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पंचक योग 2026

तिथियां, समय और नक्षत्रों की संपूर्ण सूची

Panchak Yoga 2026 Nakshatras
PanchangBodh Editorial
6 min read

पंचक 5 दिनों की वह अवधि है जब चंद्रमा अंतिम पांच नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती) से गोचर करता है। यह अवधि शुभ कार्यों के लिए वर्जित मानी जाती है। पंचक की शुरुआत के दिन के आधार पर इसे रोग, राज, अग्नि, मृत्यु और चोर पंचक कहा जाता है।

आज का पंचक काल जानना है?

यह 2026 की सूचियां भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित हैं। अपने शहर का सटीक समय देखने के लिए हमारे लाइव ट्रैकर का इस्तेमाल करें।

आज का पंचक चेक करें

जनवरी 2026

दिनांकTimingType
21 जनवरीबुधवार
:
21 जनवरी,01:51 AM
:
25 जनवरी,12:32 PM
(106h 41m)
मध्यम पंचक
सामान्य फलदायी

फरवरी 2026

दिनांकTimingType
17 फरवरीमंगलवार
:
17 फरवरी,08:08 AM
:
21 फरवरी,08:43 PM
(108h 34m)
अग्नि पंचक
अग्नि भय

मार्च 2026

दिनांकTimingType
16 मार्चसोमवार
:
16 मार्च,07:28 PM
:
21 मार्च,02:37 AM
(103h 8m)
राज पंचक
शुभ • सफलता

अप्रैल 2026

दिनांकTimingType
13 अप्रैलसोमवार
:
13 अप्रैल,02:34 AM
:
17 अप्रैल,12:18 PM
(105h 44m)
राज पंचक
शुभ • सफलता

मई 2026

दिनांकTimingType
10 मईरविवार
:
10 मई,01:53 PM
:
14 मई,10:48 PM
(104h 54m)
रोग पंचक
रोग भय

जून 2026

दिनांकTimingType
06 जूनशनिवार
:
06 जून,06:39 PM
:
11 जून,08:26 AM
(109h 46m)
मृत्यु पंचक
अत्यधिक अशुभ

जुलाई 2026

दिनांकTimingType
04 जुलाईशनिवार
:
04 जुलाई,12:03 AM
:
08 जुलाई,05:00 PM
(112h 57m)
मृत्यु पंचक
अत्यधिक अशुभ
31 जुलाईशुक्रवार
:
31 जुलाई,08:21 AM
:
04 अगस्त,09:02 PM
(108h 41m)
चोर पंचक
चोर भय

अगस्त 2026

दिनांकTimingType
27 अगस्तगुरुवार
:
27 अगस्त,01:13 PM
:
01 सितंबर,03:52 AM
(110h 38m)
मध्यम पंचक
सामान्य फलदायी

सितंबर 2026

दिनांकTimingType
23 सितंबरबुधवार
:
23 सितंबर,10:36 PM
:
28 सितंबर,11:21 AM
(108h 45m)
मध्यम पंचक
सामान्य फलदायी

अक्टूबर 2026

दिनांकTimingType
21 अक्टूबरबुधवार
:
21 अक्टूबर,07:27 AM
:
25 अक्टूबर,06:19 PM
(106h 51m)
मध्यम पंचक
सामान्य फलदायी

नवंबर 2026

दिनांकTimingType
17 नवंबरमंगलवार
:
17 नवंबर,02:37 PM
:
22 नवंबर,07:09 AM
(112h 32m)
अग्नि पंचक
अग्नि भय

दिसंबर 2026

दिनांकTimingType
15 दिसंबरमंगलवार
:
15 दिसंबर,12:12 AM
:
19 दिसंबर,02:53 PM
(110h 41m)
अग्नि पंचक
अग्नि भय

पंचक के 5 प्रकार और उनके प्रभाव

पंचक का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है कि वह सप्ताह के किस दिन शुरू होता है। हर प्रकार का अलग फल होता है:

रोग पंचक(सोमवार)

स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों का संकेत। इस दौरान ऑपरेशन या नया इलाज शुरू करने से बचा जाता है।

राज पंचक(मंगलवार)

एकमात्र शुभ प्रकार। सफलता, अधिकार और सरकारी लाभ से जुड़ा है। नए कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है।

अग्नि पंचक(बुधवार)

आग से संबंधित भय। निर्माण कार्य, वेल्डिंग या ज्वलनशील सामग्री खरीदने से बचें।

मृत्यु पंचक(गुरुवार)

सबसे अशुभ प्रकार। दाह संस्कार और सभी बड़े जीवन-निर्णयों से परहेज़ किया जाता है।

चोर पंचक(शुक्रवार)

चोरी, धोखाधड़ी या भौतिक हानि का भय। महंगी खरीदारी या बड़ा वित्तीय निवेश टालें।

शनिवार या रविवार को शुरू होने वाले पंचक को कुछ ग्रंथों में मध्यम पंचक कहा जाता है — इसका फल सामान्य माना जाता है।

पंचक में कौन से काम नहीं करने चाहिए?

