इन्दु लग्न, जिसे धन लग्न भी कहते हैं, धन और समृद्धि को परखने का एक विशेष लग्न है। इसे लग्न और चंद्रमा, दोनों से नवम भाव के स्वामियों की "कलाओं" से निकाला जाता है: दोनों को जोड़कर 12 से भाग दें, और शेष जितना आए, उतनी राशियाँ चंद्रमा की राशि से गिनें। यह विधि कालिदास के उत्तर कालामृत से है।
अपना इन्दु लग्न निकालें
जन्म तिथि, समय और स्थान भरें। परिणाम के साथ पूरी गणना भी दिखेगी।
मुफ़्त · खगोलीय गणना · लाहिरी अयनांश
इन्दु लग्न कैसे निकालते हैं
हर ग्रह की एक निश्चित "कला" मानी गई है: सूर्य 30, चंद्रमा 16, मंगल 6, बुध 8, गुरु 10, शुक्र 12 और शनि 1। राहु और केतु इस गणना में नहीं आते, क्योंकि वे किसी राशि के स्वामी नहीं हैं।
पहले लग्न से नवम भाव का स्वामी देखें और उसकी कलाएँ लें। फिर चंद्रमा जिस राशि में है, उससे नवम राशि का स्वामी देखें और उसकी कलाएँ लें। दोनों को जोड़ें और योग को 12 से भाग दें। शेष जितना आए, उतनी राशियाँ चंद्रमा की राशि से गिनें, चंद्र राशि को पहली मानकर। शेष शून्य हो, तो उसे 12 गिनें, यानी चंद्रमा से पहले वाली राशि।
परिणाम एक राशि है। जगन्नाथ होरा इसके साथ चंद्रमा का अंश भी लिख देता है; यहाँ भी वह अंश दिखाया गया है, पर साफ़ बताते हुए कि यह केवल एक परिपाटी है, गणना का भाग नहीं।
शास्त्रीय स्रोत
यह विधि कालिदास के उत्तर कालामृत, खंड 1, अनुभाग 4, श्लोक 27 में है। इसकी गिनती चंद्रमा से होती है; ग्रंथ लग्न से गिनने का कोई विकल्प नहीं देता, इसलिए यहाँ दूसरा परिणाम नहीं दिखाया जाता। इन्दु लग्न बृहत् पराशर होरा शास्त्र का भाग नहीं है।
इन्दु लग्न को कैसे पढ़ें
परंपरा में इन्दु लग्न या उससे केंद्र में बैठे शुभ ग्रह धन के अच्छे संकेत माने जाते हैं, और वहाँ बैठे ग्रह की दशा धन से जुड़े अवसर ला सकती है। पाप ग्रह वहाँ हों, तो धन परिश्रम और संघर्ष के बाद आता है, ऐसा पढ़ा जाता है। फिर भी इन्दु लग्न अकेले धन का निर्णय नहीं करता; द्वितीय और एकादश भाव, उनके स्वामी और दशा को साथ देखना ज़रूरी है।
उदाहरण: 4 जुलाई 1776, फ़िलाडेल्फ़िया
यह वह कुंडली है जिसके लिए जगन्नाथ होरा के परिणाम प्रकाशित हैं: शाम 5:51, स्थानीय समय। लग्न धनु है और चंद्रमा कुम्भ में।
- 1धनु लग्न से नवम राशि सिंह है; स्वामी सूर्य, 30 कलाएँ।
- 2कुम्भ के चंद्रमा से नवम राशि तुला है; स्वामी शुक्र, 12 कलाएँ।
- 330 + 12 = 42। 42 को 12 से भाग देने पर शेष 6।
- 4कुम्भ को पहली गिनकर छठी राशि कर्क है। इन्दु लग्न: कर्क।
जगन्नाथ होरा का प्रकाशित परिणाम कर्क 6°51′ है; हमारी गणना भी कर्क 6°51′ देती है (अंश चंद्रमा का)।
अलग-अलग कैलकुलेटर अलग उत्तर क्यों देते हैं
इन्दु लग्न में मतभेद कम हैं, पर तीन भूलें आसानी से हो जाती हैं। पहली, गिनती लग्न से कर देना; शास्त्र चंद्रमा से गिनने को कहता है। दूसरी, शेष शून्य आने पर उलझ जाना; शून्य का अर्थ 12 है, यानी चंद्रमा से पहले की राशि। तीसरी, कलाओं की तालिका में राहु-केतु जोड़ देना।
चूँकि इन्दु लग्न चंद्रमा और लग्न, दोनों की राशि पर टिका है, इनमें से कोई भी राशि बदलने के निकट हो, तो जन्म समय की छोटी-सी भूल भी परिणाम बदल सकती है। इसीलिए परिणाम के साथ हम यह भी बताते हैं कि जन्म समय कितने मिनट आगे-पीछे होने पर इन्दु लग्न बदल जाएगा।
अपना लग्न जानें
जन्म तिथि, समय और स्थान से लग्न, लग्नेश, नवांश लग्न और चंद्र लग्न एक साथ।
लग्न कैलकुलेटरअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इन्दु लग्न क्या है?
इन्दु लग्न धन और समृद्धि को परखने का एक विशेष लग्न है, जिसे धन लग्न भी कहते हैं। इसे लग्न और चंद्रमा से नवम भाव के स्वामियों की कलाओं से निकाला जाता है। विधि उत्तर कालामृत से है।
इन्दु लग्न कैसे निकालें?
लग्न से नवम के स्वामी और चंद्रमा से नवम के स्वामी की कलाएँ जोड़ें, योग को 12 से भाग दें, और शेष जितना आए, उतनी राशियाँ चंद्रमा की राशि से गिनें। ऊपर का कैलकुलेटर हर चरण दिखाता है।
क्या इन्दु लग्न और होरा लग्न एक ही हैं?
नहीं। दोनों धन से जोड़े जाते हैं, पर होरा लग्न जन्म और सूर्योदय के बीच के समय से निकलता है, जबकि इन्दु लग्न नवम भाव के स्वामियों और चंद्रमा से। होरा लग्न विशेष लग्न कैलकुलेटर पर मिलता है।
शेष शून्य आए तो इन्दु लग्न क्या होगा?
शून्य को 12 गिना जाता है। चंद्रमा की राशि को पहली मानकर बारहवीं राशि, यानी चंद्रमा से ठीक पहले वाली राशि, इन्दु लग्न होती है।
क्या इन्दु लग्न से पता चलता है कि मुझे कितना धन मिलेगा?
नहीं। इन्दु लग्न धन की प्रवृत्ति का एक संकेत है, उसकी मात्रा का अनुमान नहीं। धन का पूरा विचार द्वितीय और एकादश भाव, उनके स्वामियों और दशा को साथ देखकर होता है।