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श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 — तिथि, पारण व विधि

श्रावण 2026 की शुक्ल पक्ष एकादशी, जो संतान के आशीर्वाद के लिए रखी जाती है — तिथि का समय, पारण मुहूर्त, व्रत विधि और कथा के साथ।

A lamp, tulsi and flowers before an image of Vishnu on Putrada Ekadashi, with a mother and child in soft focus behind
PanchangBodh Editorial
7 min read
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श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जो भगवान विष्णु की भक्ति में रखी जाती है। 2026 में यह स्मार्त मत मानने वालों के लिए रविवार, 23 अगस्त को और वैष्णवों के लिए सोमवार, 24 अगस्त को पड़ती है। उत्तर भारत के सावन की दो एकादशियों में यह दूसरी है, और इसे विशेषकर वे रखते हैं जो संतान के आशीर्वाद की कामना करते हैं — पुत्र-दा अर्थात संतान देने वाली।

नीचे नई दिल्ली के लिए एकादशी तिथि का सटीक समय, 24 अगस्त का पारण मुहूर्त, क्रमवार व्रत विधि, और व्रत के समय पढ़ी जाने वाली राजा महीजित की कथा दी गई है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 — एक दृष्टि में

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तिथि

रविवार, 23 अगस्त 2026

🌙

तिथि (एकादशी)

श्रावण शुक्ल एकादशी

⏱️

एकादशी आरंभ

23 अगस्त, 02:02 (IST)

⏱️

एकादशी समाप्त

24 अगस्त, 04:20 (IST)

🍽️

पारण (24 अगस्त)

लगभग 05:55 (IST) से

🙏

आराध्य

भगवान विष्णु

तिथि, एकादशी व पारण समय

व्रत कब रखें और कब खोलें

एकादशी तिथि आरंभ

23 अगस्त, प्रातः 02:02

एकादशी तिथि समाप्त

24 अगस्त, प्रातः 04:20

व्रत का दिन

रविवार, 23 अगस्त (स्मार्त)

वैष्णव व्रत सोमवार, 24 अगस्त को

पारण (व्रत खोलना)

24 अगस्त, लगभग प्रातः 05:55 से

द्वादशी को, सूर्योदय के बाद

एकादशी तिथि 23 अगस्त के प्रातःकाल आरंभ होकर 24 अगस्त के भोर से पूर्व समाप्त होती है। स्मार्त मत मानने वाले व्रत रविवार, 23 अगस्त को रखते हैं; वैष्णव इसे सोमवार, 24 अगस्त को रखते हैं। पारण — व्रत खोलना — द्वादशी को, 24 अगस्त को, सूर्योदय के बाद लगभग प्रातः 05:55 से और द्वादशी की समाप्ति से पूर्व किया जाता है। ये समय नई दिल्ली के लिए हैं; अपनी परंपरा और शहर के अनुसार दिन और पारण पुष्टि कर लें।

ℹ️

स्मार्त व वैष्णव

स्मार्त परंपरा में व्रत 23 अगस्त को और वैष्णव परंपरा में 24 अगस्त को रखा जाता है। अपने संप्रदाय या मंदिर की परंपरा का पालन करें।

व्रत विधि

एकादशी व्रत कैसे रखा जाता है, क्रमवार

दशमी की संध्या को हल्का, अन्न-आधारित भोजन करें, फिर एकादशी को सूर्योदय से व्रत आरंभ करें। बहुत लोग निर्जल व्रत रखते हैं; कुछ फल और दूध पर फलाहार रखते हैं। प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें — तुलसी दल, पुष्प, दीप और धूप अर्पित करें, तथा पुत्रदा एकादशी कथा पढ़ें या सुनें। संतान की कामना करने वाले दंपती प्रायः साथ पूजा करते और विशेष श्रद्धा से प्रार्थना करते हैं। अनाज, चावल, प्याज़ और लहसुन से दूर रहें, दिन जप और भजन में बिताएँ, और व्रत द्वादशी के पारण मुहूर्त में खोलें, यथासंभव दान देने के बाद।

कथा व महत्व

राजा महीजित की कथा और व्रत क्यों रखा जाता है

कथा महीजित की है, जो एक न्यायप्रिय और उदार राजा था; उसने राज्य तो भली-भाँति चलाया पर इस बात से दुखी था कि उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं। उसके विद्वान ऋषियों ने उसे रानी सहित, अखंड और सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करते हुए श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। राजदंपती ने पूर्ण श्रद्धा से व्रत रखा, और उसके पुण्य से उन्हें योग्य पुत्र का आशीर्वाद मिला जिसने वंश को आगे बढ़ाया। यह कथा व्रत के समय पढ़ी जाती है, जो आश्वासन देती है कि श्रद्धा से रखी यह एकादशी संतान की चिर-कामना पूर्ण कर सकती है।

