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अमावस्या तिथियां और समय 2026

अमावस्या (नया चंद्रमा) तिथियां और सटीक तिथि समय 2026 के लिए। New Delhi के लिए दिखाया गया समय। स्थानीय समय देखने के लिए अलग शहर चुनें।

12 पवित्र दिन
सटीक समय
नई दिल्ली
अगला:श्रावण अमावस्या (Hariyali अमावस्या), 12 अगस्त, नई दिल्ली
2025
वर्ष
2026
2027
अगला:Shravana Amavasya (Hariyali Amavasya), 12 अगस्त, New Delhi

2026 Amavasya कैलेंडर

New Delhi के लिए गणना किया गया समय

माघ अमावस्या (मौनी अमावस्या)

रवि, जनवरी 18, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:रवि, जनवरी 18, 2026, 12:05 पूर्वाह्न
समाप्ति:सोम, जनवरी 19, 2026, 1:22 पूर्वाह्न

सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक अमावस्या — मौन (मौन‑व्रत) और पवित्र नदी‑स्नान (विशेषकर प्रयाग) के साथ मनाई जाती है। अनुशासित साधना से जन्मों का कर्म‑शोधन माना जाता है।

फाल्गुन अमावस्या

मंगल, फ़रवरी 17, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:सोम, फ़रवरी 16, 2026, 5:35 अपराह्न
समाप्ति:मंगल, फ़रवरी 17, 2026, 5:31 अपराह्न

जब शीत ऋतु समाप्त होकर वसंत आता है, वर्ष की अंतिम अमावस्या पुराना छोड़ने और नवीनीकरण अपनाने का अवसर देती है। वर्षभर के संरक्षण और मार्गदर्शन हेतु पूर्वजों का तर्पण करें।

चैत्र अमावस्या

गुरु, मार्च 19, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:बुध, मार्च 18, 2026, 8:26 पूर्वाह्न
समाप्ति:गुरु, मार्च 19, 2026, 6:54 पूर्वाह्न

वसंत के प्रस्फुटन और प्रकृति के जागरण में, चैत्र अमावस्या नई संकल्पनाओं के बीज बोने का निमंत्रण देती है — अपने मार्गदर्शक पूर्वजों का सम्मान करते हुए।

वैशाख अमावस्या

गुरु, अप्रैल 16, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:गुरु, अप्रैल 16, 2026, 8:12 अपराह्न
समाप्ति:शुक्र, अप्रैल 17, 2026, 5:22 अपराह्न

During the peak of summer heat, this sacred day reminds us to offer water and food to our departed elders, seeking their blessings for prosperity and peace in our homes.

ज्येष्ठ अमावस्या

शनि, मई 16, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:शनि, मई 16, 2026, 5:12 पूर्वाह्न
समाप्ति:रवि, मई 17, 2026, 1:31 पूर्वाह्न

Known as the month of Lord Vishnu, this Amavasya calls for inner purification through fasting and meditation, helping you find calm amidst life's intensity.

अमावस्या

सोम, जून 15, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:रवि, जून 14, 2026, 12:20 अपराह्न
समाप्ति:सोम, जून 15, 2026, 8:24 पूर्वाह्न

New Moon (Amavasya) — suitable for introspection, tarpan, and charity.

आषाढ़ अमावस्या

मंगल, जुलाई 14, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:सोम, जुलाई 13, 2026, 6:50 अपराह्न
समाप्ति:मंगल, जुलाई 14, 2026, 3:14 अपराह्न

As monsoon rains arrive, this day symbolizes washing away past karmas. Devotees perform tarpan near rivers, connecting with ancestral souls through the sacred flow of water.

श्रावण अमावस्या (Hariyali अमावस्या)

बुध, अगस्त 12, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:बुध, अगस्त 12, 2026, 1:54 पूर्वाह्न
समाप्ति:बुध, अगस्त 12, 2026, 11:07 अपराह्न

Falling in the greenest heart of the monsoon in Lord Shiva's month, Hariyali Amavasya is kept with tree-planting, charity, and remembrance of the ancestors.

भाद्रपद अमावस्या

शुक्र, सितंबर 11, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:गुरु, सितंबर 10, 2026, 10:34 पूर्वाह्न
समाप्ति:शुक्र, सितंबर 11, 2026, 8:57 पूर्वाह्न

The Amavasya of Bhadrapada, observed with tarpan and charity for the departed as the monsoon draws to a close.

