मासिक शिवरात्रि हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान शिव की कृपा पाने के लिए मध्यरात्रि (निशीथ काल) में उनकी पूजा करते हैं। नीचे वर्ष 2026 की सभी मासिक शिवरात्रि तिथियों का मास-क्रम कैलेंडर दिया गया है जिस में चतुर्दशी तिथि का समय और माहात्म्य शामिल है।
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जनवरी 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
16 जनशुक्रवार | प्रारंभ:जन 16, 2026, 10:23 अपराह्न समाप्त:जन 18, 2026, 12:06 पूर्वाह्न | माघ मासमासिक शिवरात्रि |
माघ मास के दौरान मनाया जाता है, त्रयोदशी से व्रत प्रारंभ होता है और मुख्य पूजा चतुर्दशी की मध्यरात्रि को होती है। | ||
फरवरी 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
15 फररविवार | प्रारंभ:फर 15, 2026, 5:06 अपराह्न समाप्त:फर 16, 2026, 5:36 अपराह्न | फाल्गुन मासमहा शिवरात्रि |
इस महीने महा शिवरात्रि मनाई जाती है, जो शिव की सबसे महान रात है, इस दिन शिव और शक्ति के मिलन का उत्सव मनाया जाता है। | ||
मार्च 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
17 मार्चमंगलवार | प्रारंभ:मार्च 17, 2026, 9:24 पूर्वाह्न समाप्त:मार्च 18, 2026, 8:26 पूर्वाह्न | चैत्र मासमासिक शिवरात्रि |
हिंदू नव वर्ष की पहली मासिक शिवरात्रि। इस व्रत को करने से शांति मिलती है और नकारात्मक कर्म नष्ट होते हैं। | ||
अप्रैल 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
15 अप्रैलबुधवार | प्रारंभ:अप्रैल 15, 2026, 10:32 अपराह्न समाप्त:अप्रैल 16, 2026, 8:12 अपराह्न | वैशाख मासमासिक शिवरात्रि |
वैशाख मास में व्रत करना अत्यंत पवित्र माना जाता है तथा यह आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। | ||
मई 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
15 मईशुक्रवार | प्रारंभ:मई 15, 2026, 8:33 पूर्वाह्न समाप्त:मई 16, 2026, 5:12 पूर्वाह्न | ज्येष्ठ मासमासिक शिवरात्रि |
भगवान शिव को समर्पित, ज्येष्ठ में भक्ति आंतरिक शत्रुओं पर विजय दिलाती है और ध्यान केंद्रित करती है। | ||
जून 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
13 जूनशनिवार | प्रारंभ:जून 13, 2026, 4:08 अपराह्न समाप्त:जून 14, 2026, 12:21 अपराह्न | अधिक ज्येष्ठ मासमासिक शिवरात्रि |
अधिक मास में पड़ने वाले इस व्रत और पूजा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। | ||
जुलाई 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
12 जुलरविवार | प्रारंभ:जुल 12, 2026, 10:31 अपराह्न समाप्त:जुल 13, 2026, 6:51 अपराह्न | आषाढ़ मासमासिक शिवरात्रि |
आषाढ़ मास में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है, इससे पिछले पाप दूर होते हैं। | ||
अगस्त 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
11 अगमंगलवार | प्रारंभ:अग 11, 2026, 4:55 पूर्वाह्न समाप्त:अग 12, 2026, 1:54 पूर्वाह्न | भाद्रपद मासमासिक शिवरात्रि |
चातुर्मास के दौरान किया जाने वाला यह व्रत वैवाहिक जीवन में सामंजस्य लाता है और मनोकामनाएं पूरी करता है। | ||
सितंबर 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
09 सितबुधवार | प्रारंभ:सित 09, 2026, 12:32 अपराह्न समाप्त:सित 10, 2026, 10:35 पूर्वाह्न | आश्विन मासमासिक शिवरात्रि |
नवरात्र से पूर्व पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि से शिव और शक्ति की असीम कृपा प्राप्त होती है। | ||
अक्टूबर 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
08 अक्टूगुरुवार | प्रारंभ:अक्टू 08, 2026, 10:17 अपराह्न समाप्त:अक्टू 09, 2026, 9:37 अपराह्न | कार्तिक मासमासिक शिवरात्रि |
कार्तिक मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। शिवलिंग के पास दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। | ||
नवंबर 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
07 नवशनिवार | प्रारंभ:नव 07, 2026, 10:49 पूर्वाह्न समाप्त:नव 08, 2026, 11:29 पूर्वाह्न | मार्गशीर्ष मासमासिक शिवरात्रि |
इस महीने में किए गए अनुष्ठान जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने में मदद करते हैं। | ||
दिसंबर 2026
| तिथि | चतुर्दशी समय (प्रारंभ - अंत) | मास और नाम |
|---|---|---|
07 दिससोमवार | प्रारंभ:दिस 07, 2026, 2:23 पूर्वाह्न समाप्त:दिस 08, 2026, 4:14 पूर्वाह्न | पौष मासमासिक शिवरात्रि |
पौष मास में तिल से भगवान शिव की पूजा करना बहुत फलदायी माना जाता है। | ||
मासिक शिवरात्रि क्या है?
मासिक शिवरात्रि प्रत्येक चंद्रमास में कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन (चतुर्दशी) को मनाई जाती है। यह भगवान शिव की उपासना का अत्यंत प्रभावशाली दिन है। भक्त पूर्ण दिन का कठोर व्रत रखते हैं, रात्रिकालीन जागरण करते हैं और विशेष रूप से निशीथ काल (मध्यरात्रि) में शिव-पूजा करते हैं। यह व्रत जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने और सभी प्रकार के नकारात्मक कर्मों को हरने वाला माना जाता है।
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