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सावन के नियम — क्या करें, क्या न करें व शिव को क्या चढ़ाएँ

पावन मास को सही ढंग से बिताने की विधि — सात्त्विक नियम, और शिव को क्या अर्पित करें तथा शिवलिंग पर क्या न चढ़ाएँ।

Shivling with bel patra, white flowers and a water pot, illustrating the rules of Sawan worship
PanchangBodh Editorial
8 min read
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सावन शिव भक्तों के लिए सबसे पावन मास है, और इसके साथ एक सहज अनुशासन जुड़ा है। ये नियम कठोर निषेध नहीं, बल्कि मास को सात्त्विक बनाए रखने का ढंग हैं — आहार में हल्का, आचरण में स्वच्छ, और प्रतिदिन शिव की ओर उन्मुख।

नीचे वे नियम दिए गए हैं जिन्हें अधिकांश परिवार सावन भर मानते हैं, उसके बाद स्पष्ट सूची कि शिवलिंग पर क्या अर्पित करें — और उतना ही महत्वपूर्ण, क्या कभी न चढ़ाएँ।

सावन में क्या करें

सात्त्विक जीवन और प्रतिदिन शिव पूजा

  • प्रतिदिन शिव जी की पूजा करें — कम से कम “ॐ नमः शिवाय” के साथ जलाभिषेक।
  • सात्त्विक आहार और शांत, सत्यनिष्ठ, संयमित आचरण रखें।
  • प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें; शरीर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।
  • महामृत्युंजय मंत्र या शिव चालीसा का नियमित पाठ करें।
  • ज़रूरतमंदों को जल दें और सरल दान-पुण्य करें।

सावन में क्या न करें

मास भर किनसे परहेज़ करें

  • पूरे मास मांसाहार, अंडे और मदिरा से परहेज़ करें।
  • प्याज़, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन से बचें।
  • सावन में हरी पत्तेदार सब्ज़ियों और बैंगन से परहेज़ करें।
  • सोमवार को अपने आहार में दूध न लें — इसे शिव को अर्पित किया जाता है।
  • क्रोध, कलह और कटु वचन से बचें; मन को स्थिर रखें।
  • यदि परिवार की परंपरा हो तो कुछ दिनों में बाल न कटवाएँ, न दाढ़ी बनाएँ।

शिव को क्या अर्पित करें

शिव को प्रिय अर्पण

जल

सबसे सरल और प्रिय अर्पण; जलाभिषेक शिवलिंग को शीतल करता है।

बेलपत्र

शिव को प्रिय; चिकनी ओर नीचे करके अर्पित किया जाता है।

श्वेत पुष्प

श्वेत पुष्प शिव को विशेष प्रिय हैं।

धतूरा व आक

शिव द्वारा स्वीकृत पारंपरिक वन्य अर्पण।

भांग

जहाँ पारिवारिक परंपरा हो, वहाँ अर्पित की जाती है।

चंदन, अक्षत, धूप, घी का दीप

शिव पूजा के सामान्य उपचार।

शिव को क्या कभी न चढ़ाएँ

परंपरा से शिवलिंग पर वर्जित

तुलसी दल

तुलसी विष्णु को प्रिय है और परंपरा से शिव को अर्पित नहीं की जाती।

हल्दी

हल्दी स्त्री-तत्त्व से जुड़ी मानी जाती है और शिवलिंग पर नहीं चढ़ाई जाती।

केतकी पुष्प

शिव के शाप की कथा के अनुसार केतकी परंपरा से वर्जित है।

शिवलिंग पर नारियल पानी

नारियल पानी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता; साबुत नारियल अलग से अर्पित किया जा सकता है।

कुमकुम / सिंदूर

यह पार्वती को लगाया जाता है, शिव को नहीं; शिवलिंग पर चंदन लगाएँ।

टूटा या फटा बेलपत्र

केवल पूर्ण और निर्दोष बेलपत्र ही अर्पित करें।

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शिव आशुतोष हैं

शिव सच्ची और सरल भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। केवल जल और साबुत बेलपत्र भी पर्याप्त हैं — पूजा विधि विस्तार से अलग पृष्ठ पर दी गई है।सावन सोमवार व्रत विधि →
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन के नियम, अर्पण और आचरण

सावन मास के मुख्य नियम क्या हैं?+
सावन भर श्रद्धालु सात्त्विक जीवन रखते हैं — मांसाहार, अंडे या मदिरा नहीं, प्याज़-लहसुन नहीं, और प्रायः हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ तथा बैंगन भी नहीं। वे प्रतिदिन शिव जी की पूजा करते हैं, कम से कम जलाभिषेक और “ॐ नमः शिवाय” के साथ, स्वच्छता रखते हैं, मधुर वचन बोलते हैं और क्रोध व कलह से बचते हैं।
सावन में शिव जी को क्या अर्पित करना चाहिए?+
जल (जलाभिषेक), बेलपत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा और आक अर्पित करें, तथा जहाँ परंपरा हो वहाँ भांग भी। चंदन, अक्षत, धूप और घी के दीप से पूजा पूर्ण करें। केवल जल और साबुत बेलपत्र ही पर्याप्त हैं, क्योंकि शिव आशुतोष हैं — शीघ्र प्रसन्न हो जाने वाले।
शिव जी को क्या कभी अर्पित नहीं करना चाहिए?+
तुलसी (जो विष्णु को प्रिय है), हल्दी, केतकी पुष्प, कुमकुम या सिंदूर, और टूटा बेलपत्र अर्पित न करें। शिवलिंग पर नारियल पानी नहीं चढ़ाया जाता, यद्यपि साबुत नारियल अलग से अर्पित किया जा सकता है।
सावन में हरी सब्ज़ियाँ और बैंगन क्यों वर्जित हैं?+
परंपरा से सावन में हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ और बैंगन सात्त्विक आहार के भाग के रूप में छोड़ दिए जाते हैं; वर्षा ऋतु में इन्हें तामसिक या पचने में भारी माना जाता है, और ये ऋतु के प्राकृतिक चक्र से भी जुड़े हैं। बहुत-से परिवार सोमवार को यह नियम कड़ाई से मानते हैं।
क्या शिव को दूध चढ़ाकर सावन में स्वयं भी पी सकते हैं?+
दूध पंचामृत अभिषेक का प्रमुख अर्पण है। सोमवार को बहुत-से लोग अपने आहार में दूध से बचते हैं और उसे शिव को अर्पित कर बाद में प्रसाद रूप में लेते हैं। पारिवारिक रीतियाँ भिन्न होती हैं, अतः जिस प्रथा में पले-बढ़े हों उसी का पालन करें।
क्या सावन के नियम पालने के लिए व्रत रखना आवश्यक है?+
नहीं। सोमवार का व्रत एक विशेष साधना है, पर व्यापक सावन नियम — सात्त्विक आहार, प्रतिदिन शिव पूजा और शांत आचरण — मास भर कोई भी रख सकता है, चाहे व्रत रखे या न रखे।
स्रोत और अस्वीकरण: ये नियम उत्तर भारत में व्यापक रूप से प्रचलित परंपरा दर्शाते हैं; क्षेत्रीय और पारिवारिक रीतियाँ विस्तार में भिन्न होती हैं, और कहीं जिसकी अनुमति है कहीं उससे परहेज़ किया जाता है। अपने परिवार और क्षेत्र की प्रथा का पालन करें, और इन नियमों को कठोर विधान के बजाय सात्त्विक मार्गदर्शन मानें।