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सावन व्रत में क्या खाएँ — फलाहार मार्गदर्शिका

सावन व्रत में क्या खा सकते हैं, किससे बचें, और दिन आसान बनाने वाली कुछ सरल फलाहार विधियाँ।

A thali of Sawan vrat phalahar food — sabudana khichdi, kuttu puri, fruit and milk with sendha namak
PanchangBodh Editorial
7 min read
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सावन व्रत फलाहार पर रखा जाता है — फल, दूध और कुछ चुनिंदा “व्रत” सामग्री पर आधारित एक सात्त्विक, अनाज रहित आहार। भाव यह है कि भोजन हल्का और शुद्ध हो, ताकि शरीर स्थिर रहे और मन शिव में लगा रहे।

नीचे स्पष्ट रूप से दिया गया है कि क्या खा सकते हैं, किससे बचना है, और तीन सरल विधियाँ भी — ताकि कठोर व्रत हो या हल्का, दिन का भोजन आसानी से तय हो जाए।

क्या खा सकते हैं (फलाहार)

व्रत में मान्य सात्त्विक, अनाज रहित भोजन

ताज़े फल व सूखे मेवे
दूध, दही, पनीर, छाछ
साबूदाना — खिचड़ी, खीर, वड़ा
कुट्टू का आटा — पूरी, चीला
सिंघाड़े का आटा
समक (व्रत का “चावल”)
आलू, शकरकंद, अरबी
केवल सेंधा नमक
मूँगफली, मखाना
घी, तथा कद्दू / लौकी

किससे बचें

व्रत के दौरान थाली से दूर रखी जाने वाली वस्तुएँ

सभी अनाज — गेहूँ, चावल, दाल, बेसन
साधारण (आयोडीन युक्त) नमक
प्याज़ और लहसुन
सोमवार को हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ
मांसाहार और अंडे
मदिरा और तामसिक भोजन

सेंधा नमक — व्रत का नमक

केवल सेंधा नमक ही क्यों

व्रत के हर व्यंजन में नमक सेंधा नमक ही होता है — साधारण नमक कभी नहीं। परिष्कृत साधारण नमक परंपरा से व्रत के लिए अनुपयुक्त माना जाता है, जबकि सेंधा नमक अपरिष्कृत तथा शुद्ध और सात्त्विक माना जाता है। सावन के सोमवार को बहुत-से परिवार हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ भी छोड़ देते हैं और आलू, कद्दू तथा लौकी जैसी सात्त्विक कंद व सब्ज़ियों को प्राथमिकता देते हैं। मात्रा हल्की रखें — फलाहार व्रत को निभाने के लिए है, दावत बनने के लिए नहीं।

सरल सावन व्रत विधियाँ

तीन आसान फलाहार व्यंजन

साबूदाना खिचड़ी

साबूदाने को नरम होने तक भिगोएँ, फिर घी में जीरा भूनकर उबले आलू के टुकड़े, भुनी-कुटी मूँगफली, सेंधा नमक और हरी मिर्च डालें, साबूदाना मिलाकर पारदर्शी होने तक पकाएँ। ऊपर से नींबू और धनिया डालें।

कुट्टू की पूरी

कुट्टू के आटे में उबला-मसला आलू, सेंधा नमक और थोड़ा पानी मिलाकर सख्त आटा गूँधें, छोटी पूरियाँ बेलकर घी या तेल में फूलने तक तलें। दही या सेंधा नमक वाली आलू सब्ज़ी के साथ परोसें।

समक की खीर

धुले समक को पूरे दूध में नरम और गाढ़ा होने तक पकाएँ, शक्कर से मीठा करें, इलायची और कटे मेवे डालकर कुछ मिनट और पकाएँ। व्रत की मिठाई के रूप में गरम या ठंडा परोसें।

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पारण के बाद

व्रत खोलने के बाद भी अनाज और साधारण नमक से धीरे-धीरे लौटें; भारी भोजन से बचें। सोमवार व्रत की पूरी विधि अलग पृष्ठ पर दी गई है।सावन सोमवार व्रत विधि →
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन व्रत भोजन और फलाहार

सावन व्रत में क्या खा सकते हैं?+
सावन व्रत में फलाहार लिया जाता है — फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे के व्यंजन, समक, आलू और अन्य कंद, मूँगफली तथा मखाना। पकाने में केवल सेंधा नमक प्रयोग करें। अनाज, साधारण नमक, प्याज़ और लहसुन से परहेज़ किया जाता है।
व्रत के भोजन में साधारण नमक के बजाय सेंधा नमक क्यों प्रयोग होता है?+
साधारण नमक परिष्कृत होता है और परंपरा से व्रत के लिए अनुपयुक्त माना जाता है, जबकि सेंधा नमक अपरिष्कृत तथा शुद्ध और सात्त्विक माना जाता है। इसीलिए व्रत के सभी व्यंजन केवल सेंधा नमक से बनाए जाते हैं।
क्या सावन व्रत में आलू खा सकते हैं?+
हाँ। आलू फलाहार का प्रमुख अंग है — उबले आलू, सेंधा नमक वाली आलू सब्ज़ी, या साबूदाना खिचड़ी और कुट्टू पूरी के रूप में। शकरकंद और अरबी भी खाई जा सकती है।
सावन व्रत में किन सब्ज़ियों से बचना चाहिए?+
अनाज से बने पदार्थ, प्याज़ और लहसुन से पूरे दिन परहेज़ किया जाता है। बहुत-से परिवार सावन के सोमवार को हरी पत्तेदार सब्ज़ियों से भी बचते हैं और आलू, कद्दू तथा लौकी जैसी सात्त्विक सब्ज़ियों को प्राथमिकता देते हैं।
क्या व्रत के दौरान चाय या कॉफ़ी पी सकते हैं?+
अधिकांश लोग दूध, छाछ, फलों का रस या सादा जल खुलकर लेते हैं। चाय या कॉफ़ी व्यक्तिगत चुनाव है — बहुत-से लोग हल्की चाय ले लेते हैं, जबकि कठोर फलाहार या निर्जल व्रत रखने वाले इससे बचते हैं। भोजन सरल और सात्त्विक रखें।
सावन व्रत की कुछ सरल विधियाँ कौन-सी हैं?+
सबसे प्रचलित हैं — साबूदाना खिचड़ी, आलू सब्ज़ी के साथ कुट्टू की पूरी, समक की खीर, सिंघाड़े या कुट्टू का चीला, और मखाना खीर — सभी सेंधा नमक या शक्कर से बनी और अनाज रहित।
स्रोत और अस्वीकरण: व्रत भोजन की रीतियाँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार भिन्न होती हैं — कहीं जिन वस्तुओं की अनुमति है, कहीं उनसे परहेज़ किया जाता है। यह मार्गदर्शिका उत्तर भारत में व्यापक रूप से प्रचलित फलाहार परंपरा पर आधारित है। किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में व्रत को अपनी आवश्यकता अनुसार ढालें, और कठोर या निर्जल व्रत से पहले चिकित्सक से परामर्श करें।