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गुरु पुष्य योग 2026

2026 में New Delhi के लिए गुरु पुष्य योग की सटीक तिथियां और मुहूर्त समय

3अवसर
अगला योग: 23 अप्रैल, 2026
वर्ष
2026
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अप्रैल2026

दिनांक और वारयोग समयअवधिनक्षत्रतिथि और मास
23 अप्रैल, 2026आगामी
Thursday
10:30 PM(23 Apr)9:48 PM(24 Apr)
अगला दिन
23h 18mPushya
Saptami
Shukla, Vaishakha

मई2026

दिनांक और वारयोग समयअवधिनक्षत्रतिथि और मास
21 मई, 2026
Thursday
5:42 AM(21 May)4:20 AM(22 May)
अगला दिन
22h 38mPushya
Panchami
Shukla, Jyeshtha

जून2026

दिनांक और वारयोग समयअवधिनक्षत्रतिथि और मास
18 जून, 2026
Thursday
3:04 PM(17 Jun)1:01 PM(18 Jun)
अगला दिन
21h 57mPushya
Chaturthi
Shukla, Ashadha

क्या है गुरु पुष्य योग?

गुरुवार और पुष्य नक्षत्र दोनों के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। पंचांग परंपरा के अनुसार, यह देवगुरु के स्वाभाविक गुणों—ज्ञान, धन, विस्तार और पवित्रता—को अत्यधिक पुष्ट करता है। ऋषियों ने इस दिन को विद्या आरंभ और आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना है। गृहस्थों के लिए, इस योग में किए गए कार्य बिना किसी बाधा के फलते-फूलते हैं।

क्या करें

  • बच्चों का विद्यारंभ संस्कार
  • स्वर्ण की खरीदारी और वित्तीय निवेश
  • नई नौकरी आरंभ करना या उच्च पद ग्रहण करना
  • आध्यात्मिक दीक्षा या मंत्र साधना प्रारंभ करना

क्या न करें

  • विवाह (पुष्य नक्षत्र का निषेध लागू होता है)
  • विध्वंस या तोड़-फोड़ वाले कार्य
  • कानूनी नोटिस देना या विवादों में उलझना
शास्त्रीय प्रमाण:Dharmasindhu & Muhurta Chintamani
गुरु पुष्य योग की तिथियां सेव करें?

सामान्य प्रश्न (FAQ)

रवि पुष्य और गुरु पुष्य में से कौन अधिक श्रेष्ठ है?

परंपरा के अनुसार दोनों ही सर्वोच्च हैं। बृहस्पति के प्रभाव के कारण गुरु पुष्य ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष है, जबकि सूर्य के प्रभाव में रवि पुष्य अधिकार, प्रशासन और भौतिक सुख-संपत्ति के लिए उत्तम है।

क्या गुरु पुष्य योग में व्यापार आरंभ किया जा सकता है?

निश्चित रूप से। चूंकि बृहस्पति विस्तार, वृद्धि और धर्मसंगत आय के कारक हैं, गुरु पुष्य व्यापार के शुभारंभ के लिए श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक है। गुजरात और राजस्थान के कई व्यापारी परिवार पीढ़ियों से इस योग में अपनी दुकानें खोलते आए हैं।

क्या गुरु पुष्य बच्चे के विद्यारंभ (शिक्षा आरंभ) के लिए उचित समय है?

हाँ, गुरु पुष्य में विद्यारंभ सबसे अधिक अनुशंसित कार्य है। बृहस्पति देवगुरु हैं और पुष्य का अर्थ पोषण है। दोनों मिलकर बालक के मन में ज्ञान का बीज बोने के लिए आदर्श क्षण बनाते हैं। धर्मसिन्धु में इस संयोग को अक्षराभ्यास के लिए विशेष रूप से नामित किया गया है।

गुरु पुष्य योग कितने समय में एक बार आता है?

पुष्य नक्षत्र लगभग हर 27 दिनों में आता है और गुरुवार सप्ताह में एक बार। इन दोनों का मेल प्रत्येक दो से तीन महीने में होता है — वर्ष भर में लगभग 5 से 7 बार। चन्द्र चक्र के अनुसार कुछ वर्षों में अधिक और कुछ में कम अवसर मिलते हैं।

क्या गुरु पुष्य में मंत्र दीक्षा ली जा सकती है?

गुरु पुष्य मंत्र दीक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों में गिना जाता है। जब बृहस्पति का वार और बृहस्पति का नक्षत्र एक साथ आते हैं, तो गुरु-तत्व अपने चरम पर होता है। अनेक आश्रम और आध्यात्मिक संप्रदाय जानबूझकर इसी तिथि के आसपास दीक्षा का आयोजन करते हैं।

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