ग्रह किस भाव में है, यह दर्ज जन्म-समय के अनुसार पढ़ा गया है।
चंद्र रात लगभग 2:23 बजे तक, यानी आधी रात के दो घंटे से अधिक बाद तक, हस्त में रहा। हस्त के स्वामी स्वयं चंद्र हैं, इसलिए चंद्र यहाँ अपने ही नक्षत्र में है। ऊर्जा का ग्रह मंगल उसके साथ चल रहा है।
बुध पूरे दिन मिथुन में रहा, इसलिए सही घड़ी कोई भी हो, उसकी राशि यही रहती। इस एक राशि में चार ग्रह इकट्ठे हैं। 16 मई 1888 को उन्होंने अमेरिकी विद्युत इंजीनियरों के सामने अपनी प्रत्यावर्ती धारा वाली मोटर दिखाई।
चंद्र दोपहर लगभग 3:54 बजे तक कन्या में रहा, इसलिए आधी रात के आसपास के जन्म पर यह जोड़ी बनी रहती है। केतु भी इसी राशि में है। कन्या बुध की राशि है, जिसे विश्लेषण और सटीक काम से जोड़ा जाता है।
गुरु पूरे दिन मीन में रहा, इसलिए यह बात हर घड़ी पर सही है। गुरु की लंबी दशा 1882 से 1898 तक चली। मोटर का प्रदर्शन, अमेरिकी नागरिकता और नियाग्रा बिजलीघर की शुरुआत, तीनों इसी दशा में आते हैं। उनके सबसे कठिन साल भी इसी में आए: 1886 में उनकी पहली कंपनी हाथ से निकल गई, और 1895 में आग ने उनकी प्रयोगशाला नष्ट कर दी।
निकोला टेस्ला का जन्म 9 और 10 जुलाई 1856 के बीच ठीक आधी रात को स्मिल्यान में हुआ। यह बात एक जीवनीकार से आती है, किसी लिखित अभिलेख से नहीं। इसलिए यह पाठ राशियों और नक्षत्रों पर टिका है, जो आधी रात के दोनों ओर एक जैसे रहते हैं।
मिथुन राशि में चार ग्रह हैं: सूर्य, बुध, शुक्र और शनि। बुद्धि का ग्रह बुध वहाँ अपनी ही राशि में है। ज्ञान का ग्रह गुरु अपनी राशि मीन में है।
चंद्र कन्या राशि में, हाथ के नक्षत्र हस्त में है। मंगल भी वहीं है और चंद्र मंगल योग बनाता है। यह पाठ कुंडली को उनके आविष्कारों के दर्ज इतिहास के पास रखता है। यह दावा नहीं करता कि आविष्कारक को कुंडली ने गढ़ा।
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| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र | भाव | |
|---|---|---|---|---|---|
| लग्न | मेष | 11.10° | अश्विनी, पाद 4 | 1 | |
| सूर्य | मिथुन | 25.96° | पुनर्वसु, पाद 2 | 3 | |
| चंद्र | कन्या | 22.16° | हस्त, पाद 4 | 6 | |
| मंगल | कन्या | 27.10° | चित्रा, पाद 2 | 6 | |
| बुध | मिथुन | 6.27° | मृगशिरा, पाद 4 | 3 | |
| गुरु | मीन | 16.74° | रेवती, पाद 1 | 12 | |
| शुक्र | मिथुन | 22.98° | पुनर्वसु, पाद 1 | 3 | अस्त |
| शनि | मिथुन | 13.71° | आर्द्रा, पाद 3 | 3 | अस्त |
| राहु | मीन | 28.21° | रेवती, पाद 4 | 12 | वक्री |
| केतु | कन्या | 28.21° | चित्रा, पाद 2 | 6 | वक्री |
ये योग दर्ज जन्म-समय पर पढ़े गए हैं। "पूरे दिन" वाले योग किसी भी समय बनते हैं।
| महादशा | आरंभ | समाप्ति |
|---|---|---|
| चंद्र | 10 जुलाई 1856 | 26 मई 1857 |
| मंगल | 26 मई 1857 | 26 मई 1864 |
| राहु | 26 मई 1864 | 26 मई 1882 |
| गुरु | 26 मई 1882 | 26 मई 1898 |
| शनि | 26 मई 1898 | 26 मई 1917 |
| बुध | 26 मई 1917 | 26 मई 1934 |
| केतु | 26 मई 1934 | 26 मई 1941 |
| शुक्र | 26 मई 1941 | 26 मई 1961 |
| सूर्य | 26 मई 1961 | 26 मई 1967 |
महादशा एक लंबी ग्रह-अवधि है, जो कई वर्ष चलती है। अंतर्दशा उसी के भीतर की छोटी अवधि है।
| तारीख़ | घटना | महादशा | अंतर्दशा |
|---|---|---|---|
| 16 मई 1888 | अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स के सामने प्रत्यावर्ती धारा मोटर का प्रदर्शन | गुरु | बुध |
| 20 मई 1891 | उसी संस्था में अति उच्च आवृत्ति की धाराओं पर व्याख्यान | गुरु | शुक्र |
| 30 जुलाई 1891 | 35 वर्ष की आयु में अमेरिकी नागरिक बने | गुरु | शुक्र |
| 25 अगस्त 1895 | नियाग्रा फ़ॉल्स का एडम्स बिजलीघर, जिसके जनरेटर उनके काम पर आधारित थे, चालू हुआ | गुरु | मंगल |
| 7 जनवरी 1943 | 86 वर्ष की आयु में न्यूयॉर्क में निधन | शुक्र | शुक्र |
यहाँ दी गई हर मुख्य दशा और अंतर्दशा आधी रात से 15 मिनट आगे या पीछे के जन्म पर भी वही रहती है।
मोटर का प्रदर्शन, व्याख्यान, नागरिकता और नियाग्रा बिजलीघर, चारों गुरु की लंबी दशा में आते हैं। पहली कंपनी का हाथ से जाना और 1895 में प्रयोगशाला की आग भी इसी दशा में आए। गुरु अपनी राशि मीन में बैठा है।
न्यूयॉर्क में उनका निधन शुक्र की लंबी दशा की पहली अंतर्दशा में हुआ।