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♋︎ कर्क लग्न

चंद्रमा का लग्न: स्वभाव, शुभ-अशुभ ग्रह और उदय-काल

लग्नेश चंद्रजल तत्त्वचर

कर्क लग्न तब होता है जब जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर कर्क राशि उदित हो रही हो। इसका स्वामी चंद्रमा है, इसलिए यह लग्न संवेदना, अपनेपन और परिवार के प्रति गहरे लगाव से जुड़ा है। मंगल इस लग्न का योगकारक है; सूर्य और शनि मारक हैं, और शुक्र बाधकेश।

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कर्क लग्न: एक नज़र में

स्वामी (लग्नेश)
चंद्र
तत्त्व
जल तत्त्व
स्वभाव
चर
नक्षत्र
पुनर्वसु (1 पाद), पुष्य (चारों पाद), आश्लेषा (चारों पाद)
योगकारक
मंगल
बाधक भाव
एकादश भाव · शुक्र

ध्यान दें: दैनिक राशिफल चंद्र राशि से पढ़ा जाता है, लग्न से नहीं। लग्न और राशि में अंतर →

कर्क लग्न के लिए ग्रहों की भूमिका

हर ग्रह किन भावों का स्वामी है, और इस लग्न के लिए वह शुभ है या अशुभ।

ग्रहस्वामित्वफल
सूर्यद्वितीय भावसममारक
चंद्रप्रथम भावशुभलग्नेश
मंगलपंचम भाव और दशम भावशुभयोगकारक
बुधतृतीय भाव और द्वादश भावअशुभ
गुरुषष्ठ भाव और नवम भावशुभ
शुक्रचतुर्थ भाव और एकादश भावअशुभबाधकेश
शनिसप्तम भाव और अष्टम भावअशुभमारक
राहुकिसी राशि के स्वामी नहींअशुभ
केतुकिसी राशि के स्वामी नहींअशुभ

कर्क लग्न में मंगल पंचम (वृश्चिक) और दशम (मेष) का अधिपति है, यानी एक त्रिकोण और एक केंद्र का; इसी से वह इस लग्न का योगकारक बनता है। ध्यान रहे कि यदि मंगल लग्न में, यानी कर्क राशि में, बैठा हो तो नीच का होता है, इसलिए उसके फल को उसकी वास्तविक स्थिति और बल देखकर ही आँकें। षष्ठ और नवम का स्वामी गुरु नवम के कारण शुभ गिना जाता है। तालिका की असली उलझन शुक्र है: वह चतुर्थ केंद्र का स्वामी है, फिर भी एकादश के स्वामित्व से अशुभ है, और चर लग्न के लिए एकादश बाधक स्थान होने से बाधकेश भी। मारक दो हैं: द्वितीयेश सूर्य, जो स्वयं सम है, और सप्तमेश शनि, जो अष्टम का भी स्वामी होने से अशुभ है।

अपनी कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति के लिए: शुभ और अशुभ ग्रह · योगकारक ग्रह · मारक ग्रह

स्वभाव और शरीर

कर्क लग्न के लोग प्रायः भावुक, संवेदनशील और दूसरों की ज़रूरत को बिना कहे समझ लेने वाले होते हैं। लग्नेश चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए इनका मिज़ाज वातावरण और आसपास के लोगों के साथ बदलता रहता है। घर, परिवार और पुरानी यादें इन्हें गहराई से बाँधे रखती हैं; जिनसे ये जुड़ जाते हैं, उनकी रक्षा पूरी निष्ठा से करते हैं।

यह चर राशि और जल तत्त्व का लग्न है। चर गुण इन्हें सक्रिय रखता है और नई परिस्थितियों में पहल करवाता है, जबकि जल तत्त्व गहरी भावना और कल्पनाशक्ति देता है। मन आहत होने पर ये भीतर सिमट जाते हैं, जैसे केकड़ा अपने खोल में। परंपरा में कर्क लग्न को गोल चेहरे, कोमल त्वचा और बदलते भावों वाली आँखों से पहचाना गया है; पर लग्न के ग्रह और चंद्रमा का पक्ष-बल व स्थिति इस वर्णन को काफ़ी बदल सकते हैं।