किसी भी प्रकार के पंचक में ये पांच कार्य विशेष रूप से वर्जित हैं (राज पंचक में नया कार्य अपवाद है):

  • 1छत या नई स्लैब डालना — मान्यता है कि पंचक में बने भवन को बार-बार क्षति होती है
  • 2लकड़ी, भूसा या ईंधन खरीदना-संग्रह करना — वैदिक प्रतीकवाद में ये चिता से जुड़े हैं
  • 3दक्षिण दिशा की यात्रा — दक्षिण यमराज की दिशा है, पंचक में यह संयोग दोहरा अशुभ माना जाता है
  • 4दाह संस्कार — सबसे कड़ा प्रतिबंध, विशेषकर मृत्यु पंचक में
  • 5नया शुभ कार्य शुरू करना — गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन या व्यापार का उद्घाटन

अगर इनमें से कोई कार्य अनिवार्य हो तो अपने पंडित जी से शांति विधान के बारे में अवश्य पूछें।

पंचक में कौन से 5 नक्षत्र आते हैं?

पंचक की परिभाषा ही राशि चक्र के अंत में पांच विशेष नक्षत्रों से चंद्रमा के गोचर पर आधारित है:

1
धनिष्ठाकेवल तीसरा और चौथा पद (कुंभ राशि वाला भाग, 23°20' से आगे)
2
शतभिषापूर्ण नक्षत्र (कुंभ, 6°40' से 20°00')
3
पूर्वा भाद्रपदपूर्ण नक्षत्र (कुंभ 20° से मीन 3°20')
4
उत्तरा भाद्रपदपूर्ण नक्षत्र (मीन, 3°20' से 16°40')
5
रेवतीपूर्ण नक्षत्र (मीन, 16°40' से 30°00')

ये पांचों नक्षत्र अंतिम दो राशियों — कुंभ और मीन — में स्थित हैं। "पंचक" शब्द का अर्थ ही "पांच का समूह" है।

पंचक क्या होता है?

वैदिक ज्योतिष में, पंचक को पांच नक्षत्रों का समूह कहा जाता है जो अशुभ माना जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश, छत डालना, लकड़ी का सामान खरीदना या दक्षिण दिशा की यात्रा करना निषेध माना जाता है।

पंचक योग 2026 — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचक काल क्या होता है?

पंचक वह अवधि है जब चंद्रमा अंतिम पांच नक्षत्रों — धनिष्ठा (तीसरा और चौथा चरण), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती — से गोचर करता है। ये पांचों नक्षत्र कुंभ और मीन राशि में आते हैं। इस दौरान छत डालना, लकड़ी खरीदना, दक्षिण दिशा की यात्रा और अंत्येष्टि जैसे कार्य वर्जित माने जाते हैं। हर महीने एक बार पंचक आता है और लगभग 4-5 दिन रहता है।

पंचक कितने प्रकार के होते हैं?

पंचक पांच प्रकार के होते हैं: रोग पंचक (सोमवार से शुरू — स्वास्थ्य संबंधी भय), राज पंचक (मंगलवार — शुभ, सफलता देने वाला), अग्नि पंचक (बुधवार — आग का भय), मृत्यु पंचक (गुरुवार — सबसे अशुभ), और चोर पंचक (शुक्रवार — चोरी या हानि का भय)। शनिवार-रविवार को शुरू होने वाले पंचक को कुछ ग्रंथों में मध्यम पंचक कहा जाता है। इनमें केवल राज पंचक ही शुभ माना जाता है।

सबसे खतरनाक पंचक कौन सा है?

मृत्यु पंचक सबसे अशुभ माना जाता है। यह गुरुवार को शुरू होता है और इसमें प्राण संकट की चेतावनी दी जाती है। शास्त्रों में मृत्यु पंचक में अंत्येष्टि करने का विशेष निषेध है — मान्यता है कि इस काल में दाह संस्कार करने पर परिवार में पांच और मृत्यु हो सकती हैं। यह पारंपरिक मान्यता है, लेकिन अधिकांश परिवार इस दौरान सावधानी बरतना उचित समझते हैं।

पंचक में कौन से काम नहीं करने चाहिए?

