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राहु का नक्षत्र गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि राहु जिस नक्षत्र में बैठता है, उसके गुणों को कई गुना बढ़ा देता है। राहु प्रत्येक नक्षत्र में लगभग 7-8 माह रहता है — ये अवधि डेढ़ वर्ष के राशि गोचर में अलग-अलग चरण बनाती हैं। स्वाति में राहु स्वतंत्रता और अस्थिरता बढ़ाता है, आर्द्रा में उथल-पुथल और सफलता दोनों तीव्र होती हैं, और मघा में सत्ता व पैतृक मान्यता की लालसा प्रबल होती है। राहु के नक्षत्र को समझकर इसके रहस्यमय प्रभाव का असली स्वरूप पहचाना जा सकता है।
नक्षत्र गोचर सारणी 2026
2 परिवर्तनशतभिषा (Shatabhisha)
वर्तमानकुंभ राशि में · स्वामी: राहु · देवता: Varuna
23 नव 2025, 12:33 अपराह्न → 2 अग 2026, 3:12 पूर्वाह्न
धनिष्ठा (Dhanishta)
कुंभ राशि में · स्वामी: मंगल · देवता: Vasus
2 अग 2026, 3:12 पूर्वाह्न → 6 फर 2027, 8:11 अपराह्न
नक्षत्र गोचर क्या है?
नक्षत्र 13°20' के भाग हैं — राशि से सूक्ष्म। मुहूर्त निर्णय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।