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गणेशोत्सव 2026

गणेश चतुर्थी 2026

अपने ही शहर का मध्याह्न मुहूर्त, चंद्र-दर्शन का एक-दिनी नियम और विसर्जन — किसी सुर्ख़ी से नक़ल नहीं, दिन से निकाला गया।

A clay Ganesha murti installed on a decorated chowki with durva, modak and marigold on Ganesh Chaturthi
PanchangBodh Editorial
9 min read
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गणेश चतुर्थी 2026 में सोमवार, 14 सितंबर को है — और यह सोमवार ही क्यों, इससे पर्व के समय-निर्धारण का ढंग समझ आता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी मध्याह्न-व्यापिनी व्रत है: सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को पाँच समान भागों में बाँटा जाता है, और तीसरा, बीच का भाग — मध्याह्न — गणेश का है। पूजा उसी दिन रखी जाती है जिस दिन चतुर्थी इस मध्य भाग को व्याप्त करे। 14 सितंबर को चतुर्थी प्रातः 07:08 से अगली सुबह 07:46 तक रहती है, अतः वह मध्याह्न को घेरती है, और यही तिथि तय करती है।

चूँकि मध्याह्न आपके अपने सूर्योदय और सूर्यास्त से नापा जाता है, इसका मुहूर्त कोई एक राष्ट्रीय समय नहीं है। नई दिल्ली में यह सुबह 11:02 पर और मुंबई में 11:20 पर खुलता है, और पश्चिम की ओर कुछ और खिसकता जाता है। इस वर्ष दिन एक बात और लाता है: शुक्ल तृतीया 14 की सुबह 07:08 पर ही समाप्त होती है, इसलिए हरतालिका तीज इसी दिन पड़ती है, और चतुर्थी तिथि स्वयं आधी रात के बाद 15 तारीख़ में चली जाती है।

गणेश चतुर्थी 2026 — एक दृष्टि में

🗓️

पर्व दिवस

सोमवार, 14 सितंबर 2026

🌙

तिथि

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी

🕛

मध्याह्न पूजा

दिल्ली सुबह 11:02 – दोपहर 1:30

चतुर्थी तिथि

14 सितंबर 07:08 → 15 सितंबर 07:46

🌑

चंद्र-दर्शन वर्जित

दिल्ली सुबह 9:01 – रात 8:08

🌊

विसर्जन

अनंत चतुर्दशी, 25 सितंबर

मध्याह्न पूजा मुहूर्त, शहर के अनुसार

दिन का बीच का तीसरा भाग — आपके स्थान के लिए गणना किया गया

नई दिल्ली

सुबह 11:02 – दोपहर 1:30

सूर्योदय · सूर्यास्त 06:05 · 18:27

मुंबई

सुबह 11:20 – दोपहर 1:47

सूर्योदय · सूर्यास्त 06:26 · 18:41

मध्याह्न दिन के पाँच समान भागों में से तीसरा है, इसलिए इसका आरंभ और अंत पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि आपके यहाँ सूर्य कब उगता और अस्त होता है। यही कारण है कि एक छपा हुआ समय भ्रामक होता है: अख़बार दिल्ली की एक ही खिड़की छापते हैं, पर मुंबई में वही मध्याह्न अठारह मिनट बाद खुलता है। ऊपर दिए समय प्रत्येक शहर के उस दिन के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाले गए हैं। यदि परिवार मध्याह्न में एकत्र न हो सके, तो अभिजित मुहूर्त — स्थानीय दोपहर के आसपास की सदा शुभ रहने वाली छोटी खिड़की, दिल्ली में सुबह 11:51 से दोपहर 12:41 — स्थापना के लिए मान्य विकल्प है।

वह एक दिन जब चंद्रमा नहीं देखते

चंद्र-दर्शन निषेध और स्यमंतक कथा

चंद्र-दर्शन से बचें (नई दिल्ली)