आश्विन अमावस्या (Mahalaya / Sarva Pitru अमावस्या)

शनि, अक्टूबर 10, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:शुक्र, अक्टूबर 09, 2026, 9:36 अपराह्न
समाप्ति:शनि, अक्टूबर 10, 2026, 9:20 अपराह्न

The most important Amavasya for ancestor worship — it concludes Pitru Paksha with Sarva Pitru Shraddha, when families honour every departed ancestor, especially those whose tithi of passing is unknown.

कार्तिक अमावस्या (दिवाली)

सोम, नवंबर 9, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:रवि, नवंबर 08, 2026, 11:29 पूर्वाह्न
समाप्ति:सोम, नवंबर 09, 2026, 12:32 अपराह्न

दिवाली सबसे अंधेरी रात्रि को दीपों के उत्सव, समृद्धि और नई शुरुआत में रूपांतरित करती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या

मंगल, दिसंबर 8, 2026
🌑
अमावस्या तिथि समय
शुरू:मंगल, दिसंबर 08, 2026, 4:13 पूर्वाह्न
समाप्ति:बुध, दिसंबर 09, 2026, 6:22 पूर्वाह्न

जैसे‑जैसे शीत ऋतु आरम्भ होती है, यह अंतर्मुखी दिन ध्यान और आत्म‑चिंतन के लिए उपयुक्त है—आने वाले वर्ष के लिए मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी का समय।

अमावस्या के बारे में

अमावस्या हिंदू चंद्र कैलेंडर में नव चंद्र दिवस है, जिसे आध्यात्मिक चिंतन, पितृ‑तर्पण और आंतरिक शुद्धि के लिए मनाया जाता है। नीचे आपको अपने चुने हुए वर्ष के लिए शहर‑अनुसार सटीक तिथि आरंभ और समाप्ति समय मिलेंगे।

महत्व

अमावस्या नवीनीकरण और आत्म‑चिंतन का प्रतीक है। कई भक्त पूर्वजों के लिए तर्पण करते हैं और सात्त्विक अनुशासन बनाए रखते हैं।

अनुष्ठान

सामान्य पालन में सरल भोजन/उपवास, परंपरागत तर्पण, ध्यान, मंत्र‑जप और दान शामिल हैं।

समय गणना स्रोत

सभी समय दिए गए वर्ष के लिए सटीक चंद्र गणनाओं के आधार पर शहर के समय‑क्षेत्र अनुसार निकाले गए हैं।

"अमावस्या दिव्य कृपा का दिन है"

अमावस्या को श्रद्धा से मनाने का वर्णन ग्रंथों में मिलता है—ऐसा पालन हजारों यज्ञ और तीर्थों के समान पुण्य देता है।

परंपरा और अनुष्ठान

अमावस्या का पालन क्षेत्र और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न होता है। निम्नलिखित संक्षिप्त सुझावों को सम्मानपूर्वक अपनाया जा सकता है।

पवित्रता और संयम
  • जहाँ उपयुक्त हो सरल सात्त्विक भोजन या उपवास करें
  • शांत वाणी और आत्म‑चिंतन का अभ्यास करें
  • आंतरिक स्पष्टता और शांति के लिए प्रार्थना करें
आध्यात्मिक साधना
  • मंत्र‑जप और शांत वातावरण में ध्यान करें
  • पारिवारिक परंपरा के अनुसार पवित्र ग्रंथ पढ़ें
  • जरूरतमंदों को भोजन या आवश्यक वस्तुएं दान करें
पितृ तर्पण (जहाँ प्रथागत हो)
  • बड़ों या पुजारी के मार्गदर्शन में तर्पण करें
  • सुबह के समय को प्राथमिकता दें; स्थानीय रीति और कैलेंडर का सम्मान करें
  • मन शांत और प्रार्थनामय रखें

महत्वपूर्ण अनुस्मारक

विशिष्ट पालन प्रथाओं के लिए हमेशा अपने आध्यात्मिक गुरु या पारिवारिक परंपराओं से परामर्श लें। समय स्थान और स्थानीय रीति‑रिवाजों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। अपने शरीर की सुनें और केवल रीति‑रिवाज के बजाय भक्ति के साथ अभ्यास करें।

अमावस्या प्रश्नोत्तर — नियम, उपवास और महत्व

अमावस्या (नया चंद्रमा) क्या है?

