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महामृत्युंजय मंत्र — अर्थ, जाप विधि व लाभ

प्रामाणिक मंत्र, शब्दशः अर्थ, जाप विधि, 108 माला का नियम, आरोग्य व साहस के लाभ, और सावन में इसका विशेष स्थान।

A rudraksha mala and a ghee lamp before a Shivling, kept for the Mahamrityunjaya Mantra jaap
PanchangBodh Editorial
9 min read
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महामृत्युंजय मंत्र समस्त वैदिक मंत्रों में सबसे पूजनीय में से एक है — भगवान शिव को त्र्यम्बक (त्रिनेत्रधारी) रूप में आरोग्य, रक्षा और मृत्यु के भय से मुक्ति की प्रार्थना। यह ऋग्वेद (7.59.12) और यजुर्वेद में मिलता है, और मृत्युंजय अथवा त्र्यम्बकम् मंत्र भी कहलाता है।

नीचे प्रामाणिक मंत्र उसके शब्दशः अर्थ सहित, जाप विधि, माला के नियम और संख्या, जिन लाभों के लिए यह जपा जाता है, और सावन मास भर इसका विशेष स्थान क्यों है — यह सब दिया गया है।

महामृत्युंजय मंत्र

प्रामाणिक वैदिक पाठ और उसका अनुवाद

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

Om tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭi-vardhanam, urvārukam-iva bandhanān mṛtyor mukṣīya mā-amṛtāt.

अनुवाद

हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और आरोग्य व समृद्धि बढ़ाते हैं। जैसे पका खीरा अपनी बेल से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु से मुक्त करें — पर अमरता से नहीं।

शब्दशः अर्थ

मंत्र का हर शब्द और उसका भाव

यह मंत्र मृत्यु से भागने की याचना नहीं, बल्कि बंधन और भय से मुक्ति की, और अमृत से सदा एकरूप बने रहने की प्रार्थना है। हर शब्द इस प्रार्थना का एक अंश धारण करता है —

Om

आदि नाद, ईश्वर का मूल स्वर।

त्र्यम्बकम्

tryambakam

त्रिनेत्रधारी — भगवान शिव।

यजामहे

yajāmahe

हम पूजते हैं, हम आराधना करते हैं।

सुगन्धिम्

sugandhim

सुगंधित — जीवनदायी सुवास से व्याप्त।

पुष्टिवर्धनम्

puṣṭi-vardhanam

पोषण करने वाला, जो आरोग्य और समृद्धि बढ़ाता है।

उर्वारुकम् इव

urvārukam-iva

पके खीरे (ककड़ी) के समान (अपने डंठल से)।

बन्धनात्

bandhanāt

बंधन से — बेल से, अर्थात् सांसारिक आसक्ति से।

मृत्योः मुक्षीय

mṛtyor mukṣīya

हमें मृत्यु से मुक्त करें।

मा अमृतात्

mā-amṛtāt

पर अमरता से नहीं — अमृत से कभी वियुक्त न हों।

जाप विधि

मंत्र का जाप कैसे करें — क्रमवार

1

तैयारी और आसन

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिवलिंग अथवा शिव की प्रतिमा के समक्ष स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। घी का दीपक जलाएँ।

2

माला लें

108 दानों की रुद्राक्ष माला लें। अँगूठे और मध्यमा से हर दाना फेरें; सुमेरु (मुख्य दाना) कभी न लाँघें — वहीं से माला घुमा लें।

3

अर्थ सहित जाप

हर दाने पर पूरा मंत्र एक बार, स्पष्ट और बिना जल्दबाज़ी के, उसका अर्थ मन में रखते हुए बोलें — शिव से आरोग्य, भय से मुक्ति और अमरता की प्रार्थना। एक माला यानी 108 आवृत्तियाँ।

4

कृतज्ञता से समापन

पूर्ण होने पर शिव को प्रणाम करें, शिवलिंग पर जल अथवा पंचामृत अर्पित करें, और सबके आरोग्य व दीर्घायु की प्रार्थना करें। माला स्वच्छ रखें और इसी जाप के लिए सुरक्षित रखें।

जाप के नियम

माला की संख्या और साधना कैसे निभाएँ

  • 1एक माला यानी 108 आवृत्तियाँ; प्रतिदिन एक निश्चित संख्या (एक, तीन या ग्यारह माला) का संकल्प लेकर नियमित रखें।
  • 2प्रतिदिन एक ही समय और स्थान पर जाप करें — भोर (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा प्रदोष की संध्या श्रेष्ठ है।
  • 3हर शब्द का सही और अविचल उच्चारण करें; ध्वनि और अर्थ दोनों महत्त्वपूर्ण हैं।
  • 4मन को शांत और एकाग्र रखें; जाप के बीच बातचीत से बचें और गिनती माला पर रखें, ऊँची आवाज़ में नहीं।
  • 5एक स्वच्छ, शांत कोना और एक समर्पित माला रखें; माला को भूमि से न छूने दें।

