सावन के सोमवार को श्रद्धालु सावन सोमवार व्रत रखते हैं और शिवलिंग को जल से स्नान कराते हैं — यही शिव जी को प्रिय सबसे सरल अर्पण है। यह व्रत प्रातः लिए गए संकल्प के साथ, शांत और सात्त्विक मन से दिन भर निभाया जाता है।
इस मार्गदर्शिका में संपूर्ण पूजा विधि चरण-दर-चरण, व्रत के दौरान पालनीय नियम, आवश्यक सामग्री, जलाभिषेक व अभिषेक की विधि, तथा पारण की विधि दी गई है — साथ में विवाहित और कुँवारी महिलाओं के लिए अलग सुझाव भी।
सावन सोमवार व्रत पूजा विधि
प्रातः से संध्या तक की विधि, चरण-दर-चरण
प्रातः स्नान
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ — यथासंभव हल्के या श्वेत — वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ़ करें और शिवलिंग या शिव जी का चित्र पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर स्थापित करें।
संकल्प लें
देव के सम्मुख बैठकर दाहिने हाथ में थोड़ा जल और अक्षत लेकर संकल्प लें — अपना नाम, व्रत का उद्देश्य और दिन भर व्रत रखने की भावना मन में दोहराएँ। यही संकल्प इस दिन को केवल पूजा नहीं, व्रत बनाता है।
जलाभिषेक
शिवलिंग पर पतली और सतत धार में जल चढ़ाएँ और साथ ही “ॐ नमः शिवाय” का जप करें। केवल शुद्ध जल ही पर्याप्त है। दाहिने हाथ से जल अर्पित करें और मन को गिनती में नहीं, शिव में लगाएँ।
पंचामृत अभिषेक
विस्तृत अभिषेक के लिए शिवलिंग को क्रमशः दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — अर्थात पंचामृत — से स्नान कराएँ और फिर स्वच्छ जल से धो दें। जहाँ दूध चढ़ाएँ, वहाँ कच्चा (बिना उबाला) दूध प्रयोग करें।
बेलपत्र व पुष्प अर्पित करें
बेलपत्र को चिकनी ओर नीचे करके अर्पित करें, साथ में श्वेत पुष्प, अक्षत, चंदन, धतूरा और यदि परंपरा हो तो भांग भी चढ़ाएँ। चंदन का त्रिपुंड लगाएँ और दीप तथा धूप प्रज्वलित करें।
जप, कथा व आरती
“ॐ नमः शिवाय” अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, सावन सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और अंत में शिव आरती करें। फल या खीर का भोग लगाकर उसे प्रसाद रूप में बाँटें।
जलाभिषेक व अभिषेक विधि
शिवलिंग को सही ढंग से स्नान कराएँ
जलाभिषेक सावन सोमवार पूजा का हृदय है। शिवलिंग पर पतली और सतत धार में स्वच्छ जल चढ़ाएँ और “ॐ नमः शिवाय” का जप करें — केवल शुद्ध जल ही पर्याप्त है। विस्तृत अभिषेक के लिए शिवलिंग को क्रमशः पंचामृत (कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराकर स्वच्छ जल से धो दें, और अंत में बेलपत्र, श्वेत पुष्प तथा धतूरा अर्पित करें। धार को हल्का रखें और मन को गिनती में नहीं, शिव में लगाएँ।
महामृत्युंजय जप
व्रत नियम — व्रत के पालन
दिन भर क्या रखें और किससे बचें
- दिन भर संकल्प मन में दृढ़ रखें — व्रत केवल आहार नहीं, एक संकल्प है।
- फलाहार पर रहें; अनाज, साधारण नमक, प्याज़ और लहसुन से परहेज़ करें।
- पूजा से पहले और यथासंभव संध्या पूजा से पहले पुनः स्नान करें; स्वच्छता बनाए रखें।
- सत्य और मधुर वचन बोलें, और इस दिन क्रोध तथा कलह से बचें।
- दिन में न सोएँ; समय शिव नाम, जप अथवा कथा में लगाएँ।
- व्रत भर ब्रह्मचर्य और सात्त्विक, संयमित आचरण का पालन करें।
सावन सोमवार व्रत सामग्री
पूजा से पहले जुटा लें
पारण — व्रत कैसे खोलें
व्रत को सही ढंग से पूर्ण करें
अधिकांश श्रद्धालु संध्या शिव पूजा तक व्रत रखकर प्रसाद — फल, दूध या खीर — से व्रत खोलते हैं। जो निर्जल या पूर्ण दिन का व्रत रखते हैं, वे प्रायः अगले दिन प्रातः स्नान और संक्षिप्त पूजा के बाद पारण करते हैं। जिस भी प्रकार व्रत रखा हो, फलाहार पर रहे हों तो अनाज और साधारण नमक से बचते हुए सात्त्विक भोजन से धीरे-धीरे व्रत खोलें। पारण से व्रत पूर्ण होता है, अतः कृतज्ञता और अंतिम “ॐ नमः शिवाय” के साथ इसे संपन्न करें।
विवाहित व कुँवारी महिलाओं के लिए
विधि एक, संकल्प भिन्न
मूल विधि सभी के लिए एक ही है; केवल संकल्प का भाव भिन्न होता है। विवाहित महिलाएँ प्रायः पति की दीर्घायु, कल्याण और गृहस्थी की सुख-शांति के लिए सावन सोमवार व्रत रखती हैं। कुँवारी कन्याएँ यह व्रत — या अधिक कठिन सोलह सोमवार का संकल्प — रखकर योग्य वर और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शिव से प्रार्थना करती हैं। व्रत रखने पर किसी के लिए कोई रोक नहीं है; सबसे अधिक महत्व भक्ति की सच्चाई का है।
सोलह सोमवार
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सावन सोमवार व्रत विधि और नियम
