ग्रह किस भाव में है, यह दर्ज जन्म-समय के अनुसार पढ़ा गया है।
चंद्र दोपहर लगभग 2:14 बजे रेवती से अश्विनी में आया, यानी उनके जन्म से सात घंटे पहले। उसी क्षण वह मीन राशि से मेष राशि में भी आया। अश्विनी के स्वामी केतु हैं।
सूर्य आधी रात से आधी रात तक तुला में रहा, इसलिए जन्म का समय कोई भी हो, राशि यही रहती। वाणी और तर्क का ग्रह बुध यहाँ अस्त है। यानी वह सूर्य के इतने पास है कि उसकी चमक में बुध का बल घट जाता है। शास्त्रीय नियम से सूर्य की कमज़ोरी भंग हो जाती है (नीच भंग)। कारण यह है कि सूर्य की सबसे बलवान राशि मेष का स्वामी मंगल चंद्र से गिने गए केंद्र में बैठा है। केंद्र चार मुख्य भावों में से एक होता है।
मंगल पूरे दिन कर्क में रहा, सिंह राशि से लगभग दो अंश पीछे। उसकी लंबी दशा 2005 से 2012 तक चली। 3 जनवरी 2011 को, इसी दशा में, उन्होंने कैलिफ़ोर्निया की अटॉर्नी जनरल का पद सँभाला।
शनि वक्री था, यानी आकाश में उल्टी चाल चलता दिखता था। कुंभ उसकी मूलत्रिकोण राशि भी है, यानी वह राशि जहाँ वह सबसे सहज रहता है। उस दिन के हर घंटे शनि इसी राशि में रहा।
कमला हैरिस का जन्म ओकलैंड में रात 9:28 बजे हुआ, मिथुन राशि के उदय होने के पाँच मिनट बाद। कुछ मिनट पहले का जन्म वृषभ लग्न देता। इसलिए उनकी कुंडली की राशियाँ और नक्षत्र उसके भावों से ज़्यादा पक्के हैं, और यह पाठ किसी भाव का नाम नहीं लेता।
दो ग्रह अपनी सबसे कमज़ोर राशियों में हैं, जिसे ज्योतिष में नीच कहते हैं। सूर्य तुला में है, और मंगल कर्क में। शास्त्रीय नियम से सूर्य की कमज़ोरी भंग हो जाती है (नीच भंग)। सूर्य की सबसे बलवान राशि का स्वामी मंगल चंद्र से गिने गए केंद्र, यानी चार मुख्य भावों में से एक में बैठा है। इसके उलट शनि अपनी राशि कुंभ में सहज है।
उनका चंद्र मेष राशि में, अश्विनी नक्षत्र में है, जो 27 नक्षत्रों में प्रथम है। वे अमेरिका की उपराष्ट्रपति बनने वाली पहली महिला थीं। यह पृष्ठ उनकी कुंडली को उसी दर्ज इतिहास के पास रखकर पढ़ता है; यह नहीं कहता कि वह इतिहास सितारों ने लिखा।
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| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र | भाव | |
|---|---|---|---|---|---|
| लग्न | मिथुन | 1.09° | मृगशिरा, पाद 3 | 1 | |
| सूर्य | तुला | 4.45° | चित्रा, पाद 4 | 5 | नीच |
| चंद्र | मेष | 4.29° | अश्विनी, पाद 2 | 11 | |
| मंगल | कर्क | 27.93° | आश्लेषा, पाद 4 | 2 | नीच |
| बुध | तुला | 8.10° | स्वाति, पाद 1 | 5 | अस्त |
| गुरु | वृषभ | 0.64° | कृत्तिका, पाद 2 | 12 | वक्री |
| शुक्र | सिंह | 24.53° | पूर्वा फाल्गुनी, पाद 4 | 3 | |
| शनि | कुंभ | 5.10° | धनिष्ठा, पाद 4 | 9 | वक्रीमूलत्रिकोण |
| राहु | मिथुन | 2.42° | मृगशिरा, पाद 3 | 1 | वक्री |
| केतु | धनु | 2.42° | मूल, पाद 1 | 7 | वक्री |
ये योग दर्ज जन्म-समय पर पढ़े गए हैं। "पूरे दिन" वाले योग किसी भी समय बनते हैं।
| महादशा | आरंभ | समाप्ति |
|---|---|---|
| केतु | 20 अक्टूबर 1964 | 19 जुलाई 1969 |
| शुक्र | 19 जुलाई 1969 | 19 जुलाई 1989 |
| सूर्य | 19 जुलाई 1989 | 19 जुलाई 1995 |
| चंद्र | 19 जुलाई 1995 | 19 जुलाई 2005 |
| मंगल | 19 जुलाई 2005 | 19 जुलाई 2012 |
| राहु | 19 जुलाई 2012 | 19 जुलाई 2030 |
महादशा एक लंबी ग्रह-अवधि है, जो कई वर्ष चलती है। अंतर्दशा उसी के भीतर की छोटी अवधि है।
| तारीख़ | घटना | महादशा | अंतर्दशा |
|---|---|---|---|
| 8 जनवरी 2004 | सैन फ़्रांसिस्को की डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी का पद सँभाला | चंद्र | शुक्र |
| 3 जनवरी 2011 | कैलिफ़ोर्निया की अटॉर्नी जनरल का पद सँभाला | मंगल | शुक्र |
| 3 जनवरी 2017 | अमेरिकी सीनेट में अपनी सीट सँभाली | राहु | गुरु |
| 20 जनवरी 2021 | अमेरिका की उनचासवीं उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली | राहु | बुध |
| 21 जुलाई 2024 | राष्ट्रपति बाइडन के हटने के बाद राष्ट्रपति पद के लिए अपने अभियान की घोषणा की | राहु | शुक्र |
| 5 अगस्त 2024 | डेमोक्रेटिक पार्टी की आधिकारिक राष्ट्रपति उम्मीदवार बनीं | राहु | शुक्र |
| 5 नवंबर 2024 | राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप से हारीं | राहु | शुक्र |
जन्म-समय 15 मिनट इधर-उधर हो, तब भी यहाँ हर मुख्य दशा और हर अंतर्दशा वही रहती है।
अंतिम पाँच घटनाएँ राहु की लंबी दशा में आती हैं, जो 2012 में शुरू हुई। उनके जन्म के समय राहु मिथुन में था, यानी उसी राशि में जो उस क्षण उदित हो रही थी।
2024 की तीनों घटनाएँ, अभियान की शुरुआत से नवंबर के उस चुनाव तक जिसमें वे हारीं, शुक्र की अंतर्दशा में आईं। अटॉर्नी जनरल का पद भी शुक्र की अंतर्दशा में मिला, पर तब मुख्य दशा मंगल की थी।