढ़ें या सुनें। दिन जप और भजन में बिताएँ, अनाज, चावल, प्याज़ और लहसुन से दूर रहें, और यथासंभव भक्ति में जागरण करें। व्रत द्वादशी के पारण मुहूर्त में खोलें, यथासंभव किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराने के बाद।

कथा व महत्व

एकादशी के पीछे की कथा और इसे क्यों रखा जाता है

ब्रह्मवैवर्त पुराण की कथा एक योद्धा की है, जिसने क्रोध में एक ब्राह्मण का वध कर दिया और ऐसे घोर पाप से भर उठा जिसे कोई साधारण प्रायश्चित नहीं मिटा सकता था। एक ऋषि ने उसे कामिका एकादशी का व्रत रखने और सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने की सलाह दी। उसने तुलसी और दीप अर्पित कर वैसा ही किया, और व्रत के पुण्य से पाप से मुक्त हुआ। यह कथा व्रत के समय पढ़ी जाती है, जो स्मरण कराती है कि यह एकादशी भारी से भारी दोषों को भी धो देती है, और श्रद्धा से विष्णु को अर्पित एक तुलसी दल भी उन्हें अत्यंत प्रिय है।

💡

सावन की दो एकादशियाँ

सावन में दो एकादशियाँ पड़ती हैं — कामिका (कृष्ण पक्ष) और श्रावण पुत्रदा (शुक्ल पक्ष, 23 अगस्त)।श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 →
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अपने शहर की एकादशी व पारण का समय जानें

ये समय नई दिल्ली के लिए हैं। अपने शहर के सटीक सूर्योदय, तिथि और पारण मुहूर्त के लिए हमारे लाइव साधनों का उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कामिका एकादशी 2026 की तिथि, पारण व व्रत

कामिका एकादशी 2026 कब है?+
कामिका एकादशी 2026 रविवार, 9 अगस्त को है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। एकादशी तिथि 8 अगस्त को अपराह्न 02:00 बजे आरंभ होकर 9 अगस्त को पूर्वाह्न 11:06 बजे (IST, नई दिल्ली) समाप्त होती है, और व्रत 9 तारीख़ को रखा जाता है।
कामिका एकादशी 2026 का पारण समय क्या है?+
पारण — व्रत खोलना — अगले दिन द्वादशी को, अर्थात सोमवार 10 अगस्त को, लगभग प्रातः 05:47 से 08:01 बजे (IST, नई दिल्ली) के बीच किया जाता है। सूर्योदय के बाद इसी अवधि में व्रत खोलें; इसे द्वादशी की समाप्ति से आगे न टालें। अपने शहर की सटीक अवधि पुष्टि कर लें।
कामिका एकादशी व्रत कैसे रखा जाता है?+
भक्त एक दिन पूर्व, दशमी की संध्या को हल्का भोजन करते हैं, फिर एकादशी भर व्रत रखते हैं — बहुत लोग निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा में — तुलसी दल, दीप, धूप तथा कामिका एकादशी कथा के पाठ या श्रवण में — बीतता है। अनाज, चावल, प्याज़ और लहसुन से परहेज़ किया जाता है। व्रत द्वादशी के पारण काल में खोला जाता है।
कामिका एकादशी का महत्व क्या है?+
कामिका एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और मान्यता है कि यह पापों का नाश कर मन को शांति देती है। परंपरा कहती है कि इसका पुण्य अनेक तीर्थों और यज्ञों के समान है। इस दिन विष्णु को एक तुलसी दल अर्पित करना भी उन्हें अत्यंत प्रिय है, ऐसा कहा जाता है। उत्तर भारत के सावन मास में पड़ने वाली दो एकादशियों में यह एक है।
कामिका एकादशी की कथा क्या है?+
ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित कथा एक योद्धा की है, जिसने क्रोध में एक ब्राह्मण का वध कर दिया और उस घोर पाप का प्रायश्चित करना चाहा। एक ऋषि की सलाह पर उसने कामिका एकादशी का व्रत रखा और सच्ची श्रद्धा से विष्णु की पूजा की; उसी पुण्य से वह पाप से मुक्त हुआ। यह कथा व्रत के समय पढ़ी या सुनी जाती है, जो दिन की पाप-नाशक शक्ति का स्मरण कराती है।
सावन 2026 में कौन-सी दो एकादशियाँ पड़ती हैं?+
उत्तर भारत के सावन में दो एकादशियाँ पड़ती हैं — कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी, रविवार 9 अगस्त को, और शुक्ल पक्ष की श्रावण पुत्रदा एकादशी, रविवार 23 अगस्त को। कामिका पापों के नाश के लिए रखी जाती है, जबकि पुत्रदा विशेषकर संतान के आशीर्वाद की कामना करने वाले रखते हैं।
स्रोत और अस्वीकरण: एकादशी तिथि और पारण समय नई दिल्ली के लिए स्विस एफेमेरिस से गणना कर पारंपरिक पंचांग से मिलाए गए हैं। विशेषकर पारण मुहूर्त अन्य शहरों के लिए बदल सकता है — व्रत खोलने से पूर्व अपना स्थानीय सूर्योदय और द्वादशी समय अवश्य पुष्टि कर लें। कुछ परंपराएँ और संप्रदाय एकादशी को थोड़े भिन्न दिन मानते हैं; जहाँ भिन्नता हो, वहाँ अपने परिवार या मंदिर की परंपरा का पालन करें।