करियर और कर्म-क्षेत्र

कर्क लग्न का दशम भाव मेष है और उसका स्वामी योगकारक मंगल है। इसलिए शांत और भावुक माना जाने वाला यह लग्न कर्म-क्षेत्र में साहस, पहल और प्रतिस्पर्धा का परिचय दे सकता है। मंगल की स्थिति इंजीनियरिंग, सेना या पुलिस, चिकित्सा और शल्य-कार्य, भूमि और भवन-निर्माण या अपने उद्यम जैसी दिशाओं की ओर संकेत कर सकती है।

चंद्रमा के लग्नेश होने से जनता से जुड़ा काम, देखभाल और सेवा, आतिथ्य, खाद्य-व्यवसाय, नर्सिंग या जल से संबंधित क्षेत्र भी इन्हें भाते हैं। पंचम का स्वामी भी मंगल ही है, इसलिए शिक्षा, योजना बनाने का कौशल और सलाह देने की क्षमता करियर में सीधे काम आते हैं। कर्म-क्षेत्र में उठान कब होगा, यह दशम भाव, मंगल के बल और चल रही दशा को एक साथ देखकर ही कहा जा सकता है, किसी निश्चित आयु के आधार पर नहीं।

विवाह और संबंध

सप्तम भाव मकर है, जिसका स्वामी शनि है। कर्क लग्न अपनापन खुलकर जताना चाहता है, जबकि मकर का स्वभाव संयम, कर्तव्य और व्यावहारिकता का है। इसलिए जीवनसाथी को प्रायः गंभीर, मेहनती, ज़िम्मेदार और भावनाएँ कम शब्दों में व्यक्त करने वाला बताया जाता है; उसका प्रेम बातों से अधिक कामों में दिखता है।

शनि अष्टम भाव का भी स्वामी है, जो साझा धन, ससुराल और जीवन के गहरे बदलावों से जुड़ा है; इसलिए इस लग्न के लिए विवाह अक्सर एक बड़ा मोड़ साबित होता है। सप्तमेश होने से शनि मारक भी है, अतः उसकी दशा में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना उचित है। इस रिश्ते में विश्वास समय लेकर पकता है, और पक जाने पर टिकाऊ होता है। विवाह का समय सप्तम भाव, शनि और उसकी दशा से पढ़ें।

स्वास्थ्य के संकेत

काल-पुरुष में कर्क राशि छाती, स्तन और पेट का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए ज्योतिषीय परंपरा इस लग्न के लिए पाचन, आमाशय और वक्ष-क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशीलता का उल्लेख करती है, विशेषकर जब चंद्रमा क्षीण या पीड़ित हो। लग्नेश मन का भी कारक है, इसलिए मानसिक तनाव का असर भूख और नींद पर जल्दी पड़ने की प्रवृत्ति बताई जाती है। ऊपर लिखी बातें ज्योतिषीय संकेत हैं, चिकित्सा-निदान का विकल्प नहीं; कोई परेशानी हो तो डॉक्टर से जाँच कराएँ।

कर्क लग्न कितनी देर उदित रहता है

दिल्ली के अक्षांश पर कर्क बारह राशियों में सबसे लंबे समय तक उदित रहती है, और दक्षिण की ओर यह अवधि घटती जाती है; चेन्नई में यह लग्न लगभग 11 मिनट कम देर तक रहता है।

शहरउदय-काल
नई दिल्ली2 घंटे 20 मिनट
लखनऊ2 घंटे 19 मिनट
कोलकाता2 घंटे 16 मिनट
मुंबई2 घंटे 13 मिनट
चेन्नई2 घंटे 9 मिनट
बेंगलुरु2 घंटे 9 मिनट

खगोलीय गणना, लाहिरी अयनांश। यह अवधि पूरे वर्ष लगभग एक-सी रहती है; हर दिन बस इसका आरंभ लगभग चार मिनट पहले हो जाता है। आज की लग्न सारणी →

कर्क लग्न के नक्षत्र और पाद

लग्न का अंश जिस पाद में पड़ता है, उसी से नवांश लग्न बनता है।

अंशनक्षत्रपादनवांश राशि
0°00′–3°20′पुनर्वसु4कर्कवर्गोत्तम
3°20′–6°40′पुष्य1सिंह
6°40′–10°00′पुष्य2कन्या
10°00′–13°20′पुष्य3तुला
13°20′–16°40′पुष्य4वृश्चिक
16°40′–20°00′आश्लेषा1धनु
20°00′–23°20′आश्लेषा2मकर
23°20′–26°40′आश्लेषा3कुम्भ
26°40′–30°00′आश्लेषा4मीन

जब लग्न और नवांश लग्न एक ही राशि हों, तो लग्न वर्गोत्तम कहलाता है और बलवान माना जाता है। अपना नवांश लग्न देखें →

कर्क लग्न वाले प्रसिद्ध लोग

केवल वे लोग जिनका जन्म समय शोध से प्रमाणित है।

लग्नेश चंद्र किस भाव में हैं?

