होरा चक्र क्या है
होरा चक्र में दिन और रात को 24 हिस्सों में बाँटते हैं। हर हिस्से पर एक ग्रह का असर होता है — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, और शनि। जिस ग्रह का समय हो, उससे जुड़े काम करने से अच्छा फल मिलता है।
कैसे निकालते हैं होरा
होरा इस तरह निकलता है:
- दिन की लंबाई निकालें (सूर्यास्त − सूर्योदय)।
- रात की लंबाई निकालें (अगला सूर्योदय − सूर्यास्त)।
- दिन को 12 और रात को 12 बराबर हिस्सों में बाँटें।
- ग्रहों का क्रम होता है: सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल।
- सूर्योदय से शुरू करके यह क्रम दोहराते जाएं।
होरा क्यों ज़रूरी है
- हर ग्रह का अपना ख़ास असर होता है
- सही ग्रह के समय में काम करने से फ़ायदा होता है
- ग्रहों की शक्ति का लाभ मिलता है
- ज़िंदगी के अलग-अलग कामों में मदद
ग्रह के हिसाब से काम
- सूर्य: सरकारी काम, नेतृत्व, पिता से जुड़े काम
- चंद्र: माँ से जुड़े काम, सफ़र, भावनात्मक बातें
- मंगल: ताक़त वाले काम, ज़मीन ख़रीदना, मुक़ाबला
- बुध: कारोबार, पढ़ाई, बातचीत
- गुरु: पूजा-पाठ, शादी, गुरु से मिलना
- शुक्र: प्यार, कला, संगीत, मनोरंजन
- शनि: लंबे प्रोजेक्ट, मेहनत के काम, न्याय
ध्यान रखें
- गलत ग्रह के समय में उससे उलट काम न करें
- शनि के समय में शुभ काम (शादी वग़ैरह) न शुरू करें
- मंगल के समय में शांति वाले काम टालें
याद रखने की बातें
- होरा चक्र सूर्योदय से शुरू होता है।
- हर घंटे पर एक ग्रह का असर होता है।
- अपने काम के हिसाब से सही समय चुनें।
- ग्रहों की शक्ति का फ़ायदा उठाएं।
- दिन और रात के होरा अलग-अलग होते हैं।
और जानकारी के लिए
बृहत जातक — वराहमिहिर • ज्योतिष रत्नमाला — कल्याण वर्मा • बी. वी. रमन — होरा • कलाप्रकाशिका
होरा समय-चयन की एक परत है; व्यापक निर्णय के लिए पंचांग के अन्य अंग भी देखें।