ग्रह किस भाव में है, यह दर्ज जन्म-समय के अनुसार पढ़ा गया है।
चंद्र तड़के लगभग 3:29 बजे पूर्वाभाद्रपद में पहुँचा, यानी उनके जन्म से आठ घंटे से भी अधिक पहले। इस नक्षत्र के स्वामी गुरु हैं। उनकी कुंडली में गुरु चंद्र के साथ उसी राशि, कुंभ में बैठा है।
वारसॉ की स्थानीय घड़ी से धनु सुबह 10:35 से दोपहर 12:33 बजे तक उदित रहा, इसलिए दोपहर 12 बजे का जन्म इसके भीतर आता है। तृतीय भाव को अपने हाथों की मेहनत का भाव माना जाता है। 26 दिसंबर 1898 को उन्होंने पियरे क्यूरी के साथ रेडियम की खोज की घोषणा की।
बुध, शुक्र और शनि भी मंगल के साथ वृश्चिक में हैं, यानी इस भाव में चार ग्रह जुटे हैं। यहाँ मंगल अस्त है, यानी सूर्य के इतने पास कि उसकी चमक में मंगल का बल घट जाता है। वे वारसॉ छोड़कर पेरिस गईं और अपना पूरा वैज्ञानिक जीवन फ़्रांस में बनाया।
सूर्य पूरे दिन तुला में रहा, इसलिए जन्म का समय कोई भी हो, राशि यही रहती। शास्त्रीय नियम से यह कमज़ोरी भंग हो जाती है (नीच भंग)। कारण यह है कि तुला का स्वामी शुक्र चंद्र से गिने गए केंद्र, यानी चार मुख्य भावों में से एक में बैठा है। 1903 में भौतिकी का उनका पहला नोबेल पुरस्कार पियरे क्यूरी और हेनरी बेकरेल के साथ साझा था।
मैरी क्यूरी की कुंडली का लग्न धनु है। तब वारसॉ अपनी स्थानीय घड़ी चलाता था, और उसके हिसाब से धनु सुबह 10:35 से दोपहर 12:33 बजे तक उदित रहा। दोपहर 12 बजे का दर्ज जन्म इस अवधि के उत्तरार्ध में आता है।
लग्न का स्वामी गुरु कुंभ राशि में, पराक्रम के तृतीय भाव में, चंद्र के साथ बैठा है। दूर देशों के द्वादश भाव में, वृश्चिक राशि में चार ग्रह जुटे हैं: मंगल, बुध, शुक्र और शनि। वहाँ मंगल अपनी ही राशि में है।
सूर्य तुला में है, जो उसकी सबसे कमज़ोर राशि है, हालाँकि शास्त्रीय नियम से यह कमज़ोरी भंग हो जाती है (नीच भंग)। उनका चंद्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में है। उन्होंने दो अलग विज्ञानों में नोबेल पुरस्कार जीते: 1903 में भौतिकी और 1911 में रसायन। यहाँ कुंडली को उसी दर्ज जीवन के साथ पढ़ा गया है, उसके कारण के रूप में नहीं।
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| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र | भाव | |
|---|---|---|---|---|---|
| लग्न | धनु | 20.03° | पूर्वाषाढ़ा, पाद 3 | 1 | |
| सूर्य | तुला | 22.57° | विशाखा, पाद 1 | 11 | नीच |
| चंद्र | कुंभ | 24.47° | पूर्वा भाद्रपद, पाद 2 | 3 | |
| मंगल | वृश्चिक | 7.61° | अनुराधा, पाद 2 | 12 | अस्त |
| बुध | वृश्चिक | 14.62° | अनुराधा, पाद 4 | 12 | |
| गुरु | कुंभ | 6.00° | धनिष्ठा, पाद 4 | 3 | |
| शुक्र | वृश्चिक | 3.56° | अनुराधा, पाद 1 | 12 | |
| शनि | वृश्चिक | 3.27° | विशाखा, पाद 4 | 12 | अस्त |
| राहु | सिंह | 18.96° | पूर्वा फाल्गुनी, पाद 2 | 9 | वक्री |
| केतु | कुंभ | 18.96° | शतभिषा, पाद 4 | 3 | वक्री |
ये योग दर्ज जन्म-समय पर पढ़े गए हैं। "पूरे दिन" वाले योग किसी भी समय बनते हैं।
| महादशा | आरंभ | समाप्ति |
|---|---|---|
| गुरु | 7 नवंबर 1867 | 26 जून 1878 |
| शनि | 26 जून 1878 | 26 जून 1897 |
| बुध | 26 जून 1897 | 26 जून 1914 |
| केतु | 26 जून 1914 | 26 जून 1921 |
| शुक्र | 26 जून 1921 | 26 जून 1941 |
| सूर्य | 26 जून 1941 | 26 जून 1947 |
| चंद्र | 26 जून 1947 | 26 जून 1957 |
| मंगल | 26 जून 1957 | 26 जून 1964 |
| राहु | 26 जून 1964 | 26 जून 1982 |
महादशा एक लंबी ग्रह-अवधि है, जो कई वर्ष चलती है। अंतर्दशा उसी के भीतर की छोटी अवधि है।
| तारीख़ | घटना | महादशा | अंतर्दशा |
|---|---|---|---|
| 26 जुलाई 1895 | सो (Sceaux) में भौतिकविद पियरे क्यूरी से विवाह | शनि | गुरु |
| 26 दिसंबर 1898 | पियरे क्यूरी के साथ रेडियम की खोज की घोषणा | बुध | बुध |
| 19 अप्रैल 1906 | पेरिस में एक सड़क दुर्घटना में पियरे क्यूरी का निधन | बुध | मंगल |
| 13 मई 1906 | सोरबोन में पियरे की भौतिकी की पीठ स्वीकार की, वहाँ की पहली महिला प्रोफ़ेसर बनीं | बुध | मंगल |
| 4 जुलाई 1934 | फ़्रांसीसी आल्प्स के सांसेलमोज़ आरोग्य-निवास में निधन | शुक्र | शनि |
जन्म-समय 15 मिनट इधर-उधर हो, तब भी यहाँ हर मुख्य दशा और हर अंतर्दशा वही रहती है।
रेडियम की घोषणा और सोरबोन की पीठ, दोनों बुध की लंबी दशा में आते हैं, जो 1897 से 1914 तक चली। बुध उनके दूर देशों के द्वादश भाव के चार ग्रहों में से एक है।
उनका निधन शुक्र की लंबी दशा के भीतर शनि की अंतर्दशा में हुआ।