सुबह 9:01 – रात 8:08

14 सितंबर — चंद्रोदय से चंद्रास्त तक

चतुर्थी हर मास में आती है, पर केवल इसी दिन चंद्रमा जानबूझकर नहीं देखा जाता। कथा स्यमंतक मणि की है: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रदर्शन के बाद श्रीकृष्ण पर मणि-चोरी का मिथ्या दोष लगा, क्योंकि चंद्रमा ने कभी गणेश का उपहास किया था और शाप पाया था कि इस दिन जो उसे देखेगा वह झूठे लांछन का भागी होगा — मिथ्या दोष। इसलिए जितनी देर चंद्रमा आकाश में रहे, उसे देखने से बचें — नई दिल्ली में 2026 में यह लगभग सुबह 9:01, जब वह उदय होता है, से रात 8:08, जब वह अस्त होता है, तक है। यदि भूल से दृष्टि पड़ जाए, तो स्यमंतक श्लोक का पाठ पारंपरिक उपाय है, जो कथा का स्मरण कराकर दोष हर लेता है।

स्थापना और पूजा विधि

घर पर प्रतिमा की स्थापना और पूजन

स्नान करके स्थान शुद्ध करें और मध्याह्न के समय मिट्टी के गणेश को चौकी पर पूर्व या ईशान की ओर मुख करके स्थापित करें। प्रतिमा में देव का आवाहन करने के लिए प्राण-प्रतिष्ठा करें, फिर षोडशोपचार — सोलह उपचार: प्रतिमा का अभिषेक और शृंगार करें, लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करें, दूर्वा की 21 पत्तियाँ चढ़ाएँ, और मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ, जो गणेश को सर्वाधिक प्रिय हैं। तुलसी एकमात्र पत्ती है जो उन्हें कभी नहीं चढ़ाई जाती। दीप जलाएँ, व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और जितने दिन प्रतिमा घर में रहे उतने दिन प्रातः-सायं आरती करते रहें।

विसर्जन: गणेश को कितने दिन रखें

डेढ़ दिन से अनंत चतुर्दशी तक

गणेश कितने दिन रहें, यह परिवार का निर्णय है, कोई बँधा नियम नहीं। कुछ डेढ़ दिन बाद विसर्जन करते हैं, कुछ तीसरे, पाँचवें या सातवें दिन, और सबसे बड़ा विसर्जन दसवें दिन अनंत चतुर्दशी को होता है — शुक्रवार, 25 सितंबर 2026। गणना 14 से चलती है, और हर परिवार अपनी परंपरा निभाता है। अंतिम आरती और अगले वर्ष पुनः पधारने की प्रार्थना के बाद विसर्जन करें। मिट्टी की प्रतिमा का घर पर ही बाल्टी या टब में विसर्जन जल को स्वच्छ और अनुष्ठान को पूर्ण रखता है।

💡

अनंत चतुर्दशी का विसर्जन मुहूर्त

दस दिवसीय विसर्जन 25 सितंबर, अनंत चतुर्दशी को होता है। उस दिन के शहर-अनुसार शुभ चौघड़िया और विसर्जन समय के लिए अनंत चतुर्दशी पृष्ठ देखें।अनंत चतुर्दशी 2026 →

गणेश का पूजन सबसे पहले क्यों

विघ्नहर्ता, और पर्व का सार्वजनिक होना

गणेश विघ्नहर्ता हैं और प्रथमपूज्य — किसी भी पूजा, विवाह या नए कार्य के आरंभ में सबसे पहले उनका पूजन होता है, ताकि आगे का काम निर्विघ्न चले। घरेलू व्रत प्राचीन है, पर दस दिवसीय सार्वजनिक उत्सव नहीं: 1893 में लोकमान्य तिलक ने पुणे की निजी पूजा को सार्वजनिक उत्सव बना दिया और इन समागमों से स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एकता जगाई। यही कारण है कि पंडाल और शोभायात्राएँ महाराष्ट्र में सबसे बड़ी होती हैं, जबकि उत्तर भारत का बड़ा भाग आज भी इसे एक दिन की शांत घरेलू पूजा के रूप में रखता है।

लाइव पंचांग

अपने शहर का आज का पंचांग और मुहूर्त देखें

ऊपर दिए मध्याह्न और अभिजित मुहूर्त दिल्ली और मुंबई के लिए हैं। 14 तारीख़ — या किसी भी दिन — अपने शहर की तिथि, सूर्योदय और चौघड़िया के लिए लाइव पंचांग खोलें।

