जब कैलेंडर पर अक्षय तृतीया की तारीख दिखती है, तो पूरे देश में एक हलचल-सी मच जाती है — सोने की दुकानों पर भीड़, मंदिरों में विशेष पूजा, और नए कार्यों का आरंभ। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 2026 में तृतीया तिथि 10:51 बजे से पहले नहीं है? यानी सुबह सोने की दुकान खुलते ही जो खरीदारी होती है, वह तकनीकी रूप से अभी भी द्वितीया तिथि में होती है।
यह लेख आपको बताएगा — ठीक उसी मिनट से जब तृतीया शुरू होती है — दिल्ली और मुंबई में सबसे शुभ खिड़कियाँ कौन-सी हैं, राहुकाल क्यों ध्यान रखना चाहिए, और ‘अबूझ मुहूर्त’ का वास्तविक अर्थ क्या है।
एक नज़र में
तिथि
रविवार, 19 अप्रैल 2026
तृतीया आरंभ
प्रातः 10:51 IST
तृतीया समाप्त
रात्रि 11:37 IST (19 अप्रैल)
नक्षत्र
भरणी → कृत्तिका (प्रातः 8:36 के बाद)
योग
आयुष्मान → सौभाग्य
मुहूर्त प्रकार
अबूझ मुहूर्त (स्वयंसिद्ध)
वैष्णव परंपरा
20 अप्रैल 2026
अक्षय तृतीया को 'अबूझ मुहूर्त' क्यों कहते हैं?
वैदिक पंचांग में सबसे दुर्लभ प्रकार का शुभ दिन
वैदिक ज्योतिष में “अबूझ मुहूर्त” वह दिन होता है जब ग्रह-नक्षत्रों का संयोग इतना शुभ होता है कि किसी पंडित से अलग से मुहूर्त पूछने की आवश्यकता नहीं पड़ती। चार शर्तें एक साथ पूरी होती हैं:
- सूर्य उच्च राशि में: मेष राशि में सूर्य अपनी उच्च राशि में होता है।
- शुक्ल पक्ष तृतीया: चंद्रमा बढ़ रहा है, शक्ति में है।
- वैशाख मास: विष्णु के प्रिय मास में यह तिथि आती है।
- आयुष्मान योग: दीर्घ जीवन और समृद्धि का संकेत देने वाला।
इस संयोग के कारण इस दिन किए गए दान, पूजा, और नए कार्यों का फल “अक्षय” — कभी नष्ट न होने वाला — माना जाता है।
मुख्य बात
अक्षय तृतीया मुहूर्त 2026 — दिल्ली और मुंबई का चौघड़िया
दिल्ली और मुंबई के लिए वैदिक पंचांग आधारित चौघड़िया
नई दिल्ली — 19 अप्रैल 2026
सूर्योदय: 5:52 AM · सूर्यास्त: 6:48 PM · राहुकाल: 5:11–6:48 PM
☀️ दिन — सूर्योदय से सूर्यास्त
तृतीया तिथि आरंभ
राहुकाल — खरीदारी से बचें
🌙 रात — सूर्यास्त से सूर्योदय
मुंबई — 19 अप्रैल 2026
सूर्योदय: 6:18 AM · सूर्यास्त: 6:56 PM · राहुकाल: 5:22–6:56 PM
☀️ दिन — सूर्योदय से सूर्यास्त
राहुकाल — खरीदारी से बचें
🌙 रात — सूर्यास्त से सूर्योदय
राहुकाल चेतावनी
अपने शहर का मुहूर्त जानें
ये समय दिल्ली और मुंबई के सूर्योदय पर आधारित हैं। अन्य शहरों के लिए हमारा चौघड़िया कैलकुलेटर का प्रयोग करें।
चौघड़िया क्या है और इसकी गणना कैसे होती है?
8-खंड पद्धति का गणित — और शहर दर शहर समय क्यों बदलता है
चौघड़िया में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है — यही “दिन के चौघड़िया” हैं। रात को भी सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के समय के 8 भाग होते हैं। प्रत्येक वार का अनुक्रम निश्चित है — रविवार को पहला चौघड़िया हमेशा उद्वेग से शुरू होता है। प्रत्येक शहर का सूर्योदय समय अलग होने के कारण चौघड़िया के घंटे भी शहर-दर-शहर बदलते हैं।
| चौघड़िया | प्रकृति |
|---|---|
| ⭐ अमृत | सर्वश्रेष्ठ |
| ✅ शुभ | शुभ |
| 🟡 लाभ | लाभदायक |
| 🔵 चर | चर/यात्रा |
| ❌ उद्वेग | अशुभ |
| ❌ काल | अशुभ |
| ❌ रोग | अशुभ |
सोने से परे: अक्षय तृतीया पर और क्या करें?
यह दिन सभी शुभ आरंभों के लिए है — केवल आभूषण के लिए नहीं
विवाह
अक्षय तृतीया हिंदू पंचांग की तीन सर्वश्रेष्ठ विवाह तिथियों में से एक है। अलग मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं।
गृह प्रवेश
इस दिन नए घर में प्रवेश करने से घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है। आयुष्मान योग दीर्घायु का आशीर्वाद देता है।
व्यापार प्रारंभ
नया उद्यम, पहला निवेश या व्यापारिक अनुबंध करना इस दिन अत्यंत शुभ है।
विद्यारंभ
नई शिक्षा आरंभ करना या नई विद्या ग्रहण करना इस दिन दैवीय आशीर्वाद से संपन्न होता है। यह ज्ञान भी 'अक्षय' हो जाता है।
दान-पुण्य
अनाज, जल कलश, वस्त्र या स्वर्ण का दान इस दिन गुणा-गुणित होकर दाता के पास लौटता है।
मंदिर दर्शन और पूजा
विष्णु पूजा, लक्ष्मी पूजा और सत्यनारायण कथा विशेष फलदायी हैं। 8:36 के बाद कृत्तिका नक्षत्र अग्नि का बल प्रदान करता है।
मिथक बनाम वास्तविकता — आम भ्रांतियों का समाधान
परंपरा वास्तव में क्या कहती है
“अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना ज़रूरी है।”
परंपरा यह है कि इस दिन कोई भी टिकाऊ शुभ कार्य करें — दान, विद्यारंभ, नया उद्यम। सोने का प्रचलन आधुनिक व्यावसायिक प्रचार से बढ़ा है।
“पूरा दिन एक समान शुभ है, इसलिए मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं।”
अबूझ मुहूर्त का अर्थ है अलग से पंडित से मुहूर्त पूछने की आवश्यकता नहीं। लेकिन चौघड़िया एक अतिरिक्त परत जोड़ता है — अमृत चौघड़िया में किया गया कार्य शुभ × शुभ होता है।
“2026 में अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को है।”
तृतीया तिथि 19 अप्रैल को 10:51 बजे आरंभ होती है और उसी रात 11:37 बजे समाप्त होती है। 19 अप्रैल के सूर्योदय के समय यही तिथि चल रही होती है, इसलिए 19 अप्रैल ही मुख्य पर्व का दिन है। वैष्णव परंपरा में 20 अप्रैल को भी मनाने का प्रचलन है, जो अलग तिथि-गणना पद्धति पर आधारित है।
“अबूझ मुहूर्त होने से राहुकाल का प्रभाव नहीं होता।”
कुछ विद्वान ऐसा मानते हैं, तो कुछ राहुकाल का ध्यान रखते हैं। सुरक्षित रहने के लिए शाम 5 बजे से पहले खरीदारी पूरी कर लें।
अक्षय तृतीया मुहूर्त 2026 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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