कर्क लग्न का पूरा फल लग्नेश चंद्र के भाव से खुलता है। लग्नेश जिस भाव में हो, जीवन का ध्यान उसी ओर अधिक जाता है। बारह भावों में लग्नेश का फल →

क्या आपका लग्न कर्क है? लग्नेश चंद्र आपकी कुंडली में कहाँ हैं, इसी से आगे का फल तय होता है।

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सम्पूर्ण जन्म कुंडली रिपोर्ट

बारहों लग्न

मेष लग्न →वृषभ लग्न →मिथुन लग्नकर्क लग्नसिंह लग्न →कन्या लग्नतुला लग्नवृश्चिक लग्नधनु लग्नमकर लग्नकुम्भ लग्नमीन लग्न

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्क लग्न का स्वामी कौन है?

चंद्रमा। उसका स्वामित्व केवल इसी एक राशि पर है, इसलिए कर्क लग्न का लग्नेश किसी और भाव का भार नहीं उठाता। पर चंद्रमा तेज़ी से चलता है और घटता-बढ़ता रहता है, इसलिए इस लग्न में उसका पक्ष-बल, यानी शुक्ल या कृष्ण पक्ष में होना, और उसकी स्थिति विशेष रूप से देखी जाती है।

कर्क लग्न का योगकारक ग्रह कौन है?

मंगल, क्योंकि वह पंचम (वृश्चिक) और दशम (मेष) का स्वामी है। पंचम त्रिकोण है और दशम सबसे बलवान केंद्र, इसलिए यह मेल बुद्धि और कर्म को जोड़ता है। यदि मंगल लग्न में, यानी कर्क में, हो तो वह नीच का होता है; ऐसे में उसका फल बाकी कुंडली देखकर ही आँकें।

कर्क लग्न के मारक ग्रह कौन हैं?

द्वितीय भाव (सिंह) का स्वामी सूर्य और सप्तम भाव (मकर) का स्वामी शनि। सूर्य स्वयं सम ग्रह है, जबकि शनि अष्टम का भी स्वामी होने से अशुभ है। मारक शब्द मृत्यु की भविष्यवाणी नहीं करता; यह उन दशाओं को चिह्नित करता है जिनमें सेहत की देखभाल को प्राथमिकता देना अच्छा रहता है।

कर्क लग्न के लिए शुक्र अशुभ क्यों है?

शुक्र यहाँ चतुर्थ (तुला) और एकादश (वृषभ) का स्वामी है। एकादश का स्वामित्व उसे कार्यात्मक रूप से अशुभ बनाता है, और चर लग्न में एकादश ही बाधक भाव है, इसलिए वह बाधकेश भी है। फिर भी वह चतुर्थेश है, इसलिए घर, वाहन और सुख-सुविधा के विषय उसी से जुड़े रहते हैं, और एकादशेश के रूप में आय भी; बलवान शुक्र इन क्षेत्रों में अच्छा फल दे सकता है।

कर्क लग्न का भाग्योदय कब होता है?

नवम भाव मीन है, जिसका स्वामी गुरु है। वह षष्ठ का भी स्वामी है, फिर भी नवम के कारण शुभ गिना जाता है; और यदि लग्न में, यानी कर्क राशि में, बैठा हो तो उच्च का होता है। भाग्योदय के लिए कोई तय आयु नहीं है: गुरु की स्थिति, बल और उसकी महादशा या अंतर्दशा का समय मिलकर इसका संकेत देते हैं।

लग्न कर्क और चंद्र राशि अलग हो, तो कौन-सी मानें?

दोनों की अपनी भूमिका है। लग्न जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित राशि है और कुंडली के सभी भाव उसी से गिने जाते हैं; चंद्र राशि वह है जिसमें तब चंद्रमा था। दैनिक राशिफल चंद्र राशि से पढ़ा जाता है, जबकि स्वभाव और भावों का विश्लेषण लग्न से होता है।

सूचना: यह पृष्ठ शास्त्रीय ज्योतिष सिद्धांतों पर आधारित शैक्षिक जानकारी देता है। व्यक्तिगत निर्णयों के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।