अमावस्या हिंदू चंद्र पंचांग में नया चंद्रमा का दिन है। इसे आंतरिक शुद्धि, पूर्वजों की स्मृति (जहां प्रथा हो तर्पण), और आध्यात्मिक नवीनीकरण के लिए मनाया जाता है।

क्या समय शहर के अनुसार बदलता है?

हां। समय आपके चुने गए शहर के टाइमज़ोन और खगोलीय डेटा के आधार पर गणना किया जाता है, इसलिए यह स्थान और मौसम के अनुसार भिन्न होता है।

क्या तिथि समय अमावस्या की शुरुआत और समाप्ति दर्शाते हैं?

दिखाए गए समय चयनित शहर के स्थानीय समय में अमावस्या तिथि की शुरुआत और समाप्ति हैं।

मैं अमावस्या का पालन कैसे करूं?

पारिवारिक परंपरा का पालन करें: सात्विक आहार या उपवास, प्रार्थना, ध्यान, मंत्र जप और दान। जहां प्रथा हो वहां तर्पण करें।

क्या अमावस्या पर कोई नया काम शुरू करना शुभ है?

आमतौर पर, अमावस्या को नए भौतिक कार्यों, विवाह या महत्वपूर्ण खरीदारी शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है। हालाँकि, यह आध्यात्मिक अभ्यास और दान के लिए अत्यधिक शुभ है।

हमें अमावस्या के दिन किन चीजों से बचना चाहिए?

पारंपरिक रूप से मांसाहारी भोजन, शराब, नई यात्रा शुरू करने और बड़े वित्तीय लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है। सादगी और भक्ति पर ध्यान देना चाहिए।

कौन सी अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण होती है?

महालय अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) और मौनी अमावस्या को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सोमवती अमावस्या (सोमवार को पड़ने वाली) भी आध्यात्मिक अभ्यास के लिए अत्यधिक पूजनीय है।

क्या हम अमावस्या पर बाल धो सकते हैं?

कई पारंपरिक परिवार अमावस्या पर बाल धोने, नाखून काटने या शेविंग करने से मना करते हैं, क्योंकि यह दिन सादगी और संयम का पालन करने के लिए होता है।

2026 में New Delhi को 12 अमावस्याएँ मिलती हैं, जिनमें Magha Amavasya (Mauni Amavasya), Ashwina Amavasya (Mahalaya / Sarva Pitru Amavasya) शामिल हैं। ये तिथियाँ पितृ‑तर्पण और मंदिर अर्पण के लिए विशेष मानी जाती हैं—पहले से चिन्हित करें।

New Delhi के लिए समय गणना किए गए हैं। पालन परिवार/क्षेत्र परंपरा के अनुसार बदल सकता है।

महीने-दर-महीने अमावस्या

जनवरी 2026: जनवरी 2026 में अमावस्या रविवार, 18 जनवरी को पड़ती है।

फ़रवरी 2026: फ़रवरी 2026 में अमावस्या मंगलवार, 17 फ़रवरी को पड़ती है।

मार्च 2026: मार्च 2026 में अमावस्या गुरुवार, 19 मार्च को पड़ती है।

अप्रैल 2026: अप्रैल 2026 में अमावस्या गुरुवार, 16 अप्रैल को पड़ती है।

मई 2026: मई 2026 में अमावस्या शनिवार, 16 मई को पड़ती है।

जून 2026: जून 2026 में अमावस्या सोमवार, 15 जून को पड़ती है।

जुलाई 2026: जुलाई 2026 में अमावस्या मंगलवार, 14 जुलाई को पड़ती है।

अगस्त 2026: अगस्त 2026 में अमावस्या बुधवार, 12 अगस्त को पड़ती है।

सितंबर 2026: सितंबर 2026 में अमावस्या शुक्रवार, 11 सितंबर को पड़ती है।

अक्टूबर 2026: अक्टूबर 2026 में अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर को पड़ती है।

नवंबर 2026: नवंबर 2026 में अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर को पड़ती है।

दिसंबर 2026: दिसंबर 2026 में अमावस्या मंगलवार, 8 दिसंबर को पड़ती है।

पितरों की अपनी तिथि: अमावस्या पितृ-कर्म का दिन क्यों बनी

हिन्दू पंचांग में हर तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच की कोणीय दूरी से तय होती है। कृष्ण पक्ष में यह दूरी घटती जाती है और जिस क्षण दोनों एक ही अंश पर आ मिलते हैं, वही अमावस्या का पूर्ण बिंदु है। उस रात चंद्रमा का प्रकाशित भाग पूरी तरह पृथ्वी से विमुख रहता है, इसलिए आकाश में चंद्र-दर्शन नहीं होता। इसी युति का शास्त्रीय नाम 'दर्श' है और इसी से इस तिथि को दर्श अमावस्या कहा जाता है।

