
23 अक्तूबर 2026 • Friday • द्वादश्यां
आज की तिथि, नक्षत्र और योग के आधार पर तैयार — कॉपी करके तुरन्त उपयोग करें
यह संकल्प मन्त्र शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत है। कृपया अपने पारिवारिक पुरोहित या आचार्य से परामर्श लें।
तिथि
द्वादश्यां
Dwadashi
नक्षत्र
पूर्वाभाद्रपदा
Purva Bhadrapada
योग
ध्रुवयोग
Dhruva
करण
बालवकरण
Balava
पक्ष
शुक्लपक्ष
Shukla
वार
भृगुवार
Friday
संवत्सर
पराभव
Parabhava
अयन
दक्षिणायन
दक्षिणायन
ऋतु
शरदृतौ
Sharad
मास
आश्विनमास
Ashwina
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः।
विष्णु भगवान का तीन बार स्मरण — सभी शुभ कार्यों का आरम्भ ईश्वर-स्मरण से होता है।
अद्य ब्रह्मणो द्वितीये परार्धे...
वर्तमान कालखण्ड का निर्धारण — ब्रह्मा के द्वितीय परार्ध में, श्वेतवाराह कल्प में, वैवस्वत मन्वन्तर में, कलियुग के प्रथम चरण में।
पराभवनामसंवत्सरे
वर्तमान संवत्सर पराभव है — बृहस्पति के 60 वर्षीय चक्र में चल रहा वर्ष।
दक्षिणायने
सूर्य दक्षिण दिशा की ओर गतिमान है (दक्षिणायन) — कर्क संक्रान्ति से मकर संक्रान्ति तक।
शरदृतौ
वर्तमान ऋतु शरदृतौ है — हिन्दू पञ्चांग में छह ऋतुओं में से एक।
आश्विनमासे
चान्द्र मास आश्विन चल रहा है (पूर्णिमान्त गणना)।
शुक्लपक्षे द्वादश्यां तिथौ
आज शुक्ल पक्ष की Dwadashi तिथि है — यह सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि (उदय तिथि) है।
भृगुवासरे
आज शुक्रवार है।
पूर्वाभाद्रपदायां नक्षत्रे
सूर्योदय पर Purva Bhadrapada नक्षत्र प्रचलित है — 27 नक्षत्रों में से एक।
ध्रुवयोगे
आज का योग Dhruva है — सूर्य और चन्द्र की स्थिति से निर्धारित।
बालवकरणे
सूर्योदय पर Balava करण प्रचलित है — तिथि का आधा भाग।
___गोत्रोत्पन्नः ___ अहं
यहाँ अपना गोत्र और नाम बोलें। ऊपर कैलकुलेटर में भरने पर ये स्वतः जुड़ जाते हैं।
आचमन करें
"ॐ केशवाय नमः", "ॐ नारायणाय नमः", "ॐ माधवाय नमः" बोलते हुए दाहिने हाथ की हथेली से तीन बार जल ग्रहण करें।
सामग्री हाथ में लें
दाहिने हाथ में जल, अक्षत (साबुत चावल), पुष्प और दक्षिणा (सिक्का) लें। बायें हाथ से दाहिनी कलाई पकड़ें।
सही दिशा की ओर मुख करें
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें। पितृ कर्म (श्राद्ध, तर्पण) के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करें।
संकल्प मन्त्र बोलें
मन्त्र को स्पष्ट रूप से पढ़ें। अपना गोत्र, नाम और पूजा का नाम भरें। ऊपर दिए कैलकुलेटर से आज का सटीक मन्त्र तैयार करें।
जल भूमि पर छोड़ें
मन्त्र पूर्ण होने पर जल को भूमि पर (या पात्र/कलश में) छोड़ दें। संकल्प सम्पन्न हुआ — अब पूजा आरम्भ करें।
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