ग्रह किस भाव में है, यह दर्ज जन्म-समय के अनुसार पढ़ा गया है।
मालागा की स्थानीय घड़ी से कर्क रात 10:09 बजे उदित हुआ, इसलिए रात 11:15 बजे का जन्म आराम से इसी के भीतर आता है। इस भाव में चंद्र के साथ बुध और राहु भी हैं। उन्होंने चित्रकला, मूर्तिकला, छापा-कला, सिरेमिक (मृत्तिका-शिल्प) और मंच-सज्जा, सबमें काम किया।
चंद्र रात लगभग 12:46 बजे विशाखा से अनुराधा में आ चुका था, यानी उनके जन्म से लगभग पूरा एक दिन पहले। अनुराधा के स्वामी शनि हैं। उनकी कुंडली में शनि कामकाज के दशम भाव में हैं।
सूर्य पूरे दिन तुला में रहा। शास्त्रीय नियम से सूर्य का नीच भंग होता है, यानी उसकी कमज़ोरी दूर होती है। शनि, जो तुला में सबसे बलवान होता है, एक केंद्र भाव (चार मुख्य भावों में से एक) में बैठा है। उन्होंने अपना अधिकांश वयस्क जीवन फ़्रांस में बिताया।
शास्त्रीय नियम से शनि का भी नीच भंग होता है। मेष में सबसे बलवान होने वाला सूर्य घर के चतुर्थ भाव में है, जो एक केंद्र, यानी मुख्य भाव, भी है। इस तरह सूर्य और शनि एक-दूसरे को सहारा देते हैं।
शुक्र पूरे दिन कन्या में रहा। शास्त्रीय नियम से शुक्र का नीच भंग होता है। कन्या का स्वामी बुध चंद्र की ही राशि में है। इसे चंद्र से केंद्र भाव (चार मुख्य भावों में से एक) में होना माना जाता है। जॉर्ज ब्राक के साथ मिलकर उन्होंने क्यूबिज़्म शैली विकसित की।
पाब्लो पिकासो की कुंडली का लग्न कर्क है, जो चंद्र की अपनी राशि है। लग्न का स्वामी चंद्र रचनात्मकता के पंचम भाव में, वृश्चिक राशि में बैठा है, और बुध व राहु भी इसी राशि में हैं।
सूर्य, शुक्र और शनि, तीनों अपनी-अपनी सबसे कमज़ोर राशि में हैं, पर शास्त्रीय नियम से तीनों का नीच भंग होता है। चंद्र भी अपनी सबसे कमज़ोर राशि में है, पर उसे ऐसी राहत नहीं मिलती। उनका चंद्र अनुराधा नक्षत्र में है।
बचपन में स्पेन में उन्होंने चित्रकार पिता से सीखा। पेरिस में आगे चलकर वे क्यूबिज़्म की नींव रखने वालों में से एक बने। 91 वर्ष की आयु में निधन तक वे काम करते रहे। यहाँ कुंडली को उसी दर्ज जीवन के साथ पढ़ा गया है, उसके कारण के रूप में नहीं।
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| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र | भाव | |
|---|---|---|---|---|---|
| लग्न | कर्क | 13.44° | पुष्य, पाद 4 | 1 | |
| सूर्य | तुला | 10.50° | स्वाति, पाद 2 | 4 | नीच |
| चंद्र | वृश्चिक | 16.01° | अनुराधा, पाद 4 | 5 | नीच |
| मंगल | मिथुन | 20.14° | पुनर्वसु, पाद 1 | 12 | |
| बुध | वृश्चिक | 2.03° | विशाखा, पाद 4 | 5 | |
| गुरु | वृषभ | 1.35° | कृत्तिका, पाद 2 | 11 | वक्री |
| शुक्र | कन्या | 12.32° | हस्त, पाद 1 | 3 | नीच |
| शनि | मेष | 17.25° | भरणी, पाद 2 | 10 | वक्रीनीच |
| राहु | वृश्चिक | 18.62° | ज्येष्ठा, पाद 1 | 5 | वक्रीनीच |
| केतु | वृषभ | 18.62° | रोहिणी, पाद 3 | 11 | वक्रीनीच |
ये योग दर्ज जन्म-समय पर पढ़े गए हैं। "पूरे दिन" वाले योग किसी भी समय बनते हैं।
| महादशा | आरंभ | समाप्ति |
|---|---|---|
| शनि | 25 अक्टूबर 1881 | 4 अक्टूबर 1882 |
| बुध | 4 अक्टूबर 1882 | 4 अक्टूबर 1899 |
| केतु | 4 अक्टूबर 1899 | 4 अक्टूबर 1906 |
| शुक्र | 4 अक्टूबर 1906 | 4 अक्टूबर 1926 |
| सूर्य | 4 अक्टूबर 1926 | 4 अक्टूबर 1932 |
| चंद्र | 4 अक्टूबर 1932 | 4 अक्टूबर 1942 |
| मंगल | 4 अक्टूबर 1942 | 4 अक्टूबर 1949 |
| राहु | 4 अक्टूबर 1949 | 4 अक्टूबर 1967 |
| गुरु | 4 अक्टूबर 1967 | 4 अक्टूबर 1983 |
महादशा एक लंबी ग्रह-अवधि है, जो कई वर्ष चलती है। अंतर्दशा उसी के भीतर की छोटी अवधि है।
| तारीख़ | घटना | महादशा | अंतर्दशा |
|---|---|---|---|
| 17 फ़रवरी 1901 | घनिष्ठ मित्र, चित्रकार कार्लेस कासाहेमास ने पेरिस में आत्महत्या की | केतु | शुक्र |
| 14 दिसंबर 1915 | जीवन-संगिनी एवा गुएल का तपेदिक से निधन | शुक्र | राहु |
| 18 मई 1917 | पेरिस में बैले 'परेड' का पहला मंचन, मंच-सज्जा और पोशाकें उनकी | शुक्र | गुरु |
| 12 जुलाई 1918 | पेरिस में बैले नर्तकी ओल्गा खोख्लोवा से विवाह | शुक्र | गुरु |
| 4 जून 1937 | बास्क नगर पर बमबारी के बाद बनाई 'गेर्निका' पूरी की | चंद्र | शनि |
| 9 जनवरी 1949 | श्वेत-श्याम लिथोग्राफ़ 'कपोत' (डव) बनाया | मंगल | — |
| 2 मार्च 1961 | वालोरिस में जैकलीन रोक से विवाह | राहु | — |
| 8 अप्रैल 1973 | दक्षिणी फ़्रांस के मूजाँ में निधन | गुरु | बुध |
यहाँ दो अंतर्दशाएँ खाली छोड़ी गई हैं: जन्म-समय 15 मिनट इधर-उधर होने पर वे बदल जातीं।
शुक्र की लंबी दशा, लगभग 1906 से 1926 तक, 'परेड' और उनके पहले विवाह को समेटती है। इसी दशा में एवा गुएल का निधन भी आता है। शुक्र उनके पराक्रम और हाथ के हुनर के तृतीय भाव में है।
'गेर्निका' चंद्र की लंबी दशा में आती है, जो लगभग 1932 से 1942 तक चली। चंद्र उनके लग्न का स्वामी है और रचनात्मकता के पंचम भाव में बैठा है। इसी दशा में 1935 का वह वर्ष भी आता है, जब उन्होंने तलाक़ चाहा और ओल्गा खोख्लोवा ने उसे स्वीकार नहीं किया।