अब प्रश्न यह कि यह अंधकारमयी तिथि पितरों की क्यों मानी गई। गरुड़ पुराण तथा धर्मशास्त्र के श्राद्ध-प्रकरणों में पितृलोक की काल-गणना मनुष्य-लोक से भिन्न बताई गई है — मनुष्यों का एक मास पितरों का एक अहोरात्र होता है, और अमावस्या उनके मध्याह्न के समान है, अर्थात् उनके भोजन का समय। मान्यता है कि इसी कारण इस तिथि पर अर्पित जल और अन्न पितरों तक सबसे सीधे पहुँचता है। यही तर्पण का आधार है — काले तिल मिला जल तीन पीढ़ियों के पूर्वजों का नाम लेते हुए दिया जाता है — और यही मासिक दर्श श्राद्ध का भी, जिसे कई परिवार वार्षिक तिथि-श्राद्ध की प्रतीक्षा किए बिना हर अमावस्या पर करते हैं।

इस मासिक क्रम की वार्षिक परिणति है महालया, जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। आश्विन मास के पितृपक्ष का समापन इसी तिथि पर होता है। इसकी विशेषता यह है कि यह किसी को छोड़ती नहीं — जिन पूर्वजों की मृत्यु-तिथि ज्ञात न हो, स्मरण न रही हो, या पखवाड़े में जिनका श्राद्ध छूट गया हो, उन सबके लिए इस दिन किया गया श्राद्ध पर्याप्त माना गया है। इसीलिए जो परिवार पितृपक्ष में और कुछ न भी करें, वे भी इस एक दिन अवश्य जुटते हैं।

इन कर्मों के साथ-साथ स्नान-दान की परंपरा चलती है — भोर में नदी, विशेषकर संगम, पर स्नान और उसके बाद तिल, अन्न, वस्त्र या भोजन का दान। धर्मशास्त्र में बहता जल पितृ-अर्पण का उचित माध्यम माना गया है, इसीलिए हरिद्वार से प्रयागराज और गया तक के घाट हर अमावस्या की सुबह भरे रहते हैं। ये सारी बातें परंपरागत मान्यताओं के रूप में, शिक्षा की दृष्टि से यहाँ दी गई हैं; इन्हें कितना अपनाएँ, यह निर्णय अपनी कुल-परंपरा, स्वास्थ्य और परिस्थितियों के अनुसार लें।

सोमवती से हरियाली तक: वार और मास के साथ बदलता अमावस्या का स्वरूप

हर अमावस्या का व्यावहारिक महत्व एक-सा नहीं होता। तिथि तो हर चांद्र मास में लौटती है, पर परंपरा किसी विशेष अमावस्या को दो कसौटियों पर तौलती है — वह किस वार को पड़ी है, और किस मास में।

वार की कसौटी से दो सर्वाधिक मान्य संयोग बनते हैं। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या सोमवती कहलाती है। सोम अर्थात् चंद्रमा — उसके अपने वार पर उसी की सबसे अंधेरी तिथि का आना परंपरा में दुर्लभ और विशेष संयोग माना गया है। इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ पीपल की परिक्रमा करती हैं और नदी-स्नान का विशेष फल बताया गया है; वर्ष में ऐसे सोमवार गिने-चुने ही आते हैं, कभी-कभी तो केवल एक या दो। दूसरा संयोग है शनिवार का — शनि अमावस्या, जिसे कई क्षेत्रों में शनिश्चरी अमावस्या भी कहते हैं। पौराणिक वंशावली में शनि सूर्य और छाया के पुत्र हैं; शनि की शांति और पितृ-कर्म, दोनों की प्रकृति गंभीर, संयमी अनुष्ठानों वाली है, इसलिए शनिवार की अमावस्या पर शनि मंदिरों में वर्ष की सबसे बड़ी भीड़ उमड़ती है और शनि-शांति तथा तर्पण प्रायः साथ-साथ किए जाते हैं।