💡

सावन की दो एकादशियाँ

सावन में दो एकादशियाँ पड़ती हैं — कामिका (कृष्ण पक्ष, 9 अगस्त) और श्रावण पुत्रदा (शुक्ल पक्ष)।कामिका एकादशी 2026 →
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अपने शहर की एकादशी व पारण का समय जानें

ये समय नई दिल्ली के लिए हैं। अपने शहर के सटीक सूर्योदय, तिथि और पारण मुहूर्त के लिए हमारे लाइव साधनों का उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 की तिथि, पारण व व्रत

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 कब है?+
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 स्मार्त मत मानने वालों के लिए रविवार, 23 अगस्त को है। एकादशी तिथि 23 अगस्त को प्रातः 02:02 से 24 अगस्त को प्रातः 04:20 (IST, नई दिल्ली) तक रहती है। वैष्णव इसे एक दिन बाद, सोमवार 24 अगस्त को रखते हैं। अपने परिवार या मंदिर की परंपरा का पालन करें; यहाँ दी गई मुख्य तिथि 23 अगस्त है।
पुत्रदा एकादशी 2026 का पारण समय क्या है?+
23 अगस्त को व्रत रखने वालों के लिए पारण — व्रत खोलना — द्वादशी को, सोमवार 24 अगस्त को, सूर्योदय के बाद लगभग प्रातः 05:55 (IST, नई दिल्ली) से किया जाता है। व्रत पारण मुहूर्त में और द्वादशी की समाप्ति से पूर्व खोलें। अपने शहर की सटीक अवधि पुष्टि कर लें।
इसे पुत्रदा एकादशी क्यों कहते हैं?+
पुत्रदा का अर्थ है “पुत्र या संतान देने वाली”। यह एकादशी विशेषकर वे दंपती रखते हैं जो संतान की कामना करते हैं और स्वस्थ संतान के आशीर्वाद के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं। वर्ष में दो पुत्रदा एकादशी होती हैं — एक पौष में और यह श्रावण में। संतान की कामना के अतिरिक्त इसे विष्णु के आशीर्वाद, सौभाग्य और पापों के नाश के लिए भी रखा जाता है।
पुत्रदा एकादशी व्रत कैसे रखा जाता है?+
दशमी की संध्या को हल्का भोजन करें, फिर एकादशी भर व्रत रखें — या तो निर्जल या फल और दूध पर। प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें — तुलसी, पुष्प, दीप और धूप अर्पित करें; पुत्रदा एकादशी कथा पढ़ें या सुनें, और दिन जप व भजन में बिताएँ। अनाज, चावल, प्याज़ और लहसुन से परहेज़ करें। व्रत द्वादशी के पारण मुहूर्त में खोलें, यथासंभव दान देने के बाद।
पुत्रदा एकादशी की कथा क्या है?+
कथा एक धर्मी परंतु संतानहीन राजा महीजित की है, जो उत्तराधिकारी न होने से दुखी था। उसके ऋषियों ने उसे रानी सहित पूर्ण श्रद्धा से भगवान विष्णु की आराधना करते हुए श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने का निर्देश दिया। व्रत के पुण्य से दंपती को योग्य पुत्र का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। यह कथा व्रत के समय पढ़ी जाती है, जो इस दिन की संतान-प्रदायक शक्ति का आश्वासन देती है।
सावन 2026 में कौन-सी दो एकादशियाँ पड़ती हैं?+
उत्तर भारत के सावन में दो एकादशियाँ पड़ती हैं — कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी, रविवार 9 अगस्त को, और शुक्ल पक्ष की श्रावण पुत्रदा एकादशी, रविवार 23 अगस्त को। कामिका मुख्यतः पापों के नाश के लिए रखी जाती है, जबकि पुत्रदा विशेषकर संतान के आशीर्वाद की कामना करने वाले रखते हैं।
स्रोत और अस्वीकरण: एकादशी तिथि और पारण समय नई दिल्ली के लिए स्विस एफेमेरिस से गणना कर पारंपरिक पंचांग से मिलाए गए हैं। स्मार्त और वैष्णव परंपराएँ इस एकादशी को भिन्न दिनों — क्रमशः 23 और 24 अगस्त — को मानती हैं, अतः अपने संप्रदाय या मंदिर की परंपरा का पालन करें। पारण मुहूर्त अन्य शहरों के लिए बदल सकता है; व्रत खोलने से पूर्व अपना स्थानीय सूर्योदय और द्वादशी समय अवश्य पुष्टि कर लें।