2025 Pradosh Vrat कैलेंडर
New Delhi के लिए गणना किया गया समय
शनि प्रदोष
शनि, जनवरी 11, 2025
पौष, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और शनि
शनि दोष शमन, बाधाओं में राहत और कर्मिक ऋण से मुक्ति के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सोम प्रदोष
सोम, जनवरी 27, 2025
माघ, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और चंद्रदेव
सर्वकामना सिद्धि, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मंगलकारी।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सोम प्रदोष
सोम, फ़रवरी 10, 2025
माघ, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और चंद्रदेव
सर्वकामना सिद्धि, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मंगलकारी।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भौम प्रदोष
मंगल, फ़रवरी 25, 2025
फाल्गुन, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और मंगल
बल, साहस और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल; बाधा निवारण।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भौम प्रदोष
मंगल, मार्च 11, 2025
फाल्गुन, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और मंगल
बल, साहस और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल; बाधा निवारण।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
गुरु प्रदोष
गुरु, मार्च 27, 2025
चैत्र, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और गुरु
धन, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण का संयोग।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
गुरु प्रदोष
गुरु, अप्रैल 10, 2025
चैत्र, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और गुरु
धन, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण का संयोग।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भृगु प्रदोष
शुक्र, अप्रैल 25, 2025
वैशाख, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और शुक्र
सौभाग्य, सौंदर्य और दाम्पत्य‑संतुलन के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भृगु प्रदोष
शुक्र, मई 9, 2025
वैशाख, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और शुक्र
सौभाग्य, सौंदर्य और दाम्पत्य‑संतुलन के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भानु प्रदोष
रवि, जून 8, 2025
ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष
देवता: Lord Shiva with Sun God
Bestows health, vitality, and removes obstacles in career
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सोम प्रदोष
सोम, जून 23, 2025
आषाढ़, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और चंद्रदेव
सर्वकामना सिद्धि, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मंगलकारी।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भौम प्रदोष
मंगल, जुलाई 8, 2025
आषाढ़, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और मंगल
बल, साहस और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल; बाधा निवारण।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भौम प्रदोष
मंगल, जुलाई 22, 2025
श्रावण, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और मंगल
बल, साहस और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल; बाधा निवारण।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सौम्य प्रदोष
बुध, अगस्त 6, 2025
श्रावण, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और बुध
बुद्धि, अध्ययन और संचार‑कौशल में वृद्धि।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सौम्य प्रदोष
बुध, अगस्त 20, 2025
भाद्रपद, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और बुध
बुद्धि, अध्ययन और संचार‑कौशल में वृद्धि।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भृगु प्रदोष
शुक्र, सितंबर 5, 2025
भाद्रपद, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और शुक्र
सौभाग्य, सौंदर्य और दाम्पत्य‑संतुलन के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भृगु प्रदोष
शुक्र, सितंबर 19, 2025
Ashwina, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और शुक्र
सौभाग्य, सौंदर्य और दाम्पत्य‑संतुलन के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
शनि प्रदोष
शनि, अक्टूबर 4, 2025
Ashwina, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और शनि
शनि दोष शमन, बाधाओं में राहत और कर्मिक ऋण से मुक्ति के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
शनि प्रदोष
शनि, अक्टूबर 18, 2025
कार्तिक, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और शनि
शनि दोष शमन, बाधाओं में राहत और कर्मिक ऋण से मुक्ति के लिए शुभ।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सोम प्रदोष
सोम, नवंबर 3, 2025
कार्तिक, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और चंद्रदेव
सर्वकामना सिद्धि, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मंगलकारी।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सोम प्रदोष
सोम, नवंबर 17, 2025
मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और चंद्रदेव
सर्वकामना सिद्धि, मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मंगलकारी।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
भौम प्रदोष
मंगल, दिसंबर 2, 2025
मार्गशीर्ष, शुक्ल पक्ष
देवता: भगवान शिव और मंगल
बल, साहस और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल; बाधा निवारण।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
सौम्य प्रदोष
बुध, दिसंबर 17, 2025
पौष, कृष्ण पक्ष
देवता: भगवान शिव और बुध
बुद्धि, अध्ययन और संचार‑कौशल में वृद्धि।
प्रदोष समय
प्रदोष संध्या काल
प्रदोष व्रत के बारे में
भगवान शिव के प्रति संध्या काल में की जाने वाली पवित्र पूजा
प्रदोष व्रत हिंदू कैलेंडर का एक पवित्र दिन है जो हर महीने दो बार आता है - शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। यह भगवान शिव को समर्पित है।
शिव पुराण के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत करने से हजारों अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है और विशेष रूप से संध्या काल में भगवान शिव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है।
सात प्रकार के प्रदोष व्रत हैं: सोम प्रदोष (सबसे शुभ), भौम प्रदोष, सौम्य प्रदोष, गुरु प्रदोष, भृगु प्रदोष, शनि प्रदोष (महा प्रदोष)।
"Pradosh Vrat दिव्य कृपा का दिन है"
Pradosh Vrat को श्रद्धा से मनाने का वर्णन ग्रंथों में मिलता है—ऐसा पालन हजारों यज्ञ और तीर्थों के समान पुण्य देता है।
प्रदोष व्रत दिशानिर्देश
भक्ति और आध्यात्मिक अनुशासन के साथ प्रदोष व्रत का पालन करने के लिए पारंपरिक दिशानिर्देश।
- प्रदोष व्रत के दिन अनाज, दाल और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए
- फल, दूध, मिठाई और साबुदाना खाया जा सकता है
- संध्या काल में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए
- बिल्व पत्र, फूल और दीपक अर्पित करना चाहिए
- शिव लिंगम अभिषेक करें
- बिल्व पत्र अर्पित करें
- घी का दीपक जलाएं
- ओम नमः शिवाय का जाप करें
- प्रदोष व्रत से पहले हल्का भोजन करें
- भारी या मसालेदार भोजन से बचें
- पर्याप्त आराम करें
- कठोर शारीरिक गतिविधियों से बचें
महत्वपूर्ण अनुस्मारक
विशिष्ट पालन प्रथाओं के लिए हमेशा अपने आध्यात्मिक गुरु या पारिवारिक परंपराओं से परामर्श लें। समय स्थान और स्थानीय रीति‑रिवाजों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। अपने शरीर की सुनें और केवल रीति‑रिवाज के बजाय भक्ति के साथ अभ्यास करें।