मंत्र के लाभ

यह जाप किसलिए किया जाता है

महामृत्युंजय मंत्र आरोग्य और रोग से उबरने के लिए, दीर्घायु के लिए, तथा साहस और मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए जपा जाता है। श्रद्धालु इसे रक्षा, मानसिक शांति, और अष्टम शनि अथवा किसी कठिन महादशा जैसी ग्रह-पीड़ा की शांति के लिए भी रखते हैं। भक्ति की दृष्टि में इसका सच्चा फल कोई एक परिणाम नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा और सामीप्य है, जो आशुतोष हैं — सच्ची और नियमित भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाने वाले।

सावन में यह मंत्र

श्रावण भर यह जाप क्यों श्रेष्ठ माना जाता है

पूरा सावन मास भगवान शिव को प्रिय है, इसलिए इसमें की गई हर शिव उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। बहुत श्रद्धालु पूरे सावन भर प्रतिदिन महामृत्युंजय जाप रखते हैं — विशेषकर सोमवार, प्रदोष तिथि और शिवरात्रि को — अपने और परिवार के आरोग्य व दीर्घायु के लिए। सावन के पहले सोमवार से आरंभ कर अंतिम तक निभाया गया संकल्प एक प्रिय और प्रचलित साधना है।

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सावन में संकल्प

सावन के पहले सोमवार से जाप आरंभ कर अंतिम सोमवार तक निभाना एक प्रिय साधना है। सावन के सभी सोमवार और रुद्राभिषेक की विधि अलग पृष्ठों पर दी गई है।सावन सोमवार तिथियाँ →रुद्राभिषेक विधि →
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अपने दैनिक जाप का समय सही रखें

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महामृत्युंजय मंत्र, उसका अर्थ और जाप

महामृत्युंजय मंत्र क्या है?+
महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को त्र्यम्बक (त्रिनेत्रधारी) रूप में समर्पित एक वैदिक मंत्र है, जो ऋग्वेद (7.59.12) और यजुर्वेद में मिलता है। मृत्युंजय अथवा त्र्यम्बकम् मंत्र भी कहलाने वाला यह आरोग्य, रक्षा और मृत्यु के भय से मुक्ति की प्रार्थना है, जबकि अमृत से सदा एकरूप रहने की कामना करता है। इसका प्रामाणिक पाठ है — "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है?+
इसका अर्थ है — "हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और आरोग्य व समृद्धि बढ़ाते हैं। जैसे पका खीरा अपनी बेल से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु से मुक्त करें — पर अमरता से नहीं।" यह प्रार्थना मृत्यु से भागने की नहीं, बल्कि बंधन और भय से मुक्ति की, और अमृत से एकरूप बने रहने की है।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप कैसे करें?+
शिवलिंग के समक्ष पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें, घी का दीपक जलाएँ, और 108 दानों की रुद्राक्ष माला पर जाप करें — हर दाने पर पूरा मंत्र एक बार, स्पष्ट और बिना जल्दबाज़ी के, उसका अर्थ मन में रखते हुए। प्रतिदिन कम से कम एक माला (108 आवृत्तियाँ), किसी निश्चित समय जैसे भोर या प्रदोष की संध्या में पूरी करें। सुमेरु (मुख्य दाना) न लाँघें — वहीं से माला घुमा लें।
मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?+
माला का एक चक्र 108 आवृत्तियों का होता है, जो पारंपरिक न्यूनतम दैनिक संख्या है। बहुत लोग एक निश्चित संख्या का संकल्प रखते हैं — प्रतिदिन एक, तीन या ग्यारह माला — और उसे नियमित निभाते हैं। किसी विशेष प्रयोजन के लिए बड़े अनुष्ठान (जैसे सवा लाख जाप) प्रायः पुरोहित के साथ किए जाते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र के क्या लाभ हैं?+
यह मंत्र आरोग्य और रोग से उबरने के लिए, दीर्घायु के लिए, तथा साहस और मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए जपा जाता है। इसे रक्षा, मानसिक शांति, और ग्रह-पीड़ा की शांति के लिए भी रखा जाता है। भक्ति की दृष्टि में इसका सच्चा फल भगवान शिव की कृपा और सामीप्य है।
सावन में महामृत्युंजय मंत्र का विशेष महत्त्व क्यों है?+
पूरा सावन मास भगवान शिव को प्रिय है, इसलिए इसमें की गई कोई भी शिव उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु सावन भर महामृत्युंजय जाप रखते हैं — विशेषकर सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि को — अपने और परिवार के आरोग्य व दीर्घायु के लिए।
स्रोत और अस्वीकरण: ऊपर दिया गया मंत्र पाठ और शब्दशः अर्थ प्रामाणिक वैदिक पाठ (ऋग्वेद 7.59.12 / यजुर्वेद) के अनुसार है। भिन्न भाष्यों में कुछ शब्दों की व्याख्या थोड़ी भिन्न हो सकती है। यह भक्ति और सांस्कृतिक मार्गदर्शन है, चिकित्सा परामर्श नहीं — मंत्र समुचित चिकित्सा के साथ जपा जाता है, उसके स्थान पर कभी नहीं। उच्चारण अथवा विधिवत अनुष्ठान के लिए किसी योग्य गुरु या पुरोहित से सीखें।