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PanchangBodhसटीक वैदिक कैलेंडर

लग्न कैलकुलेटर

जन्म के क्षण पूर्व दिशा में उदित राशि — आपकी कुंडली का प्रथम भाव और पूरी कुंडली की नींव।

अंश और नक्षत्र सहितलग्नेश और नवांश लग्नजन्म समय की बारीकी

लग्न वह राशि है जो आपके जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही थी। कुंडली का प्रथम भाव इसी राशि से बनता है, और शेष ग्यारह भाव इसके बाद क्रम से आते हैं। लग्न जानने के लिए जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और जन्म स्थान, तीनों चाहिए, क्योंकि हर राशि लगभग दो घंटे ही उदित रहती है।

अपना लग्न जानें

जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान भरें। समय जितना सटीक होगा, परिणाम उतना पक्का।

जन्म तिथि
जन्म समय

मुफ़्त · खगोलीय गणना · लाहिरी अयनांश

लग्न क्या है?

पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, इसलिए चौबीस घंटों में बारहों राशियाँ एक-एक करके पूर्वी क्षितिज पर उदित होती हैं। जिस क्षण आपका जन्म हुआ, उस क्षण जो राशि उदित हो रही थी, वही आपका लग्न है। इसे जन्म लग्न या उदय लग्न भी कहते हैं।

वैदिक ज्योतिष में लग्न को तनु भाव कहा गया है — आपका शरीर, स्वभाव, स्वास्थ्य और जीवन की सामान्य दिशा। कुंडली का हर भाव लग्न से गिना जाता है: लग्न के बाद वाली राशि द्वितीय भाव बनती है, उसके बाद तृतीय, और इसी प्रकार द्वादश भाव तक। इसलिए लग्न अलग हो तो पूरी कुंडली के भाव बदल जाते हैं।

लग्न राशि के स्वामी ग्रह को लग्नेश कहते हैं। मेष लग्न का लग्नेश मंगल है, वृषभ लग्न का शुक्र। लग्नेश कुंडली में कहाँ बैठा है और कितना बली है, यह पूरे चक्र को पढ़ने की पहली कुंजी है।

लग्न कैसे निकाला जाता है?

लग्न की गणना जन्म के क्षण, जन्म स्थान के अक्षांश-देशांतर और नक्षत्र-आधारित (निरयण) राशिचक्र से होती है। हम लाहिरी अयनांश का उपयोग करते हैं, जो भारत में सबसे अधिक प्रचलित है।

हर राशि बराबर समय तक उदित नहीं रहती। दिल्ली में मीन लग्न लगभग 1 घंटा 25 मिनट रहता है, जबकि कर्क लग्न लगभग 2 घंटे 20 मिनट। दक्षिण भारत में यह भेद कम हो जाता है, और उत्तर की ओर बढ़ता है। इसीलिए जन्म समय में कुछ मिनटों का अंतर भी लग्न बदल सकता है, विशेषकर जब जन्म किसी राशि के आरंभ या अंत के निकट हुआ हो।

ऊपर का कैलकुलेटर यही बताता है: आपका जन्म समय कितने मिनट पहले या बाद होता तो लग्न बदल जाता। यदि यह अंतर दस मिनट से कम है, तो जन्म समय एक बार और पक्का कर लें।

पश्चिमी ज्योतिष का "राइज़िंग साइन" सायन राशिचक्र से निकलता है, जो आज निरयण से लगभग 24 अंश आगे है। इसलिए पश्चिमी राइज़िंग साइन प्रायः आपके वैदिक लग्न की अगली राशि होता है।

लग्न और राशि एक नहीं हैं

आपकी राशि वह राशि है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था; आपका लग्न वह राशि है जो उस क्षण उदित हो रही थी। राशिफल चंद्र राशि से पढ़ा जाता है, लग्न से नहीं। दोनों का अंतर और अपनी चंद्र कुंडली देखने के लिए: लग्न और राशि में अंतर →