मास की कसौटी से दो और नाम मिलते हैं। माघ मास की अमावस्या मौनी अमावस्या है — मौन की तिथि, जिस पर व्रती दिन भर वाणी का संयम रखते हैं; मान्यता यह कि जिस दिन मन के कारक चंद्रमा का प्रकाश शून्य हो, उस दिन वाणी को विश्राम देना ही उपयुक्त साधना है। प्रयागराज के माघ स्नान और कल्पवास की परंपरा में यही सबसे बड़ा स्नान-दिवस है। श्रावण मास में आती है हरियाली अमावस्या — वर्षा से धरती हरी हो चुकी होती है, इसलिए इस दिन वृक्षारोपण और हरी-भरी धरती के प्रति कृतज्ञता की परंपरा है; यहीं से हरियाली तीज और श्रावण सोमवार के पर्व-क्रम का उल्लास आरंभ होता है।

इन चारों — सोमवती, शनि, मौनी और हरियाली — में से प्रत्येक के लिए इसी वेबसाइट पर अलग विस्तृत पृष्ठ उपलब्ध है, जहाँ उसकी तिथियाँ, समय और पूरी परंपरा दी गई है।

वार आखिर मायने क्यों रखता है? पंचांग किसी भी दिन को 5 अंगों का योग मानता है — वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। मुहूर्त-ग्रंथों में वार और तिथि के कुछ संयोग ऐसे बताए गए हैं जिनमें दोनों अंग एक-दूसरे का बल बढ़ाते हैं। सोमवार या शनिवार की अमावस्या इसी सिद्धांत का सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है — तिथि वही, पर वार बदलते ही उस दिन का स्वरूप और उसकी मान्यता बदल जाती है।

एक सुविचारित विराम: अमावस्या पर परंपरा क्या टालती है, और किस ओर मुड़ती है

लोक-व्यवहार में अमावस्या को नए काम आरंभ करने के लिए नहीं चुना जाता — गृहप्रवेश, विवाह, नई दुकान का उद्घाटन, बड़ी खरीद, सब इस तिथि पर टाल दिए जाते हैं। मुहूर्त-ग्रंथ भी शुभ कार्यों की तिथि-सूची में अमावस्या को स्थान नहीं देते। इसका कारण भय नहीं, एक सोचा-समझा तर्क है। वैदिक चिंतन में चंद्रमा और मन का गहरा संबंध बताया गया है — पुरुष सूक्त का प्रसिद्ध वाक्य है 'चन्द्रमा मनसो जातः', अर्थात् चंद्रमा मन से उत्पन्न हुआ। ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक ग्रह है। जिस रात आकाश में चंद्रमा का प्रकाश शून्य हो, उस दिन मन की शक्ति भी क्षीण मानी गई — और जिस काम में उत्साह, संकल्प और जन-समर्थन चाहिए, उसके लिए ऐसा दिन अनुपयुक्त ठहराया गया।

पर इससे यह निष्कर्ष निकालना भूल होगी कि अमावस्या अशुभ दिन है। परंपरा इसे निषेध का नहीं, दिशा-परिवर्तन का दिन मानती है — बाहर की दौड़ थमती है तो भीतर और अतीत की ओर मुड़ने का अवसर बनता है। इसीलिए कुछ कर्म इस तिथि पर विशेष रूप से उपयुक्त माने गए हैं: पितृ-कर्म यानी तर्पण और श्राद्ध; संध्या के समय दीपदान — पीपल के नीचे या नदी-तट पर तिल के तेल का दीपक; जप और ध्यान, जिन्हें दिन की स्थिरता विशेष रूप से रास आती है; तथा यथाशक्ति दान। कई साधक अमावस्या को उपवास या एकभुक्त (दिन में एक बार भोजन) रखते हैं, ताकि दिन की अंतर्मुखी प्रकृति के अनुरूप शरीर भी हल्का रहे।

मंदिर-परंपराओं में यह तिथि दो विशेष अनुष्ठानों से जुड़ी है। कालसर्प दोष की शांति-पूजा — जो तब बताई जाती है जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाएँ — त्र्यंबकेश्वर और कालहस्ती जैसे क्षेत्रों में मुख्यतः अमावस्या को ही कराई जाती है। इसी तरह पितृ दोष की शांति के लिए भी अमावस्या, विशेषकर सोमवती या सर्वपितृ अमावस्या, उपयुक्त मानी जाती है। तर्क दोनों जगह एक ही है — पितरों और छाया-ग्रहों से जुड़े कर्म उसी तिथि पर सबसे सार्थक माने गए जो स्वयं पितरों की है।

