ग्रह भ्रमण — राशि चक्र में ग्रहों का संचरण
वैदिक ज्योतिष में गोचर से तात्पर्य है ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करना। यह राशि परिवर्तन जीवन के विभिन्न क्षेत्रों — स्वास्थ्य, करियर, विवाह, धन — पर गहरा प्रभाव डालता है। प्रत्येक ग्रह की गोचर अवधि भिन्न होती है।
प्रत्येक ग्रह के गोचर की अवधि, प्रभाव और महत्व जानें

Sun Transit
सूर्य आत्मा का कारक है। इसका गोचर आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और पिता-संबंधों को प्रभावित करता है।

Moon Transit
चंद्रमा मन एवं भावनाओं का स्वामी है। सबसे तेज़ ग्रह — दैनिक राशि एवं नक्षत्र कैलेंडर।

Mars Transit
मंगल साहस, ऊर्जा एवं भूमि का कारक है। इसका गोचर भाई-बहनों और संपत्ति मामलों को प्रभावित करता है।

Mercury Transit
बुध बुद्धि, संचार एवं व्यापार का कारक है। वर्ष में 3-4 बार वक्री होता है।

Jupiter Transit
गुरु सबसे शुभ ग्रह है — ज्ञान, धर्म, संतान एवं भाग्य का कारक।

Venus Transit
शुक्र प्रेम, सौंदर्य, विवाह एवं भोग-विलास का कारक है।

Saturn Transit
शनि कर्म, अनुशासन एवं न्याय का देवता है। साढ़े साती का कारक।
Rahu Transit
राहु छाया ग्रह है — भ्रम, भौतिक इच्छा एवं अप्रत्याशित जीवन परिवर्तन का कारक।
Ketu Transit
केतु मोक्ष, वैराग्य एवं आध्यात्मिक जागरण का छाया ग्रह है।
बृहत् पाराशर होर शास्त्र
"गोचरे ग्रहभुक्तिश्च फलदा सर्वदा भवेत्।
जन्मकुण्डल्यनुसारं गोचरः शुभदो भवेत्॥"
गोचर में ग्रहों की भुक्ति सदैव फल देने वाली होती है। जन्म कुंडली के अनुसार गोचर शुभ या अशुभ फल प्रदान करता है।
— महर्षि पराशर
गोचर में ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है — इसे "राशि परिवर्तन" या "संक्रमण" कहते हैं।
गोचर फल जन्म कुंडली (चंद्र राशि) के आधार पर निर्धारित होता है — यही "गोचर फल" कहलाता है।
शनि, गुरु, राहु-केतु जैसे धीमे ग्रहों का गोचर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है।
चंद्र, सूर्य, बुध जैसे तेज़ ग्रहों का गोचर अल्पकालिक प्रभाव देता है — जैसे मूड, ऊर्जा।
वैदिक ज्योतिष में "अष्टकवर्ग" पद्धति से गोचर के शुभ/अशुभ फल की गणना होती है।
शनि का गोचर विशेष महत्वपूर्ण है — "साढ़े साती" और "ढैय्या" इसी से बनते हैं।
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