लग्न के बारे में और

बारह लग्न और उनके स्वामी

हर लग्न का स्वामी ग्रह ही उस लग्न का लग्नेश है।

मेष लग्न →

लग्नेश मंगल

वृषभ लग्न →

लग्नेश शुक्र

मिथुन लग्न

लग्नेश बुध

कर्क लग्न →

लग्नेश चंद्र

सिंह लग्न →

लग्नेश सूर्य

कन्या लग्न

लग्नेश बुध

तुला लग्न

लग्नेश शुक्र

वृश्चिक लग्न

लग्नेश मंगल

धनु लग्न

लग्नेश गुरु

मकर लग्न

लग्नेश शनि

कुम्भ लग्न

लग्नेश शनि

मीन लग्न

लग्नेश गुरु

अन्य लग्न

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लग्न से जुड़े प्रश्न

बिना जन्म समय के लग्न कैसे पता करें?

सटीक रूप से नहीं। लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए जन्म समय के बिना केवल यह कहा जा सकता है कि उस दिन कौन-कौन से लग्न संभव थे। यदि अनुमानित समय ही पता हो, तो उसे भरें और कैलकुलेटर की "कितने मिनट" वाली पंक्ति देखें — वह बताएगी कि आपके अनुमान में कितनी छूट है।

एक लग्न कितने समय का होता है?

औसतन लगभग दो घंटे, पर बराबर नहीं। दिल्ली में मीन लग्न लगभग 1 घंटा 25 मिनट रहता है और कर्क लग्न लगभग 2 घंटे 20 मिनट। यह अवधि जन्म स्थान के अक्षांश पर निर्भर करती है।

लग्न कितने प्रकार के होते हैं?

कुंडली का मुख्य लग्न जन्म लग्न है। इसके साथ चंद्र लग्न (चंद्रमा की राशि को प्रथम भाव मानकर), सूर्य लग्न, नवांश लग्न, और होरा, घटी, भाव जैसे विशेष लग्न भी देखे जाते हैं। जैमिनी पद्धति में आरूढ़, उपपद और कारकांश लग्न होते हैं। शादी के प्रसंग में "लगन" का अर्थ अलग है — विवाह का मुहूर्त।

लग्न और राशि में क्या अंतर है?

लग्न जन्म के क्षण उदित राशि है और शरीर, स्वभाव तथा जीवन की दिशा बताता है। राशि जन्म के समय चंद्रमा की राशि है और मन व भावनाओं से जुड़ी है। लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, राशि लगभग ढाई दिन में।

लग्नेश क्या होता है?

लग्न राशि का स्वामी ग्रह लग्नेश कहलाता है, जैसे सिंह लग्न का लग्नेश सूर्य और मकर लग्न का शनि। लग्नेश जिस भाव में बैठता है, जीवन का ध्यान प्रायः उसी भाव के विषयों की ओर रहता है।

वर्गोत्तम लग्न क्या है?

जब जन्म कुंडली और नवांश कुंडली में लग्न एक ही राशि में हो, तो उसे वर्गोत्तम लग्न कहते हैं। इसे लग्न को बल देने वाला माना जाता है। ऊपर का कैलकुलेटर यह भी दिखाता है।

वैदिक लग्न और पश्चिमी राइज़िंग साइन अलग क्यों आते हैं?

वैदिक ज्योतिष निरयण (नक्षत्र-आधारित) राशिचक्र मानता है और पश्चिमी ज्योतिष सायन (ऋतु-आधारित)। दोनों में आज लगभग 24 अंश का अंतर है, इसलिए पश्चिमी राइज़िंग साइन प्रायः एक राशि आगे आता है।

सूचना: यह पृष्ठ शास्त्रीय ज्योतिष सिद्धांतों पर आधारित शैक्षिक जानकारी देता है। व्यक्तिगत निर्णयों के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।