एक बात स्पष्ट रहे — उपवास, दीपदान, जप और दोष-शांति से जुड़ी ये सारी बातें परंपरागत मान्यताओं के रूप में, केवल जानकारी और शिक्षा की दृष्टि से यहाँ रखी गई हैं। इन्हें अपनाने का निर्णय अपनी कुल-परंपरा, स्वास्थ्य और विवेक के अनुसार लें; उपवास से पहले चिकित्सकीय परामर्श उचित रहता है, विशेषकर तब जब कोई स्वास्थ्य-समस्या पहले से चल रही हो।

एक तिथि, दो तारीखें: अमावस्या का समय पंचांग की दृष्टि से कैसे पढ़ें

पंचांग की तिथि और कैलेंडर की तारीख एक नहीं हैं — अमावस्या का समय पढ़ते हुए यही पहला सूत्र याद रखें। तिथि सूर्य और चंद्रमा की पारस्परिक गति से तय होती है, इसलिए वह किसी भी क्षण — दोपहर, आधी रात, भोर — आरंभ या समाप्त हो सकती है। उसकी अवधि भी घटती-बढ़ती रहती है: लगभग 20 से 27 घंटे तक। परिणाम यह कि अमावस्या तिथि प्रायः दो कैलेंडर-दिनों में फैली रहती है — मान लें, एक दिन दोपहर से अगले दिन दोपहर तक।

तब 'अमावस्या किस दिन है' का उत्तर कैसे तय हो? यहीं उदया तिथि का नियम काम करता है: जिस दिन सूर्योदय के क्षण अमावस्या तिथि विद्यमान हो, वही दिन अमावस्या का माना जाता है। स्नान, दान और सामान्य व्रत इसी सूर्योदय-आधारित दिन से जुड़ते हैं, और इस पृष्ठ की तालिका में भी यही उदया तिथि वाली तारीख दी गई है। तिथि का आरंभ भले पिछले दिन हो चुका हो, व्रती के लिए निर्णायक सूर्योदय ही है।

पर हर कर्म का समय-सूत्र एक नहीं होता, और सजग पाठक को लाभ यहीं मिलता है। श्राद्ध और तर्पण के लिए धर्मशास्त्र अपराह्न काल — दिनमान का उत्तरार्ध — को प्रधान मानता है, क्योंकि वह अवधि पितरों की मानी गई है। जब तिथि का फैलाव कुछ टेढ़ा पड़े, तो श्राद्ध का दिन और स्नान-दान का दिन अलग हो सकते हैं: श्राद्ध उस दिन होगा जिस दिन अपराह्न में अमावस्या व्याप्त हो। इसी तरह दर्श — सूर्य और चंद्रमा की ठीक युति का क्षण — एक और भेद है; वह तालिका में दिए गए दिन से पहले की संध्या में भी पड़ सकता है, इसलिए दर्श व्रत रखने वाले इस अंतर पर विशेष ध्यान दें।

अंतिम सूत्र है नगर-भेद। तिथि का आरंभ और अंत पूरे विश्व के लिए एक ही खगोलीय क्षण है, पर सूर्योदय हर नगर में अलग समय पर होता है — कोलकाता से द्वारका तक यह अंतर एक घंटे से भी अधिक हो जाता है। ऐसे महीनों में, जब तिथि सूर्योदय के आसपास ही बदल रही हो, पूर्वी और पश्चिमी नगरों में उदया तिथि का दिन सचमुच अलग निकल सकता है: कोलकाता के सूर्योदय पर अमावस्या आ चुकी हो और मुंबई में अभी चतुर्दशी ही चल रही हो, या इसका उल्टा। इसीलिए इस पृष्ठ पर समय हर नगर के लिए अलग गणना से दिया गया है, कोई एक राष्ट्रीय तारीख नहीं — और यात्रा में हों तो उसी स्थान का सूर्योदय आधार बनाएँ जहाँ आप वास्तव में स्नान या तर्पण करने वाले हैं।

अन्य व्रत एवं तिथि कैलेंडर

एकादशी तिथियाँ
स्मार्त और वैष्णव तिथियों सहित वर्ष की 24 एकादशियाँ
पूर्णिमा तिथियाँ
तिथि समय और नामांकित पूर्णिमाओं सहित पूर्णिमा तिथियाँ
प्रदोष व्रत
हर त्रयोदशी का प्रदोष काल — शिव आराधना का संध्या समय
त्योहार कैलेंडर
माहवार सम्पूर्ण हिंदू त्योहार कैलेंडर