पांच कार्य विशेष रूप से वर्जित हैं: (1) छत या स्लैब डालना, (2) लकड़ी या ईंधन खरीदना-संग्रह करना, (3) दक्षिण दिशा की यात्रा, (4) दाह संस्कार, और (5) गृह प्रवेश, विवाह या कोई नया शुभ कार्य शुरू करना। ये प्रतिबंध हर प्रकार के पंचक पर लागू होते हैं — राज पंचक अपवाद है जिसमें नए कार्य शुरू करने की छूट दी जाती है।

क्या पंचक में गृह प्रवेश कर सकते हैं?

सामान्यतः पंचक में गृह प्रवेश करने से बचा जाता है क्योंकि यह "नया शुभ कार्य" की श्रेणी में आता है। हालांकि, अगर पंचक राज पंचक है (मंगलवार से शुरू), तो कुछ परंपराओं में इसकी अनुमति दी जाती है। यदि आपका मुहूर्त पहले से तय है और वह पंचक में पड़ रहा है, तो अपने पंडित जी से शांति उपाय के बारे में परामर्श लें।

राज पंचक शुभ होता है या अशुभ?

राज पंचक एकमात्र ऐसा पंचक है जो शुभ माना जाता है। यह मंगलवार को शुरू होता है और इसे सफलता, राजकीय लाभ और अधिकार प्राप्ति से जोड़ा जाता है। हालांकि छत डालने और दाह संस्कार के सामान्य प्रतिबंध इसमें भी लागू रहते हैं, लेकिन नया व्यापार या कोई शुभ कार्य शुरू करना इस दौरान उचित माना जाता है।

पंचक कितने दिन का होता है?

हर पंचक लगभग 4 से 5 दिन का होता है — सटीक अवधि चंद्रमा की गति पर निर्भर करती है जो हर महीने थोड़ी बदलती है। पंचक तब शुरू होता है जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण (23°20' मकर) में प्रवेश करता है और तब समाप्त होता है जब वह रेवती नक्षत्र (30° मीन) से बाहर निकलता है। 2026 में पंचक की अवधि लगभग 4 दिन 10 घंटे से 5 दिन 2 घंटे के बीच रहेगी।

पंचक में कौन से नक्षत्र आते हैं?

पांच नक्षत्र: धनिष्ठा (केवल तीसरा और चौथा पद — कुंभ राशि वाला भाग), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती। ये राशि चक्र की अंतिम दो राशियों — कुंभ और मीन — में स्थित हैं। "पंचक" शब्द का अर्थ ही "पांच का समूह" है, जो इन्हीं पांच नक्षत्रों के समूह को दर्शाता है।

क्या पंचक में यात्रा कर सकते हैं?

सामान्य यात्रा पर पंचक में प्रतिबंध नहीं है, लेकिन दक्षिण दिशा की यात्रा विशेष रूप से वर्जित मानी जाती है। वैदिक परंपरा में दक्षिण दिशा यमराज से जुड़ी है, और पंचक काल में दक्षिण की ओर जाना दोहरा अशुभ माना जाता है। उत्तर, पूर्व, पश्चिम दिशा की यात्रा सामान्यतः स्वीकार्य है। अगर दक्षिण की यात्रा अनिवार्य है, तो यात्रा से पहले गणेश पूजन करने की सलाह दी जाती है।

पंचक और राहु काल में क्या अंतर है?

दोनों बिलकुल अलग अवधारणाएं हैं। राहु काल प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का समय है जो राहु ग्रह से प्रभावित होता है — यह हर दिन आता है और सूर्योदय के आधार पर गणना होती है। पंचक चंद्रमा के नक्षत्र गोचर पर आधारित है जो महीने में एक बार आता है और 4-5 दिन तक रहता है। राहु काल रोज़ बदलता है; पंचक लगातार कई दिन चलता है। दोनों अशुभ माने जाते हैं, लेकिन इनका खगोलीय आधार, अवधि और प्रतिबंधित कार्य पूरी तरह भिन्न हैं।

आज का पंचक काल जानना है?

यह 2026 की सूचियां भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित हैं। अपने शहर का सटीक समय देखने के लिए हमारे लाइव ट्रैकर का इस्तेमाल करें।