धैर्य से निभाने का वर्ष
साढ़े साती पूरे वर्ष चलेगी और 3 जून से 20 अक्टूबर तक आपकी राशि पर अपने शिखर पर रहेगी। पंचम भाव में गुरु राहत देंगे — 25 जनवरी तक और फिर 26 जून से 26 नवंबर तक।
2027 का हर राशि-प्रवेश, वक्री काल, ग्रहण और युति — मिनट तक दर्ज, शास्त्रीय दृष्टि से पढ़ा हुआ, और आपकी चंद्र राशि के फल का एक पूरा पृष्ठ।

वर्ष का स्वरूप दो धीमे ग्रह और एक ग्रहण-काल तय करते हैं। ये पाँच तिथियाँ उसका अधिकांश भार उठाती हैं।
3 जून को शनि अपनी नीच राशि मेष में जाते हैं और 20 अक्टूबर को मीन में लौट आते हैं — इन्हीं दो तिथियों पर आठ चंद्र राशियों की साढ़े साती या ढैया बदलती है।
25 जनवरी से 26 जून तक गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में — पाँच महीने पूरे बल के।
2 अगस्त का सूर्य ग्रहण पूरे भारत में दोपहर बाद खंडग्रास रूप में दिखेगा; छह बड़े शहरों में सूर्य का 6 से 39 प्रतिशत भाग ढकेगा।
10 जनवरी से 1 अप्रैल तक वक्री मंगल सिंह से अपनी नीच राशि कर्क में लौटते हैं, जहाँ गुरु और केतु पहले से हैं।
18 से 30 अगस्त तक सूर्य, बुध, शुक्र और गुरु सिंह में एक साथ रहते हैं।
खंड 5 वर्ष को उस राशि से गिनता है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा थे — वही जिससे अख़बार का राशिफल चलता है — और हर धीमे गोचर को शास्त्रों की दृष्टि से पढ़ता है। हर राशि का निष्कर्ष यहाँ है।
धैर्य से निभाने का वर्ष
साढ़े साती पूरे वर्ष चलेगी और 3 जून से 20 अक्टूबर तक आपकी राशि पर अपने शिखर पर रहेगी। पंचम भाव में गुरु राहत देंगे — 25 जनवरी तक और फिर 26 जून से 26 नवंबर तक।
स्थिर कमाई का वर्ष
एकादश भाव में शनि और तृतीय भाव में केतु वर्ष के अधिकांश भाग में दो शुभ चिह्न बनाए रखेंगे। 3 जून से 20 अक्टूबर तक साढ़े साती की पहली झलक मिलेगी, और 26 नवंबर से गुरु भी अनुकूल होंगे।
वर्ष का मध्य भाग फलदायी रहेगा
25 जनवरी से 26 जून तक गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में आपके द्वितीय भाव में रहेंगे, फिर 3 जून से 20 अक्टूबर तक शनि एकादश भाव में। अष्टम भाव में राहु पूरे वर्ष सावधानी माँगते हैं।
एक मज़बूत सहारे वाला वर्ष
गुरु आपके द्वितीय भाव में रहेंगे — 25 जनवरी तक और फिर 26 जून से 26 नवंबर तक। शनि नवम से दशम भाव में जाकर लौटेंगे, और केतु पूरे वर्ष आपकी राशि पर रहेंगे।
सधे हुए प्रयास का वर्ष
3 जून से 20 अक्टूबर को छोड़कर शनि की अष्टम ढैया चलेगी, और षष्ठ भाव में राहु पूरे वर्ष साथ देंगे। गुरु 26 नवंबर से ही अनुकूल होंगे।
पहले हिस्से में अधिक फलदायी वर्ष
25 जनवरी से 26 जून तक गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में आपके एकादश भाव में रहेंगे, और केतु वहाँ पूरे वर्ष। 3 जून से 20 अक्टूबर तक शनि की अष्टम ढैया का दौर सँभलकर चलने का है।
दो हिस्सों में लाभ का वर्ष
वर्ष के अधिकांश भाग में शनि षष्ठ भाव में रहेंगे, और गुरु 25 जनवरी तक तथा 26 जून से 26 नवंबर तक एकादश भाव में। चतुर्थ भाव में राहु घर में शांति बनाए रखने को कहते हैं।
भरपूर सहारे वाला वर्ष
पूरे वर्ष तृतीय भाव में राहु, 25 जनवरी से 26 जून तक अपनी उच्च राशि कर्क में गुरु आपके नवम भाव में, और 3 जून से 20 अक्टूबर तक षष्ठ भाव में शनि।
गुरु पर टिका वर्ष
25 जनवरी तक और 26 जून से 26 नवंबर तक वे आपके नवम भाव में रहेंगे, बीच के महीनों में अष्टम में। शनि की कंटक ढैया 3 जून से 20 अक्टूबर को छोड़कर पूरे वर्ष चलेगी।
मज़बूत पूर्वार्ध
25 जनवरी से 26 जून तक गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में आपके सप्तम भाव में रहेंगे, और साथ में शनि तृतीय भाव में। 3 जून से 20 अक्टूबर तक शनि की कंटक ढैया और पूरे वर्ष आपकी राशि पर राहु धैर्य माँगते हैं।
वर्ष के मध्य में राहत
3 जून से 20 अक्टूबर तक शनि आपके तृतीय भाव में पहुँचेंगे और साढ़े साती का अंतिम चरण थमेगा; सप्तम भाव में गुरु और षष्ठ भाव में केतु इस राहत को और बढ़ाएँगे।
साढ़े साती का शिखर, पर मज़बूत सहारे के साथ
वर्ष के अधिकांश भाग में शनि आपकी राशि पर रहेंगे, पर 25 जनवरी से 26 जून तक गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में आपके पंचम भाव में और पूरे वर्ष राहु एकादश भाव में।





आवरण, आकाश का कैलेंडर, जनवरी, मेष राशि का पृष्ठ और पंचांगों से मिलान।
गोचर फल फलदीपिका के अध्याय 26 के अनुसार, ग्रहों का बल बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार। लाहिड़ी अयनांश से निरयण राशिचक्र, मध्यम राहु-केतु, और उत्तर भारत के पंचांगों के अनुसार विक्रम संवत 2084 दुर्मति।
हर क्षण की गणना सेकंड तक, और छपाई नई दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय में मिनट तक। वर्ष की मुख्य तिथियाँ चार प्रकाशित पंचांगों और नासा जेपीएल की डीई431 ग्रह-सारणी से मिलाई गई हैं — हर तिथि मेल खाती है।
ग्रह प्रेरित करते हैं, बाध्य नहीं करते। फल वही प्रवृत्ति बताते हैं जो शास्त्र किसी गोचर से जोड़ते हैं, और किसी परिणाम का वादा नहीं करते।
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