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केतु का नक्षत्र गोचर सूक्ष्म आध्यात्मिक तल पर कार्य करता है। अश्विनी नक्षत्र (जिसका केतु स्वयं स्वामी है) में केतु उपचार और अचानक आध्यात्मिक बोध के लिए विशेष रूप से प्रबल माना जाता है। मूल नक्षत्र — एक और केतु-शासित तारा — में यह पुराने संस्कारों को उखाड़ने और कर्म शोधन की प्रक्रिया को तीव्र करता है। केतु प्रत्येक नक्षत्र में लगभग 7-8 माह रहता है, और हर अवधि वैराग्य तथा आंतरिक रूपांतरण का एक विशिष्ट स्वरूप लाती है — सजग साधक इसे आध्यात्मिक विकास के लिए साध सकता है।
नक्षत्र गोचर सारणी 2026
3 परिवर्तनपूर्वा फाल्गुनी (Purva Phalguni)
वर्तमानसिंह राशि में · स्वामी: शुक्र · देवता: Bhaga
23 नव 2025, 12:33 अपराह्न → 29 मार्च 2026, 7:53 पूर्वाह्न
मघा (Magha)
सिंह राशि में · स्वामी: केतु · देवता: Pitris
29 मार्च 2026, 7:53 पूर्वाह्न → 5 दिस 2026, 10:32 अपराह्न
आश्लेषा (Ashlesha)
कर्क राशि में · स्वामी: बुध · देवता: Nagas
5 दिस 2026, 10:32 अपराह्न → 6 फर 2027, 8:11 अपराह्न
नक्षत्र गोचर क्या है?
नक्षत्र 13°20' के भाग हैं — राशि से सूक्ष्म। मुहूर्त निर्णय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।