गणेश चतुर्थी 2026 — आपके प्रश्न

तिथि, मुहूर्त, चंद्र-दर्शन नियम और विसर्जन

गणेश चतुर्थी 2026 में कब है?+
गणेश चतुर्थी 2026 में सोमवार, 14 सितंबर को है। यह भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी है, जो नई दिल्ली समय अनुसार 14 सितंबर प्रातः 07:08 से 15 सितंबर प्रातः 07:46 तक रहती है। तिथि अगली सुबह समाप्त होने पर भी पूजा 14 को ही होती है, क्योंकि उसी दिन चतुर्थी मध्याह्न को — दिन के मध्य भाग को, जो गणेश का है — व्याप्त करती है।
गणेश चतुर्थी 2026 का पूजा मुहूर्त क्या है?+
स्थापना और पूजा मध्याह्न मुहूर्त में की जाती है — दिन के पाँच समान भागों में से तीसरा भाग। यह समय आपके नगर के सूर्योदय और सूर्यास्त से तय होता है, इसलिए यह एक राष्ट्रीय समय नहीं है: नई दिल्ली में यह सुबह 11:02 से दोपहर 1:30 तक और मुंबई में सुबह 11:20 से दोपहर 1:47 तक है। यदि मध्याह्न में न बैठ सकें, तो अभिजित मुहूर्त (दिल्ली में सुबह 11:51 से दोपहर 12:41) मान्य विकल्प है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा क्यों नहीं देखते?+
केवल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा जानबूझकर नहीं देखा जाता। स्यमंतक मणि की कथा बताती है कि इसी दिन चंद्रदर्शन के बाद श्रीकृष्ण पर चोरी का मिथ्या दोष लगा था, क्योंकि गणेश ने पहले चंद्रमा को शाप दिया था। इसे देखने से मिथ्या दोष — झूठे लांछन का भय — माना जाता है। नई दिल्ली में 2026 में 14 तारीख़ को चंद्रमा लगभग सुबह 9:01 से रात 8:08 तक आकाश में रहता है, अतः यही समय है जब उसे देखने से बचें। यदि भूल से दिख जाए, तो स्यमंतक श्लोक का पाठ पारंपरिक उपाय है।
घर पर गणेश स्थापना और पूजा कैसे करें?+
स्नान करके स्थान शुद्ध करें और मध्याह्न के समय मिट्टी के गणेश को चौकी पर पूर्व या ईशान दिशा की ओर मुख करके स्थापित करें। प्राण-प्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजा करें — प्रतिमा का अभिषेक करें, लाल पुष्प, सिंदूर, दूर्वा की 21 पत्तियाँ और मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें; गणेश को तुलसी कभी न चढ़ाएँ। दीप जलाएँ, व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और जितने दिन प्रतिमा रखें उतने दिन प्रातः-सायं आरती करें।
गणेश विसर्जन 2026 में कब है?+
मुख्य विसर्जन अनंत चतुर्दशी, शुक्रवार 25 सितंबर 2026 को है — स्थापना के दस दिन बाद। बहुत से परिवार डेढ़, तीन, पाँच या सात दिन बाद अपनी गणना से पहले ही विसर्जन कर देते हैं। जो भी दिन चुनें, अंतिम आरती के बाद विसर्जन करें; मिट्टी की प्रतिमा का घर पर बाल्टी या टब में विसर्जन इसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल रखता है।
महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी अधिक बड़ी क्यों लगती है?+
यह सदा से पूरे भारत में घरेलू व्रत रहा है, पर इसका सार्वजनिक, सामूहिक रूप महाराष्ट्र में आरंभ हुआ। 1893 में लोकमान्य तिलक ने पुणे में इस निजी पूजा को दस दिवसीय सार्वजनिक उत्सव बना दिया और इन समागमों से स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एकता जगाई। यही कारण है कि पंडाल, शोभायात्राएँ और विसर्जन की भीड़ महाराष्ट्र में सबसे बड़ी होती है, जबकि उत्तर भारत में यह प्रायः एक दिन की घरेलू पूजा है।
स्रोत और अस्वीकरण: तिथियाँ और समय नामित शहरों के लिए, IST में, लाहिरी अयनांश से गणना किए गए हैं, और नई दिल्ली का मध्याह्न समय प्रकाशित पंचांगों से मिलान करके देखा गया है। मुहूर्त की खिड़कियाँ आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से बदलती हैं, इसलिए आरंभ से पहले अपना स्थानीय समय पंचांग में देख लें। व्रत रखने वाली गर्भवती, अस्वस्थ या वृद्ध स्त्रियों को कठोर व्रत के स्थान पर चिकित्सक की सलाह माननी चाहिए।